<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529</id><updated>2012-01-26T13:27:54.248+05:30</updated><category term='सम्पत्ति'/><category term='ढोंग'/><category term='ओबमा पीछे.'/><category term='महंगाई'/><category term='ब्रिज'/><category term='मास्क'/><category term='जी.डी.पी.'/><category term='स्वास्थ्य'/><category term='युध्द'/><category term='बाघ'/><category term='सरकार'/><category term='कालाबाजारी'/><category term='घास'/><category term='समय'/><category term='भ्रष्टाचार'/><category term='आई पी एल तड़का और नैतिकता'/><category term='मसूरी'/><category term='पोलखोल'/><category term='सुरक्षा परिषद में दावेदारी'/><category term='शादी'/><category term='माया आगे'/><category term='भूख'/><category term='जवाबदेही'/><category term='नुक्सान'/><category term='मराठी'/><category term='उत्साह'/><category term='नोट करे सब chont'/><category term='ईर्ष्या'/><category term='आशियाने'/><category term='लापरवाही'/><category term='नीति'/><category term='राज'/><category term='सट्टेबाजी'/><category term='किसान'/><category term='जीडीपी का खेल'/><category term='आम आदमी कंगाल'/><category term='raksha'/><category term='नेता'/><category term='अंग्रेज'/><category term='कुपोषण'/><category term='राजनीतिक दल मालामाल'/><category term='दाई से भला पेट छिपता हैं'/><category term='सरकार का प्रयास'/><category term='एस.जी.एक्स'/><category term='एडवांस'/><category term='प्रेम'/><category term='सियासत'/><category term='कम खर्चा'/><category term='कीड़े'/><category term='हड़ताल'/><category term='मीठी मिर्ची'/><category term='सवागत'/><category term='आत्महत्या'/><category term='स्वाइन फ्लू'/><category term='उम्मीद'/><category term='काम धंधा बहक जाना'/><category term='क्रिकेट'/><category term='महँगा'/><category term='नोबेल'/><category term='लहरा लो तिरंगा प्यारा'/><title type='text'>नटखट</title><subtitle type='html'>देश के नजरिये से अगर इस दौर में सरकार को परिभाषित किया जाये तो पहले देश बेचना, फिर देश की फिक्र करना और अब फिक्र करते हुये देश को अपनी अंगुलियो पर नचाना ही सरकार का राजनीतिक हुनर है।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' 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स्टेनले जैसे प्रमुख अमेरिकी बैंक शामिल हैं।एसएंडपी ने एक साल से अधिक समय तक अध्ययन और विश्लेषण करने के बाद पिछले सप्ताह संशोधित रेटिंग मानदंड जारी किए।रेटिंग एजेंसी ने बैंकों के लिए नए मानदंड में निवेश बैंकिंग के साथ जुड़े जोखिम, बैंकों के लिए वित्तीय व्यवस्था और बैंकिंग उद्योग में सरकार और केंद्रीय बैंकों की भूमिका जैसे तत्वों को शामिल किया है।रेटिंग एजेंसी ने बार्कलेज, एचएसबीसी, ल्योड्स और रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड जैसे प्रमुख ब्रिटिश बैंकों की भी रेटिंग घटाई है। लेकिन क्रेडिट सुईस और डॉयश बैंक की रेटिंग में बदलाव नहीं किया गया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4202831583651250488?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4202831583651250488/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4202831583651250488' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4202831583651250488'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4202831583651250488'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2011/11/blog-post.html' title='एसएंडपी ने प्रमुख अमेरिकी बैंकों की रेटिंग घटाई'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-4264284770725357982</id><published>2011-05-02T15:44:00.002+05:30</published><updated>2011-05-02T16:53:35.199+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='घास'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महंगाई'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कीड़े'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्वास्थ्य'/><title type='text'>कांग्रेस की घास कांग्रेस के कीड़े</title><content type='html'>आज़ाद भारत पर सबसे ज्यादा सालों तक शासन करने का श्रेय कांग्रेस के पास है । घोटालेबाज और महंगाईगीरी में एकाधिकार वर्चस्व स्थापित कर चुकी कांग्रेस के पास एक ऐसी घास है जो पिछले कई दशकों से देश की लक्ष्मी को तो चाट रही है साथ ही भारतीयों को अस्थमा और फोड़े फुंसियां जैसी बीमारियाँ भी &lt;span&gt;बोनस&lt;/span&gt; में दे रही है।&lt;br /&gt;&lt;span&gt;दरअसल, आज़ादी के बाद जब देश में गेहूं की कमी हो गयी थी । तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने १९५० में अमेरिका से &lt;/span&gt;पी.एल - ४८० किस्म के गेहूं का आयात किया गया था । इस गेहूं के साथ अमेरिका ने एक घास भी भेज दिया था। इस घास का वैज्ञानिक नाम -&lt;span style="color:#003300;"&gt; पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ffff00;"&gt; &lt;/span&gt;है। भारत में इसे &lt;span style="color:#000066;"&gt;गाजर घास&lt;/span&gt; के नाम से जाना जाता है। लेकिन सियासी मैदान में ये घास &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;कांग्रेस घास&lt;/span&gt; के नाम से बहुचर्चित है। इस घास को सबसे पहले &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;१९५६ में पुणे&lt;/span&gt; में देखा गया था। &lt;br /&gt;कांग्रेस घास पिछले ५५ सालों में देश की करीब ३५० लाख हेक्टेयर भूमि पर फ़ैल चुकी है । इनमें से लगभग २० लाख हेक्टेयर जमीन खेती की है कारगिल से लेकर अंडमान निकोबार और दिल्ली तक इसने अपने पैर पसार लिए हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;फसल और इन्सान के लिए खतरनाक -&lt;/span&gt; कांग्रेस घास के पौधे की लम्बाई एक मीटर से डेढ़ मीटर तक होती है। एक पौधे में तकरीबन २५-३० हजार बीज पैदा होते हैं। और प्रकीर्णन के माध्यम से दूर - दूर तक पहुँच जाते हैं। जिसका इलाज वैज्ञानिक अभी तक नहीं ढूंढ पाए हैं। इसके कारण त्वचा काली पड़ जाती है। और उस पर फुन्सिया निकल आती हैं। इस घास के बीजों के संपर्क मेंआने से अस्थमा भी हो सकता है । जानवरों के लिए ये घास बेहद खतरनाक है। गाय और बकरी जैसे पशुओं की त्वचा में ये बुरा प्रभाव डालती हैं। दुधारू पशु जब इस घास को खाते हैं तो उनके दूध का स्वाद कसैला महसूस होता हैं। और लम्बे समय तक अगर ऐसे दूध का सेवन किया जाए तो मौत भी हो सकती है। कांग्रेस घास हर तरह की भूमि और जलवायु में उग सकती है। तकरीबन &lt;span style="color:#990000;"&gt;२५-३० डिग्री सेल्सियस तापमान&lt;/span&gt; पर इसका अंकुरण हो सकता है। इस घास का प्रसार अनाज उत्पादन में कमी के लिए भी जिम्मेदार है । यह एक ऐसी खरपतवार है जो फसलों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;घास चरने की तैयारी -&lt;/span&gt; अब वैज्ञानिकों ने इसका नामो निशान मिटाने के लिए मक्सिको से &lt;span style="color:#990000;"&gt;जायागोग्रेम्मा बाइको लोराटा&lt;/span&gt; नाम के कीट के आयात का फैसला किया गया है। यह कीट कांग्रेस घास को चट कर जाता है। इसके ट्रायल के नतीजे अच्छे खासे रहे हैं। केमिकल्स की मदद से भी इसे ख़त्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। लोगों को इस घास और इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा रहा है । इस कांग्रेस घास ने सरकारी खजाने को भी कायदे से साफ़ किया हैं। अब तक सरकारी खजाने से इस घास ने डेढ़ लाख करोड़ रुपये चाट चुकी है। जानकारों की मानें तो अभी इस घास से मुक्ति पाने के लिए भारी भरकम रकम खर्च करने की ज़रुरत है। जिसमें मजदूरों पर तकरीबन १६,८०० और रासायनों पर ११,900 करोड़ रुपये का मोटा खर्च होने की उम्मीद है। &lt;br /&gt;अब महंगाई के इस सर्पदंश से खेल रहे देश के आम नागरिकों के साथ कांग्रेस की घास औरकांग्रेस के कीड़े क्या नया शिगूफा रचेंगे ये भी देखना दिलचस्प रहेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4264284770725357982?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4264284770725357982/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4264284770725357982' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4264284770725357982'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4264284770725357982'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='कांग्रेस की घास कांग्रेस के कीड़े'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-1943562117146625722</id><published>2011-01-25T10:42:00.004+05:30</published><updated>2011-01-25T14:24:52.458+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लहरा लो तिरंगा प्यारा'/><title type='text'>लहराते तिरंगे का सफ़र</title><content type='html'>देश की आन बान शान लहराता तिरंगा झंडा ने आज ६३ साल का सफ़र पूरा कर लिया हैं। देश में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा २२ जुलाई १९४७ को मिला। इससे पहले इसे &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;"स्वराज फ्लैग "&lt;/span&gt; के नाम से जाना जाता था। और इसका उपयोग कांग्रेस पार्टी किया करती थी।&lt;br /&gt;महात्मा गाँधी ने कांग्रेस के समक्ष पहली बार १९२१ में ध्वज का प्रस्ताव रखा। इस ध्वज की डिजाइन कृषि वैज्ञानिक पिंगाली वेंकैया ने तैयार किया था। थोड़ा सा बदलाव करके इस ध्वज को "स्वराज फ्लैग " नाम से १९३१ में कांग्रेस ने अपना आधिकारिक ध्वज घोषित कर दिया। स्वराज फ्लैग में तीन रंग केसरिया, सफ़ेद और हरा रंग था और बीच में चरखा बना हुआ था। जब आज़ादी का समय आया तो डॉ राजेंद्र प्रसाद कि अध्यक्षता में एक कमेटी बनायीं गयी। इस कमेटी ने १४ जुलाई १९४७ को कांग्रेस पार्टी के स्वराज फ्लैग को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का सुझाव दिया गया। और इसके बाद स्वराज फ्लैग से चरखा हटाकर &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;"अशोक चक्र"&lt;/span&gt; अंकित किया गया। और &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;२२ जुलाई १९४७ को राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा दिया गया। &lt;/span&gt;राष्ट्रीय ध्वज के निर्धारण में इस बात का ख़याल रखा गया कि सभी पार्टियों और धार्मिक समुदायों को स्वीकार्य हो। पूर्व उप राष्ट्रपति ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसे परिभाषित किया - जिसमें केसरिया रंग त्याग और सहस, श्वेत रंग शांति और सत्य एवं हरा रंग विश्वास और हरियाली का प्रतीक हैं। इसके अलावा ध्वज के मध्य अशोक चक्र देश कि गतिशीलता व धर्म को दर्शाता हैं। राष्ट्र ध्वज का इस्तेमाल और प्रदर्शन फ्लैग कोड ऑफ इंडिया द्वारा संचालित होता हैं।&lt;br /&gt;क़ानून के तहत अगर कोई व्यक्ति या संस्थान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता पाया जाता हैं तो उसे तीन साल की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं । सन २००१ के पहले किसी को भी स्वतंत्रता दिवस या फिर गणतन्त्र दिवस के अलावा अन्य अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज अपने घर या कार्यालय पर फहराने कि इजाज़त नहीं थी। लेकिन २६ जनवरी २००२ से सरकार ने फ्लैग कोड ऑफ इंडिया में संसोधन करके इसकी इजाज़त प्रदान की। इसी तरह राष्ट्रीय ध्वज को रात्रि में फहराने की इजाज़त नहीं थी । मगर २००९ में एक जनहित याचिका की सुनवाई पर सरकार ने विशेष शर्तों के साथ इसे फहराने की अनुमति दे दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;तिरंगे का इतिहास -&lt;/span&gt; पहली बार तिरंगा झंडा ७ अगस्त १९०६ में सचिन्द्र बोस ने बंगाल विभाजन के विरोध में बनाया था। इसे " कलकत्ता फ्लैग " का नाम दिया गया . इस ध्वज में केसरिया,पीला और हरा रंग उपयोग में लाया गया। और झंडे के बीच में हिंदी में वन्दे मातरम लिखा हुआ था।&lt;br /&gt;२- इसके बाद होम रूल आन्दोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने १९१७ में नया ध्वज बनाया । इस ध्वज पर पांच लाल और चार हरी तिरक्षी &lt;span style="font-size:+0;"&gt;पट्टियाँ बनीं &lt;/span&gt;थी। सात तारों को भी इस पर अंकित किया गया था। यह ध्वज लोगों के बीच ज्यादा प्रसिद्द नहीं हुआ।&lt;br /&gt;इस तरह से तिरंगे ने इतना लंबा सफ़र तय करने के बाद आज भी देश में तिरंगे की हालत बाद से बदतर हैं। प्लास्टिक के झंडे ज्यादा बाज़ार में आ गए हैं। ये नष्ट नहीं होते जिसकी वजह से लोगों के पैरों तले और नालियों में पड़े रहते हैं। आज एक बार फिर सभी को देश के प्रति जागरूक होने की ज़रुरत हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-1943562117146625722?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/1943562117146625722/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=1943562117146625722' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1943562117146625722'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1943562117146625722'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2011/01/blog-post.html' title='लहराते तिरंगे का सफ़र'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3971516538560194110</id><published>2010-11-30T15:07:00.003+05:30</published><updated>2010-12-01T12:32:50.027+05:30</updated><title type='text'>हमारे समाज का महारोग एड्स</title><content type='html'>एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम अथवा एड्स पूरी दुनिया में तेजी से पाँव पसार रहा हैं। एचआईवी पाजटिव होने का मतलब आम तौर पर ज़िन्दगी का अंत मान लिया जाता हैं लेकिन यह अधूरा सच हैं और डाक्टरों के मुताबिक एच आई वी पॉजीटिव लोग भी सामान्य आदमी की तरह लम्बे समय तक जीवन जी सकते हैं। न्यूयॉर्क में एड्स की पहचान १९८१ में समलिंगी वयस्क पुरुषों में प्रतिरक्षण क्षमता में कमी एवं उच्च मृत्यु दर के लक्षणों के साथ की गयी। और इसका नाम &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;एड्स&lt;/span&gt; रखा गया।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;ए-&lt;/span&gt; मतलब एक्वायर्ड यानी यह रोग किसी दूसरे व्यक्ति से लगता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;आई डी--&lt;/span&gt; मतलब इम्यूनो डिफीशिएंसी यानी यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;एस -&lt;/span&gt;मतलब सिंड्रोम यानी कई तरह के लक्षणों से पहचानी जाती हैं।&lt;br /&gt;वास्तव में एड्स वर्तमान समाज में मानव सभ्यता की समझ सबसे बड़ी चुनौती बनकर खडा है। इस बीमारी का लाइलाज होना ही इससे भयाक्रांत होने का सबसे प्रमुख कारण हैं। पूरी दुनिया में अब तक तकरीबन ढाई करोड़ लोग एड्स के गाल में समा चुके हैं और करोड़ों लोग अभी इसके प्रभाव में हैं। एड्स रोगियों में अफ्रीका पहले नंबर में हैं जबकि भारत दूसरे नंबर में हैं। &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;भारत में पहला एड्स मरीज मद्रास में पाया गया था।&lt;/span&gt; अमेरिका में ये रोग समलैंगिकता के कारण तेजी से फैला जबकि भारत में असुरक्षित यौन सम्बन्धों के कारण दिनों दिन अपने पैर जमा रहा हैं।&lt;br /&gt;जुलाई २००५ में ब्राजील की राजधानी रियो-डी - जेनेरिया में १२५ देशों के लगभग ५०० विशेषज्ञों ने मिलकर एक सेमिनार का आयोजन किया था। और उसमें २६० शोध पत्र पेश किये गए थे। बीमारी से लड़ने हेतु तमाम सुझाव भी दिए गए थे। शोध के मुताबिक पूरी दुनिया में १४००० लोग हर दिन एड्स की चपेट में आते हैं। ९५ फ़ीसदी लोग मध्यम और कम आय वाले देशों के होते हैं । २००५ में ६.५ मिलियन एड्स से पीड़ित लोगों को उपचार की ज़रुरत थी लेकिन एक मिलियन का ही उपचार हो सका ।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;भारत में एड्स के हालत&lt;/span&gt; -&lt;br /&gt;यूनिसेफ,यूएन एड्स और विश्व स्वस्थ्य संगठन के ताजे सर्वेक्षण&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;माता से बच्चों में एचआईवी संक्रमण की रोक - &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;---&lt;/span&gt; एचआईवी पॉजीटिव गर्भाधारित महिलाओं की संख्या - ६४,०००&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;--&lt;/span&gt; एचआईवी पॉजीटिव के साथ उत्पन्न बच्चों की संख्या और प्रतिशत - १२,00 {२%}&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;--&lt;/span&gt; १५ - २४ साल के लोगों में एचआईवी पुरुषों में - ०.३% और महिला ०.३%&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;-- &lt;/span&gt;१५-२४ साल के लोगों में जो पिछले एक वर्ष में एक से अधिक जीवन साथी के साथ लैंगिक सम्बन्ध बनाये उनका प्रतिशत पुरुष - १.६%, महिला ०.१%&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;--&lt;/span&gt; एचआईवी से ग्रसित अनाथ बच्चों की संख्या २५,०००,०००&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;इस&lt;/span&gt; सच्चाई को जानने के बाद यही कहा जा सकता हैं की एड्स एक बड़ी बीमारी हैं - बेहद खतरनाक भी, लेकिन कोई समाज जितना बीमारियों से नहीं मरता उतना अपने रवैये से नष्ट होता हैं। एड्स का हम मुकाबला कर सकते हैं लेकिन उस डर, उस नासमझ का सामना कैसे करें जो अमानवीय ढंग से हमें अपने ही समाज के कुछ असहाय लोगों से काट डालती हैं । उन्हें अछूत बना डालती हैं। भारत सिर्फ एड्स का नहीं बल्कि कई बीमारियों का घर है। उन्नीसवीं सदी की बीमारियाँ इस इक्कीसवी सदी में पलट कर हमला कर रही हैं। हम प्लेग और पोलियो से भी लड़ रहे हैं। कैंसर एड्स की ही तरह रहस्यमय और जानलेवा बीमारी बना हुआ हैं। डायबिटीज को खामोश महामारी कहा जाता हैं। लेकिन और भी कई खामोश महामारियां से इस समाज को बीमार बनाने में लगी हैं। हमने एक चमकता हुआ भारत बनाया लेकिन इस भारत में कई हाँफते,कराहते,खांसते भारत भी शामिल हैं। वो बेदखल भारत शामिल हैं जो अपने घर परिवार से सैकड़ों मील दूर ज़िन्दगी और रोजगार की जद्दोजहद में रोज खुद को गला रहे हैं। छोटे-छोटे शहरों से देश के महानगरों तक ज़िन्दगी की तलाश में पहुंचे ये लोग अपने जिस्म में मौत के कीड़े लेकर लौटते हैं। और उनके घर वाले जान तक नहीं पाते कि आखिर उन्हें बीमारी है क्या ? ये वो एड्स हैं जो शरीर को नहीं बल्कि समाज को खा रहा हैं। फिर कहना होगा कि एड्स का इलाज सिर्फ &lt;span style="color:#990000;"&gt;एंटी रेट्रो वायरल थेरपी&lt;/span&gt; से नहीं हो सकता। इसके लिए पूरे समाज की धमानिया साफ़ करनी होगी उसका रक्त बदलना होगा। ये काम आसान नहीं है इसके बिना हम एड्स और कैंसर के इलाज खोज भी लें तो भी अपने समाज को नहीं बचा पायेंगे। क्यों कि हम इस लिए नहीं मर रहे हैं कि दवाएं नहीं हैं बल्कि इस लिए मर रहे हैं कि उनके पास दवाओं तक पहुंचने का साधन नहीं हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3971516538560194110?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3971516538560194110/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3971516538560194110' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3971516538560194110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3971516538560194110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/11/blog-post_30.html' title='हमारे समाज का महारोग एड्स'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3515939014199177914</id><published>2010-11-10T15:26:00.002+05:30</published><updated>2010-11-10T17:24:38.908+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सुरक्षा परिषद में दावेदारी'/><title type='text'>जय हिन्द बराक ओबामा</title><content type='html'>आखिर ऊँट पहाड़ के नीचे आ ही गया। यानी दुनिया का तानाशाह औकात पर आ गया। कल तक जो भारत की तरफ आँखें तरेरता था अब उसकी आँखों में पानी भर आया हैं। और आँखों में पानी भरने कि वजह भी साफ़ हैं । जब राजा के यहाँ बेरोजगारी मुह फैलाकर खड़ी होने लगी तो भारत कि तरफ आस जागी। और इसी आस के साथ इस व्यापारी ने भारत से कारोबार करके अब अमेरिकी बाज़ार को गुलजार करेगा। " जय हिन्द, बहुत धन्यवाद,नमस्ते" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके और लच्छीदार भाषण पिलाकर भारत से जो उसे चाहिए था वो ले लिया।  और भारत भी उसके इस भाषण से लट्टू हो गया। और भारत को जिस तरह कि उम्मीद थी वो मिल गयी।  ओबामा ने आज भारत को विश्व पटल में एक नया आयाम दिया हैं। और इसकी बानगी यही हैं कि भारत को  संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थाई सदस्यता के लिए ओबामा ने वकालत भी कर दी। यानी सुरक्षा परिषदमें भारत कि दावेदारी पर मोहर लगा दी हैं। सुरक्षा परिषद के क्या दाँव पेंच हैं  इसे समझने के लिए सबसे पहले  सुरक्षा परिषद के बारे में जाना जरूरी होगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;  सयुंक्त राष्ट्र संघ के संविधान में इसके छह प्रमुख अंगों का वर्णन किया गया हैं ।&lt;br /&gt;१ - महासभा&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;२ - सुरक्षा परिषद&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;३- आर्थिक व सामाजिक परिषद&lt;br /&gt;४- न्याशी परिषद&lt;br /&gt;५- अंतरर्राष्ट्रीय न्यायलय&lt;br /&gt;६- सचिवालय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;सुरक्षा परिषद &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;   सुरक्षा परिषद विश्व शांति एवं सुरक्षा से सम्बन्धित संयुक्त राष्ट्र संघ के दायित्वों को पूरा करने वाला आदेशात्मक संस्था है। इसके १५ सदस्य हैं। जिनमें पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, साम्यवादी चीन, फ़्रांस और रूस । अस्थायी सदस्यों को सयुंक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा दो वर्षों के लिए चुना जाता है। अस्थायी सदस्यों में सामान्यतः पांच अफ्रीकी एशियाई देशों से, दो लैटिन अमेरिका, दो पश्चिमी यूरोप तथा एक पूर्वी यूरोप &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; चुने जाते हैं। अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के क्रम से सभी देश एक-एक मास के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करते हैं। सुरक्षा परिषद के अंतर्गत प्रक्रिया संबंधी सामान्य विषयों पर किन्ही ९ सदस्यों के समर्थन से कोई प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।   लेकिन अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से सम्बंधित किसी विषय पर उन नौ सदस्यों में पांचो स्थायी सदस्यों का समर्थन हासिल होना आवश्यक हैं। यदि स्थायी सदस्यों में से किसी ने प्रस्ताव के खिलाफ समर्थन कर दिया तो प्रस्ताव पारित नहीं माना जाएगा। इस प्रकार स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति का निषेधाधिकार दिया गया हैं। जिसका प्रयोग करके वो किसी मुद्दे पर प्रस्ताव पारित करने  या किसी कारवाई को रोक देते हैं।&lt;br /&gt;        अपने दायित्वों को पूरा करने के क्रम में सुरक्षा परिषद सर्वप्रथम शांतिपूर्ण उपायों से विवादों के समाधान का प्रयास करती हैं। जिनमें विचार विमर्श, मध्यस्थता आदि शामिल हैं। यह क्षेत्रीय संगठनों को भी विवादों के समाधान हेतु प्रोत्साहित करती है। शांतिपूर्ण उपायों द्वारा विवादों का समाधान न होने पर यह दोषी राष्ट्रों के विरुद्ध कूटनीतिक, आर्थिक व वित्तीय दंड निर्धारित करती है एवं अंतिम उपाय के रूप में सैनिक कारवाई का आदेश भी दे सकती है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;सुरक्षा परिषद में सुधार का प्रश्न -&lt;/span&gt;  वर्तमान समय में विश्व की बदली हुई राजनैतिक एवं आर्थिक व्यवस्था के अनुरूप सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग लगातार की जा रही हैं। जिससे अफ्रीका, एशिया तथा लैटिन अमेरिकी देशों को उचित प्रतिनिधत्व प्राप्त हो सके । संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व में आने के छह दशकों के दौरान विश्व व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आ गया है। दूसरे विश्व युद्ध के खलनायक देश जापान और जर्मनी की अर्थ व्यवस्था क्रमशः विश्व की दूसरी और तीसरी बड़ी अर्थ व्यवस्था बन चुकी है। दूसरी ओर भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, व मैक्सिको जैसे देश विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थ व्यवस्था वाले देश बनकर उभरे हैं । जहां तक भारत  की सुरक्षा परिषद में दावेदारी का प्रश्न है अमेरिका व चीन को छोड़कर अन्य तीन स्थायी सदस्यों ने खुलकर समर्थन किया हैं ( अमेरिका ने अब समर्थन किया हैं ) । जबकि विश्व के अन्य प्रमुख देशों सहित विकासशील देशों ने ऐसी ही मंशा जतायी हैं। हालाँकि सुरक्षा परिषद में सुधार के स्वरूप को लेकर देशों के बीच मतभेद हैं कुछ का मानना है कि सुरक्षा परिषद के नए सदस्यों को वीटो पावर न दिया जाए। जबकि सदस्यता के इच्छुक भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका,जापान व जर्मनी इस शक्ति के बगैर सुरक्षा परिषद की सदस्यता को उचित नहीं मानते।&lt;br /&gt;        लेकिन अब अमेरिका ने भारत के दावेदारी को मजबूती प्रदान कर दी हैं। लिहाजा विरोध झेलना है केवल चीन का ।  इस लिहाज से  स्थायी सदस्यता की राह खुलती नजर आ रही हैं। लेकिन अभी राह आसान नहीं हैं । केवल उम्मीद जाग गयी हैं । और उम्मीद पर तो पूरी दुनिया टिकी है। लेकिन जैसे  ही ओबामा ने खुल कर समर्थन किया तो  दावेदारी के अन्य सदस्यों की भौंहें तन गयी हैं । इस सीट के लिए प्रबल दावेदारों में शुमार किये जा रहे जापान और जर्मनी ने आरोप लगाया है कि उनकी अनदेखी की जा रही है। भारत के धुर विरोधी पाकिस्तान ने तो अमेरिकी राजदूत से मिलकर अपना विरोध औपचारिक रूप से भी दर्ज करा दिया हैं। जब कि तथ्य यही है कि अभी ये तो दूर की कौड़ी हैं।  लेकिन अन्य देशों की नीद हराम हो गयी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;ओबामा की नब्ज -&lt;/span&gt; ओबामा ने भारत को एक उभर चुका देश कहा हैं। यानी अब हम विकसित देश की कतार में शामिल हो गए। लेकिन ऐसा नहीं हैं। अमेरिका ने अभी स्थायी सदस्यता के लिए जापान का समर्थन किया है।  जब कि जी - ४ का विरोध किया है । इस समूह में जापान, जर्मनी , भारत और ब्राजील शामिल हैं। इस तरह  ओबामा ने भारत के दावे का समर्थन करके अपना रूख तो स्पष्ट कर दिया है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जी- ४ मामले में अमेरिका भारत का समर्थन करेगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;कौन किसके खिलाफ -&lt;/span&gt;  सयुंक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता चाहने वालों में आपस में ही एक दूसरे के विरोधी हैं । जैसे - जापान और भारत की दावेदारी के खिलाफ चीन हैं। ब्राजील को मैक्सिकोऔर अर्जेंटीन का विरोध झेलना पड़ रहा है। अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका सबसे प्रबल दावेदार हैं । लेकिन कुछ और देश अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। इधर इसके स्थायी सदस्य ज्यादातर यूरोपीय देशों के हैं। और वो चाहते हैं  कि विश्व के हर हिस्से के देशों को इसका प्रतिनिधत्व दिया जाए ।&lt;br /&gt;  इन सब तमाम पेंच को  देखकर लगता  हैं कि कहीं स्थायी सदस्यता खैनी पुलाव न साबित हो लेकिन ऐसा नहीं होगा। और ओबामा के जय हिन्द ने भारत को एक नयी ऊर्जा दी हैं और उसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ भारत को अपने कदम आगे बढ़ाना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3515939014199177914?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3515939014199177914/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3515939014199177914' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3515939014199177914'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3515939014199177914'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/11/blog-post_10.html' title='जय हिन्द बराक ओबामा'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-8480127592956893439</id><published>2010-11-04T11:53:00.005+05:30</published><updated>2010-11-08T11:13:31.595+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राजनीतिक दल मालामाल'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आम आदमी कंगाल'/><title type='text'>झंडा ऊंचा रहे हमारा देश फिरै चाहे मारा - मारा</title><content type='html'>यह कहानी आजाद भारत की हैं। जहाँ तिरंगा भले ही न लहरा रहा हो , लेकिन तिरंगे की कुंडली मारे बैठे देश के राजनीतिक दलों के झंडे लक्ष्मी जी की ऊर्जा से लहरा रहे हैं। सरकार के पास अनाज सडाने का प्रावधान हैं,उसे पानी में बहाने का प्रावधान हैं लेकिन गरीबों में बांटने का प्रावधान नहीं हैं। राजनीतिक पार्टियां मालामाल हैं। आम आदमी फटे हाल हैं। दिन दो गुना रात चौगुना की रफ़्तार से राजनीतिक पार्टियों का खजाना भर रहा हैं। आज़ाद भारत में दो जून की रोटी के लिए जिन्हें लाले पड़ रहे हैं उनसे पूछो आपको आज़ादी के बाद क्या मिला ? और देश के नेताओं से पूछो कि उन्होंने देश की आज़ादी के बाद क्या हासिल किया ? इसका जवाब यही होगा कि देश के राजनीतिक दल आज़ाद भारत का भविष्य चर रहे हैं।&lt;br /&gt;हाल ही में सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी सामने आई हैं । उसका अंदेशा सबको होगा और वही जानकारी मिली हैं जो राजनीतिक दलों से उम्मीद की जा सकती हैं। देश में कांग्रेस पार्टी सबसे अमीर दल के रूप में उभरकर सामने आई हैं । हालाँकि पिछले एक साल के दौरान खजाने में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी सर्व धर्म सुखाय सर्व धर्म हिताय का नारा देने वाली बहुजन समाज पार्टी ने किया हैं। आंकड़ों के अनुसार ३१ मार्च २००९ तक छह सालों के दौरान कांग्रेस को सबसे अधिक ४९७ करोड़ रुपये कि कमाई हुयी है। २००२ से २००९ के बीच कांग्रेस की कुल संपत्ति १५१८ करोड़ रुपये की आंकी गयी हैं। वहीँ २००९ से १० के दौरान भाजपा के खजाने में २२० करोड़ रुपये व बसपा के खजाने में १८२ करोड़ रूपये की कमाई दर्ज हैं। पिछले ६ सालों के दौरान कुल आय वृद्धि दर के मामले में बसपा ने सबको पीछे छोड़ दिया। बसपा ने २००२ से ०९ के बीच ५९ फीसदी की दर से अपनी आय बढाई है। जब कि कांग्रेस की आय ४२ फीसदी की दर से बढ़ी है । कांग्रेस की सहयोगी एन.सी.पी.ने अपना खजाना भरने में ५१% की दर से बढ़ोत्तरी की हैं। वहीँ सपा ने ४४% की वृद्धि दर के साथ खजाना भरा है। असोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रेफोर्म्स ( ए.डी.आर.) ने सूचना के अधिकार के तहत सभी राजनीतिक पार्टियों का आयकर और अचल संपत्ति के आधार पर उक्त विश्लेषण किया हैं । केन्द्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद सभी प्रमुख पार्टियों ने अपनी सम्पत्ति और आय का ब्यौरा दिया। वहीँ पिछले एक साल में सीपीआई ने एक करोड़, समाजवादी पार्टी ने ४० करोड़, सीपीएम ने ६३ करोड़ व राजद ने ४ करोड़ का फंड जुटाया।&lt;br /&gt;२००२ - २००३ से लेकर २००९-१० के अंतराल में कुल संपत्ति के मामले में भी कांग्रेस सबसे आगे है । इस दौरान कांग्रेस की कुल संपत्ति १५१८ करोड़ रुपये रही। जब कि भाजपा की इस अवधि में ७५४ करोड़ रुपये की कुल संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर है। बसपा की कुल संपत्ति की कीमत ३५८ करोड़ रुपये आंकी गयी है। पिछले छह सालों के दौरान सीपीएम की कुल संपत्ति ३३९ करोड़ रुपये सपा की २६३ करोड़ रुपये रही जब कि राजद की संपत्ति १५ करोड़ और सीपीआई की कुल संपत्ति महज ७ करोड़ आंकी गयी।&lt;br /&gt;यक्ष अब सवाल यहाँ से ये उठता है कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है उसका वित्तीय मामले में रोना शुरू हो जता है। अच्छी योजनाओं के लिए फंड में कमी,कानूनी दांव पेंच जैसे मामले की वजह से योजनायें अधर में लटक जाती हैं। जबकि सत्ता का नशा चढ़ते ही पार्टी मालामाल होना शुरू हो जाती हैं। रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली मायावती की पार्टी की बात की जाए तो वो नोटों की माला पहनने में ही सम्मान समझती है। और दलील देती हैं कि दलित की बेटी हूँ। मेरे कार्यकर्ताओं ने धन एकत्र करके दिया है, जब आपके कार्यकर्ताओं में इतनी कूवत है तो उन्हें निर्धन, असहाय लोगों की सेवा में क्यों नहीं लगाया जाता है? उल्टे जूं बन कर उन्हीं का खून चूसने निकल पड़ते है॥ आज हर एक राजनीतिक दल का यही हाल है। बड़े नेता जिस भी अमुक जगह में पहुँचते हैं रुपयों की पोटली बाँध कर विदा किया जाता हैं.जबकि उसी जगह कितने लोग जीवन निर्वाह के लिए अपने शरीर की हड्डियों का ढांचा ढोनेके लिए मजबूर होते हैं। मुंबई में लालकृष्ण आडवाणी के आने पर करोड़ों रुपये की धन राशि दी गयी थी । इसको देने वाले और खर्च करने वाले ही आज देश के भस्मासुर है ।&lt;br /&gt;अब ज़रुरत हैं लोकतंत्र के जिस ढाँचे को पीढ़ियों से ढोया जा रहा है उसमें बदलाव करने की। कितना गलत पढ़ाया जा रहा है कि सरकार जनता ने चुना हैं जबकि जनता ने सिर्फ विधायक और सांसद चुने हैं न कि प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्री नहीं। देश का कोई आम नागरिक कह दे कि ,मैंने प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्री का चयन किया हैं। और यहीं से भ्रष्टाचार पनपना शुरू हो जाता हैं। और हकीकत जानना है तो कहते हैं बहमत प्राप्त दल के सदस्य अपना नेता चुनते हैं। कितने सदस्यों ने अपना नेता स्वतंत्र रूप से चुना है। आज देश के नेताओं की शैक्षिक योग्यता निर्धारित होना अनिवार्य हैं तभी कहा जाए कि लोकतंत्र प्रधान देश है। नहीं तो संसद भवन में नोटों की गड्डी लहराना अभी तो एक बानगी हैं। आगे क्या होगा देश के मालामाल नेता और मालामाल राजनीतिक दल जानें। क्योंकि भविष्य निर्माता यही हैं। देश का झंडा इन्हें भाता नहीं हैं इनके कार्यालयों में पार्टी का झंडा लहराएगा। इसी लिए राजनीतिक पार्टियों के तरफ से झंडा ऊंचा रहे हमारा देश फिरै चाहे मारा-मारा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8480127592956893439?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8480127592956893439/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=8480127592956893439' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8480127592956893439'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8480127592956893439'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='झंडा ऊंचा रहे हमारा देश फिरै चाहे मारा - मारा'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-7533346163724545876</id><published>2010-10-30T12:24:00.002+05:30</published><updated>2010-10-30T14:29:25.610+05:30</updated><title type='text'>हीरो की ज़रुरत है नीरो की नहीं</title><content type='html'>हिंदुस्तान के जिस राज्य को विशेषाधिकार प्राप्त राज्य घोषित किया गया है  जहां जीवनावश्यक वस्तुएं सस्ते दामों पर मुहैया कराई जाती हैं  आज उस राज्य में आग के गोले बरस रहे हैं । जम्मू का जमूरा आज सत्ताधारी दल के पास नहीं है ।  मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हों या प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह कश्मीर के नीरो बने हुए हैं। आज कश्मीर को नीरो कि नहीं हीरो कि ज़रुरत है। जो वहां दहकते शोलों को बुझाकर रहनुमाई दे सके । अब अगर कश्मीर के baare में &lt;span&gt;ज्यादा&lt;/span&gt; जानकारी चाहिए, तो उसके अतीत को जानना ज़रूरी होगा। तभी कश्मीर क्यों जल रहा है का सटीक विश्लेषण हो सकेगा  । &lt;br /&gt;      राजतरंगिणी ( कल्हण ) तथा नीलमत पुराण के अनुसार , कश्मीर की घाटी पहले बहुत बड़ी झील थी । भू गर्भ शास्त्रियों  के मतानुसार , भूगर्भीय परिवर्तों के कारण खादियानुसार , बारामुला में पहाड़ों के घर्षण से झील का पानी बहार निकल गया। फलतः घटी का निर्माण हो गया। पौराणिक आख्यान के अनुसार, कश्यप मुनि के नाम  पर कश्मीर का naam प्रचलित हुआ। &lt;br /&gt;  ईसा पूर्व तीसरी सदी में सम्राट अशोक ने कश्मीर में बौद्धधर्म का प्रचार किया । छठी शताब्दी के आरम्भ में कश्मीर पर हूणों का अधिकार हो गया। इसके बाद यहाँ पर कार्कोट, उत्पल और लोहार वंशीय राजाओं ने शाशन किया। हिन्दू राजाओं में ललितादित्य मुक्तापीद ( सन 697 से 738 ) सबसे प्रसिद्ध राजा हुए ।  कश्मीर में इस्लाम का आगमन 13 वीं  शताब्दी और 14वीं शताब्दी में हुआ।  यहाँ के मुश्लिम शाशकों में जैन-उल आबदीन (१४२०-७०) ससबसे प्रसिद्ध शासक हुआ। सन १८५७ में कश्मीर मुग़ल शासकों के हाथ से निकलकर अहमद शाह अब्ब्दाली के पास चला गया । पठानों ने ६७ वर्ष तक कश्मीर पर शासन किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;   सन १७३३ से १७५२ तक राजा रणजीत सिंह ने जम्मू पर शासन किया। बाद में उन्होंने इसे पंजाब में मिलकर डोगरा शाही परिवार के एक व्यक्ति गुलाब सिंह को जम्मो सौंप दिया। गुलाब सिंह रणजीत सिंह के गवर्नरों में सबसे शक्तिशाली बन गया। सन १९४७ तक जम्मो पर डोगरा शासकों का आधिपत्य रहा। भारत द्वारा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद महाराजा हरि सिंह ने १९४७ में कश्मीर राज्य ko भारत में  विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किये।  &lt;br /&gt;महाराजा के पुत्र कर्ण सिंह १९५० में रेजिडेंट बने और आनुवंशिकी शासन की समाप्ति (१७ अक्टूबर १९५२) पर उन्हें सद्र - ए - रियासत पद की शपथ दिलाई गयी ।  भारत के संविधान में उल्लेखित धारा ३७० के अंतर्गत यह एक विशेषाधिकार प्राप्त राज्य है। जम्मू कश्मीर राज्य का संविधान २६ जनवरी १९५७ से लागू हुआ।&lt;br /&gt;   अब आज जम्मू  के क्या हालत हैं ये सभी जान रहे हैं। क्या कहा जाए की १९५७ से अब तक नाटक चल रहा हैं और आगे भी चलता रहेगा। जब जम्मू में आग दहकने लगी तो केंद्र सरकार ने ताजा स्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया।  ताज्जुब इस बात का रहा की किसी ने भी उमर अब्ब्दुल्ला सरकार को बर्खास्त करने की मांग तक नहीं की । इस पूरे बैठक में नेताओं के दिमाग में कितना दीवालियापन है ये भी साबित हो गया ।   माकपा, भाकपा, जदयू, राजद , लोजपा जैसी वामपंथी और समाजवादी विचार धारा चरने चरने वाली पार्टियों ने कश्मीर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून तथा जनसुरक्षा क़ानून पूरी तरह वापस लेने की मांग की हैं।  यक्ष सवाल यहाँ पर ये उठता है कि देश के इन नेताओं को कितना ज्ञान है।    कश्मीर में सुर्क्षों बालों को मिले जिन विशेषाधिकारों पर हो हल्ला मचा हुआ है। वे पहले ही ख़त्म हो चुके हैं। १९९८ में राज्य की नेशनल कांफ्रेस सरकार ने इसे अपने आप ही समाप्त हो जाने दिया था । और इसकी अवधिको आगे नहीं बढ़ाया था।  मौजूदा समय में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक़ जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बालों को विशेषाधिकार प्राप्त नहीं हैं। अब जिन लोगों को दोबारा भेजा हैं उन लोगों ने तो अलग ही राग अलापना शुरू कर दिया ।  उन्हें पाकिस्तान पापा नजर आ रहा हैं। जिसे राजा हरि सिंह ने कभी घास नहीं डाला उसे हमारे देश के बुद्धजीवी तत्व सब अमृत मान रहे हैं। लेखिका अरुंधती ने अपनी लेखनी के जरिये एक अलग ही शिगूफा रच दिया हैं। अरुंधति रॉय को वर्ष १९९७ के मैं बुकर पुरस्कार की विजेता हैं। अब उनको भारत की राज्य प्रणाली ही बुरी दिख रही हैं। माओवादियों की चिंता सताने के बाद अब जम्मू कश्मीर पर भी कलम फेर दिया हैं। जिन लोगों को सरकार ने जम्मू में दौरा करने के लिए भेजा हैं और जान रेपर्ट देने के लिए कहा हैं वही कह रहे हैं की जम्मू को पाकिस्तानी चश्में से देख रहे हैं। इस बंटवारे की वकालत करने वालों को एक बात बहुत बारीकी से समझना होगा दुनिया के जितने भी देस्शों का बंटवारा हुआ हैं सभी जनसंख्या या भू भाग के अधर पर हुआ हैं लेकिन इसे धर्म के नाम पर बाँट रहे हैं। और ये धर्म के नाम पर बांटने वाले सिर्फ अपना व्यक्तिगत उल्लू ही सीधा करेंगे। पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर में कितना विकास किया हैं और भारत के कश्मीर में कितना विकास हुआ हैं ये पहले देख लो। अलगाववादी क्यों पैदा हुए और किसने पैदा किया ? सरकार कश्मीर का इलाज ढूँढने के बजाय इसे लाइलाज छोड़ना चाहती हैं । देश के नेताओं ke दिमाग mein भरा हुआ hai की जब 63 साल से  चल रहा hain तो आगे bhi चलता रहेगा।   आज ज़रुरत हैं कश्मीर के हालत को ठीक अकरने के लिए। लेकिन सभी वहाँ जाकर नीरो बन कर काम कर रहे हैं। ज़रुरत हैं सही दिशा में काम करने की ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-7533346163724545876?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/7533346163724545876/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=7533346163724545876' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7533346163724545876'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7533346163724545876'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='हीरो की ज़रुरत है नीरो की नहीं'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5440255811859142921</id><published>2010-07-06T16:41:00.003+05:30</published><updated>2010-07-06T18:27:25.629+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पोलखोल'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='दाई से भला पेट छिपता हैं'/><title type='text'>मनमोहन माफ़ कर दो गलती मारे से हो गई</title><content type='html'>देश की बागडोर अर्थशास्त्री  के हाथ में हैं। अर्थशास्त्र ही इतना पेचीदा हो गया है किइस शास्त्र में कितने पेंच फंसे हुए हैं। ये तो अर्थशास्त्री ही जाने। लेकिन भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और सभी शास्त्रों की कुंडली मारे बैठे इस अर्थशास्त्र ने देश कि आम जनता के बीच आतंक का अर्थशास्त्र बन बैठा हैं। जब भी कोई गृहणी घर में खाना बना रही होती हैं। तो उसे ऐसा लगता हैं कि घर में खाना नहीं बना रही बल्कि गणित की परीक्षा दे रही हैं।&lt;br /&gt;          कहते हैं यूपीए आई महंगाई लाई। उम्मीद थी कि देश के प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह अपने अर्थशास्त्र के तीर से महंगाई को मारेंगे।  लेकिन मनमोहन सिंह जी का ब्रम्हास्त्र फेल हो गया। और महंगाई मारने के बजाय आंकड़े बाजी का खेल शुरू हो गया । यानी कहीं न कहीं लगता है कि मनमोहन सिंह,प्रणब मुखर्जी और मोंटेक सिंह अहूलवालिया (जो देश के अर्थशास्त्री जनक हैं )  अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल आंकड़े बाजी का खेल खेलने में कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि चीते कि रफ्तार से भाग रही महंगाई पर ये बूढ़े शेर हाँफते नज़र आ रहे हैं।&lt;br /&gt;    हाल ही में महंगाई ने जिस तरह से अपना रंग दिखाया हैं उससे विपक्ष में उबाल आ गया हैं। और जब सरकार ने तेल के दाम गरम कर दिए हैं तो ५ जुलाई को पूरा देश खौलने लगा देश कि जनता खून खौल रहा  हैं और माकपा ने ' पेट्रोल उत्पादों kee कीमत-झूठों के पीछे छुपा सच' नामक पुस्तिका  जारी कर  दी हैं ।  अगर इस पुस्तिका में लिखी हुयी बातें सच हैं तो इसका मतलब हाथ अब भारत का हाथ नहीं बल्कि सात समंदर पार का हाथ हैं। &lt;br /&gt;  दरअसल इस पुस्तिका में माकपा ने सारे तथ्य गिनाये हैं कि सरकार किस तरह से जनता से चालबाजी कर रही हैं।  माकपा का आरोप है कि सरकार पेट्रोलियम क्षेत्र की सरकारी कम्पनियों को डुबोना चाहती है।  ताकि देश में निजी क्षेत्र और विदेशी कम्पनियों का वर्चस्व स्थापित हो सके। वामपंथी नेताओं ने कहा है की देश की किसी भी तेल कंपनी को हाल के वर्षों में कोई घटा नहीं हुआ हैं। बल्कि साल २००८-०९ में इंडियन आयल कारपोरेशन को २९५० करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ हैं। ३१ मार्च २०१० को समाप्त वित्तीय वर्ष में आईओसी को शुद्ध मुनाफा १०९९८ करोड़ रुपये का हुआ हैं। एचपीसी और बीपीसी को क्रमशः ५४४ और ८३४ करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया हैं। इसके अलावा माकपा ने ये भी दावा किया हैं क़ि सरकार सरासर झूठ है पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्यवृद्धि पर सरकार ५३,००० करोड़ रुपये का बोझ सहने को मजबूर होगी । २००९-१० में पेट्रोलियम सेक्टर द्वारा कर,ड्यूटी,लाभंस इत्यादि के रूप में सरकारी खजाने में ९०,000 करोड़ जमा हुए । २०१०-११ में सरकार को १,२०,000 करोड़ रुपये  से ज्यादा का आय होने का अनुमान हैं । पिछले दो सालों में कच्चे तेल की कीमत ७० पैसा प्रति लीटर बढ़ी है। जबकि सरकार ने पेट्रोल में साढ़े छह रुपये और डीजल में साढ़े चार रुपये की बढ़ोत्तरी की हैं। वाम नेताओं ने पूछा हैं क़िपिछले तीन महीने ,में विश्व बाज़ार में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुयी तो फिर यह ताज़ा मूल्य वृद्धि क्यों की गई ? दुनिया के कई देश पेट्रोलियम पदार्थ खरीदते हैं और अपने यहाँ रिफाइन व् प्रोसेस करने क़ि जहमत नहीं उठाते। यदि यह देश अपने यहाँ इन पदार्थों का वैश्विक भाव पर बेंचे तो बात समझ में आती हैं लेकिन भारत अपनी ज़रुरत का ८० फ़ीसदी कच्चा तेल खरीदता है। जिसे भारत में ही रिफाइन किया जाता हैं। ऐसी हालत में कच्चे तेल की कीमत और रिफाइनरी लागत जोड़कर ही तेल का दाम तय किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार चालाकी से तैयार पेट्रोल व डीजल का वैश्विक मूल्य यहाँ की जनता पर थोपना चाहती हैं। अब ऐसे में सरकार को माकपा के आरोपों का जवाब देना चाहिए। माकपा के इन आरोपों पर भरोसा किया जा सकता हैं क्योंकि माकपा सरकार को लम्बे समय तक बहार से समर्थन देती रही हैं। इसलिए वह संप्रग का सारा घालमेल जानती होगी। ऐसे में सरकार से यही कहना होगा क़ि दाई से पेट नहीं छिपाया जा सकता हैं। लेकिन जनता को तो अब यही गाना याद आ रहा हैं की छत पे सोया था बहनोई जीजा समझकर सो गई राना राना जी माफ़ करना गलती मारे से हो गई। लिहाजा अब आम आदमी की पैरवी करने वाली इस सरकार से आज आम आदमी यही कह रहा क़ि मनमोहन जी माफ़ कर दो इस बार गलती से आपको सत्ता क़ि चाभी दे दिया। इसलिए माफ माफ़ माफ़ कर दो .....................&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5440255811859142921?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5440255811859142921/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5440255811859142921' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5440255811859142921'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5440255811859142921'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='मनमोहन माफ़ कर दो गलती मारे से हो गई'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-9049544104221176327</id><published>2010-05-31T15:08:00.002+05:30</published><updated>2010-05-31T16:45:03.609+05:30</updated><title type='text'>मीठी नदी बन गई राजनीति का जायका</title><content type='html'>हर साल मानसून आने के पहले मीठी नदी को लेकर राजनीति शुरू हो जाती हैं। मई महीने का आखिरी सप्ताह सभी दलों के नेताओं के लिए एक पिकनिक केंद्र बन जाती हैं। हर दिन नेताओं का काफिला लावलश्कर के साथ पहुंचता हैं.और शुरू हो जाता हैं एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला। मीठी नदी का विकास मनपा और एम्.एमार.डी ए कर रही है। लिहजा कोई भी अपनी जिम्मेदारी ढंग से निभाने के बजे एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ना उचित समझते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;   संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यानसे निकलकर माहिम की खाड़ी में समाहित होने वाली मीठी नदी का अस्तित्व डेढ़ सौ साल पुराना हैं। मुंबई में पानी कि ज़रुरत को पूरा करने के लिए १८६० में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने विहार जलाशय का निर्माण करवाया था। जलाशय के लबालब होने के बाद बरसात का पानी मीठी नदी के जरिये अरब सागर में जाने लगा। उस समय मुंबई के उपनगरों कि आबादी बहुत कम थी। साकीनाका,मरोल,कुर्ला का काफी इलाका घने जंगलों से घिरा था। जिसके कारण बारिश के मौसम में मीठी नदी स्वच्छंद रूप से बहा करती थी। इसका पानी पीने के उपयोग में भी आता था। सामान्य रूप से मीठी नदी में केवल ४ माह ही पानी बहता था। बांकी समय में यह लगभग सूखी ही रहती थी.,जिसके कारण लोग इस नदी के बारे में बहुत कम जानते थे। मुंबई में हुयी औद्योगिक क्रांति के बाद शहर कि आबादी में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। मीठी नदी जिस जगह से होकर बहती थी। लोगों ने वहां झोपड़े बना लिए। मीठी नदी के इर्द-गिर्द कल कारखानों ने अपनी जगह बना ली। और कारखानों का कचरा सधे इसी नदी में प्रवाहित होने लगा। इतना ही नहीं मरोल,अँधेरी,कुर्ला और साकीनाका के कई बड़े नालों को भी इससे जोड़ दिया गया। जिसके कारण मीठी नदी बदबूदार नदी के रूप में अपनी पहचान बनाने लगी। घरों का कचरा,प्लास्टिक,मकानों का मलबा आदि जमा होने के कारण नदी के पानी का प्रवाह धीरे - धीरे कम होता गया। लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। मानसून आने के पहले महानगरपालिका कि तरफ से थोड़ा बहुत कचरा निकाल कर साफ़ कर दिया जाता था। जिससे पानी निकलकर अरब सागर में चला जाता था।&lt;br /&gt; २६ जुलाई  २००५ को मुंबई में ९३४ सेमी से अधिक बारिश हुई और उसी समय समुद्र में मानसून का सबसे ऊंचा ज्वार भी उठा। बारिश का पानी समुद्र में जाने के बजे रिहायशी इलाकों में भरने लगा। देखते ही देखते मुंबई में बाढ़ आ गयी। और इसका ठीकरा मीठी नदी पर फोड़ दिया गया। ५० से अधिक लोगों की मौत और करोड़ों रुपये की सम्पत्ति के नुक्सान के बाद इसके कायाकल्प की कवायद शुरू हो गई। मुंबई महानगर पालिका,राज्यसरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर सयुंक्त परियोजना पर काम शुरू किया। ५ साल का समय गुजर जाने के बाद भी मीठी नदी के स्वरूप में कोई विशेष फर्क नहीं आया। लेकिन ये अलग बात हैं कि मीठी नदी विकास परियोजना से जुड़े जन प्रतिनिधियों,अधिकारियों और ठेकेदारों का विकास तेजी से हुआ।&lt;br /&gt;   २६/७ की बाढ़ के बाद मुंबई mein बरसाती पानी की निकासी को  लेकर कवायद शुरू ho गई।   शहर के ५० से अधिक नालों को ब्रिम्स्तोवोड़  परियोजना से जोड़ा गया। जिसके लिए केंद्र सरकार ने १२०० करोड़ रुपये कि व्यवस्था कि हैं। जबकि १८ किलोमीटर लम्बी नदी को चौड़ा और गहरा दोनों तरफ सुरक्षा दीवार बनाने, प्रभावितों को दूसरी जगह बसाने अदि को लेकर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मीठी नदी विकास प्राधिकरण बनाया गया। और मुंबई मनपा, एम्.एम्.आर.डी.ए.और एअरपोर्ट अथोरती को सयुंक्त रूप से इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई।  अब तक मीठी नदी के नाम पर ६०० करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। एक हजार करोड़ रुपये  से अधिक खर्च किया जाना बाकी हैं । लेकिन इसका स्तर अभी भी किसी बदबूदार नाले से ऊपर नहीं उठ पाया है । मानसून के पहले राजनीति शुरू होती हैं और नदी में राजनीती की बदबू आने लगती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    शुरूआती दौर में मीठी नदी के विकास का खर्च ७०० करोड़ रुपये आंका गया था। इसमें से २०० करोड़ रुपये केंद्र सरकार की तरफ से मिलने थे। लेकिन नदी और नालों को लेकर केंद्र सरकार कि तरफ से रूपये मिलने में देरी होती गयी। खर्च का दायरा बढ़ता गया। और ये खर्च बढ़कर १६५७ करोड़ रुपये हो गया। १८ किलोमीटर लम्बी नदी का विकास ११.८ किलोमीटर हिस्से का विकास मुंबई महानगर पालीका कर रही हैं।&lt;br /&gt;नदी को  फिर से  जीवीत रखने की कवायद शुरू ho गयी हैं।   विहार लेक, पवई से माहिम तक बहाने वाली मीठी नदी में ४३ नालों से लाखों तन कचरा बहता हैं। जिससे नदी के पानी में ओक्सिजन की मात्रा कम हो गई हैं लिहाजा मछलियों को ओक्सिजन देने के लिए &lt;span&gt;एम.एम्.आर.डी.ए.ए.ने ओक्सिजन डालने काम शुरू किया। और अमेरिकी कम्पनी इन्वायरमेंटल कंसल्टिंग टेक्नालोजी इंक से डेढ़ करोड़ रुपये कि लगत वाली २ मशीने किराये पर ली थी। जो प्रति मिनट ८ से दस गैलन पानी में ओक्सिजन डाल सकती &lt;span&gt;हैं। हालाँकि मीठी नदी&lt;span&gt;  के प्रदुषण को रोकने के लिए निरी भी जुटा हुआ हैं। ताकि प्रदुषण को रोका जा सके। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt; कुल मिलाकर मीठी नदी राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ जयका बनता जा रहा हैं। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-9049544104221176327?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/9049544104221176327/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=9049544104221176327' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/9049544104221176327'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/9049544104221176327'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/05/blog-post_31.html' title='मीठी नदी बन गई राजनीति का जायका'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3755103615711436329</id><published>2010-05-28T15:05:00.004+05:30</published><updated>2010-05-28T15:54:36.261+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ओबमा पीछे.'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='माया आगे'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम्पत्ति'/><title type='text'>माया के आगे ओबामा फिस्स</title><content type='html'>गले में नोटों की माला पहनने वाली माया वाकई में मालामाल हैं। भारत के गरीब राज्यों शुमार उत्तर-प्रदेश की मुख्यमंत्री ने दुनिया के सबसे अमीर देश के राष्ट्रपति को दौलत के मामले में पछाड़ दिया हैं। मायावती के पास अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तुलना में तीन गुना ज्यादा सम्पत्ति हैं। उत्तर प्रदेश की विधान परिषद् के लिए दाखिल नामांकन पत्रके साथ पेश किये गए हलफनामें में मुख्यमंत्री मायावती ने ८८.०६ करोड़ रुपये की चल एवं सम्पत्ति की घोषणा की हैं। मायावती के पास ७५.४७ करोड़ रुपये के व्यावसायिक आवासीय भवन एवं सम्पत्ति हैं। माया की सबसे बड़ी सम्पत्ति नई दिल्ली के नेहरू रोड इलाके में ३९८७.७८ वर्गमीटर जमीन हैं। जिसकी कीमत ५४ करोड़ रुपये हैं। ५४ साल की माया के पास एक किलो सोना व् तमाम हीरे जवाहरात हैं। जिसकी कीमत ८८ लाख रुपये हैं। चार लाख रुपये का चांदी का डिनर सेट हैं। जिसका वजन १८ किलो हैं। पेंटिंग्स और भित्त्चित्र(म्यूरल्स) भी हैं। जिसकी कीमत १५ लाख हैं। ११.३९ करोड़ रुपये विभिन्न बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों में जमा हैं। साल २००७ में एम्.एल.सी के उपचुनाव में नामांकन के साथ भरे गए शपथ पत्र में मायावती ने ५२ करोड़ रुपये से कुछ अधिक सम्पत्ति की घोषणा की थी। मगर आज भी उनके पास अपना कोई निजी वाहन नहीं हैं। मायावती का विधान परिषद् में जुलाई में कार्यकाल ख़त्म हो रहा हैं । यूं.पी में १३ सीटों के लिए १० जून को एम्.एल.सी के चुनाव हैं। और इसी के नामांकन पत्र में मायावती ने ये जानाकारी दी हैं।&lt;br /&gt;अब अगर माया की तुलना ओबामा से करें तो जहां माया के पास ८८ करोड़ की सम्पत्ति हैं वहीँ ओबामा की निजी सम्पत्ति ५६ लाख डालर यानी २६ करोड़ ३० लाख ६० हजार रुपये हैं। ओबामा की पत्नी मिशेल की सम्पत्ति और परिवार से मिली सम्पत्ति को भी जोड़ दिया जाये तो कुल रकम 77 लाख डालर यानी करीब ३६ करोड़ 17 लाख रुपये बैठती हैं । मायावती भारत के सबसे अमीर नेताओं में शुमार हैं। जबकि ओबामा अपने देश के सबसे गरीब राष्ट्रपति हैं। ओबामा से पहले जोर्ज डब्ल्यू बुश सीनियर सबसे कम सम्पत्ति वाले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। मायावती की सम्पत्ति बढ़ने की रफ़्तार भी गजब की हैं। उन्होंने २०११ में ११ करोड़ की सम्पत्ति की घोषणा की थी और अब अपनी सम्पत्ति ८८ करोड़ बता रही हैं। यानी सात साल में ८०० फ़ीसदी इजाफा। सालाना करीब ११४ फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी । तभी तो राजनीति का चस्का सबको खाए जा रहा हैं। ना ज्यदा पढने लिखने की ज़रुरत। और आराम से मालामाल हो जाओ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3755103615711436329?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3755103615711436329/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3755103615711436329' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3755103615711436329'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3755103615711436329'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='माया के आगे ओबामा फिस्स'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5132504334200733860</id><published>2010-01-29T10:56:00.005+05:30</published><updated>2010-01-29T12:00:29.808+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जी.डी.पी.'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मसूरी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अंग्रेज'/><title type='text'>प्यार पर व्यापर</title><content type='html'>दिल की धड़कन तेज हो गयी। और दिल में समाये हुए अरमानों को इज़हार करने का वक्त भी आ रहा है।  जी हाँ वेलेंटाइन डे यानी प्रेम दिवस। वैसे तो वेलेंटाइन डे का इतिहास काफी पुराना हैं।  लेकिन भारत में १६५ साल पहले हमने वेलेंटाइन डे का नाम सुना ये जानकार आपको भी आश्चर्य होगा कि मसूरी के एक अंग्रेज ने अपनी बहन को लिखे ख़त में वेलेंटाइन डे का जिक्र किया था। और वेलेंटाइन डे नाम से ये भारत में लिखा गया पहला ख़त था। यानी &lt;span style="color:#3333ff;"&gt;पहला वेलेंटाइन डे ख़त मसूरी से चला था&lt;/span&gt;। इस ख़त में उन्होंने खुलकर अपनी जीवन संगिनी के साथ प्रेम के सुखद अहसास का अपनी बहन से जिक्र किया था। और ये ख़त लाल रंग के पेपर में लिखा गया था। यानी प्यार के लिए लाल और गुलाबी रंग को ही चुना जाता हैं। और लाल गुलाब के फूल को वरीयता दी जाती हैं। &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;प्यार क्या देता हैं? क्या लेता हैं? इश्क लड़ने वाले आग की दरिया में डूबकर निकल जाना चाहते हैं&lt;/span&gt;.लैला मजनू का प्यार.हीर रांझा के किसी और मुमताज महल शाहजहाँ के प्यार की मिसाल आज भी कायम हैं। प्यार के दीवानों ने नए आयाम भी दिए हैं। गुरुत्वाकर्षण की खोज करने वाले न्यूटन ने प्यार - प्यार में आविष्कार कर दिया। नोबेल पुरस्कार प्राप्त मेरी क्यूरी और पियरे क्यूरी की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं। यानी जब प्यार का रसायन उफान मरता हैं तो तो केमेस्ट्री लैब भी स्वप्न वाटिका बन जाती हैं। और दो दिलों को जोड़ने वाले इस प्रेम दिवस में जोड़ों को देखकर यही लगता हैं कि प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।&lt;br /&gt;   लेकिन जैसे जैसे प्रेम दिवस की उम्र बढ़ती जा रही हैं वैसे वैसे प्यार का व्यापार भारत में खूब फल फूल रहा हैं.प्यार का त्यौहार आने के पहले से ही प्रेमी जोड़े ताने बाने बुनना शुरू कर देते हैं।   सात समंदर पार से मिले इस उपहार को भारतीय बाज़ार भी ढंग से भुनाते हैं।लेकिन अगर विदेशी बाज़ार में नज़र दौडाए तो एक अनुमान के मुताबिक वेलेंटाइन डे के अवसर पर भारतीय मुद्रा के अनुसार तकरीबन १५०० करोड़ रुपये में कार्ड और गिफ्ट का कारोबार होता हैं। इसमें ६२ फ़ीसदी पुरुष और ४४ फ़ीसदी महिलाएं उपहार खरीदती हैं। औसतन अमेरिकी पुरुष १०० डालर तो अमेरिकी महिलाएं ६० डालर खर्च करती हैं.प्यार का ये बोलबाला हिन्दुस्तान की जमीं पर सर चढ़कर बोलता हैं। और इस साल प्यार का सेंसेक्स भारत में ५५०० करोड़ रुपये के पार पहुँचाने की उम्मीद हैं। यानी गिफ्ट आइटमों के बाज़ार का आकार बढ़ गया हैं। लेकिन संत वेलेंटाइन की उम्र जीतनी बढ़ती जा रही हैं,उतना ही प्यार हाई टेक होता जा रहा हैं। यानी अब दिल की धड़कन टेक्नोलोजी के जरिये भेजी जाती हैं। साफ़ तौर पर जाहिर हैं,प्यार का बुखार बढ़ने के साथ साथ व्यापर भी फल फूल रहा हैं।  और जानकारों  का मानना हैं कि ३० फ़ीसदी सालाना की दर से कारोबार बढ़ रहा हैं। यानी एक दिन ऐसा आयेगा कि हम इस बात के आंकड़े निकालेंगे कि प्यार के दिन हमने कितना व्यापर किया। फिर वह व्यापर हमारी इकोनामी से जोड़ा जाएगा। फिर उसका अनुपात यानी रेसियों निकला जाएगा।और कहा जाएगा कि जी.डी.पी में इतने फ़ीसदी का योगदान हैं। अब आप भी आंकलन कीजिये कोई वेलेंटाइन डे हमारी देश की जी.डी.पी। में बढ़ोत्तरी करता हैं तो फिर आखिर उसका विरोध क्यों?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5132504334200733860?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5132504334200733860/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5132504334200733860' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5132504334200733860'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5132504334200733860'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/01/blog-post_29.html' title='प्यार पर व्यापर'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6094355454423595220</id><published>2010-01-28T16:03:00.003+05:30</published><updated>2010-01-28T16:56:19.475+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रेम'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाघ'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सरकार का प्रयास'/><title type='text'>प्रेम दिवस पर बाघ दिवस</title><content type='html'>१४ फरवरी यानी वेलेंटाइन डे आते ही प्रेमी जोड़ों के दिलों की घंटियाँ बजने लगती हैं। लेकिन इस बार बाघों के दिलों की घंटियाँ भी बजेगी । क्योंकि बाघों की तादाद बढ़ने के लिए केंद्र सरकार ने १४ फरवरी २०१० को " बाघ दिवस" कि शुरुआत करेगा।  इसकी शुरुआत जिम कारबेट नेशनल पार्क से की जाएगी। इसका समापन नवम्बर २०१० में रणथम्भौर नॅशनल पार्क में होगा। ये आयोजन यह दर्शाएगा कि भारत बाघ सरंक्षण के मामले में क्या कर रहा हैं। दुनिया के वनों में ६० फ़ीसदी बाघ भारत में । दुनिया के किसी  देश ने इतना व्यापक सरंक्षण कार्यक्रम नहीं लाया,जितना कि भारत ने चलाया हैं।  वैश्विक स्तर पर बाघों के लिए पहल करने वाला विश्व बैंक भी भारत के प्रयास का समर्थन करना चाहता हैं। &lt;br /&gt;    दसवीं पञ्च वर्षीय योजना में सरकार ने २८ बाघ अभ्यारण्य को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया था। जिसमें से ३७७६१ वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैले २८ बाघ अभ्यारण्यों को आर्थिक सहायता दी गयी हैं। इसी तरह ग्यारहवीं योजना में भी अभ्यारण्यों और राष्ट्रीयपार्कों को और विस्तृत करने के योजना राखी गयी हैं। वैसे तो भारत में बाघों के आबादी को बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार ने बाघ परियोजना १९७३ में शुरू की थी। और सरकार के तरफ से हमेशा बाघों के संख्या को बढ़ने पर जोर दिया जा रहा हैं।  वैश्विक स्तर पर बाघों की हो रही  तस्कारी पार भारत रोक लगाने का हर संभव प्रयास कर रहा हैं। वन्य जीवों के अवैध व्यापर को प्रभावी रूप से रोकने के लिए ६ जून २००७ से एक बहुउद्देशीय बाघ एवं अन्य संकटापन्न प्रजाति अपराध नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया गया हैं। जिसमें पुलिस, वन, कस्टम और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं।  और आठ नए बाघ रिजर्व घोषित करने के लिये सैन्धान्तिक रूप से अनुमति दे दी गयी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     बाघ सरंक्षण से सम्बन्धित अंर्राष्ट्रीय मुद्दों के निपटारे के लिए बाघ रेंज देशों का  एक ग्लोबल मंच बनाया गया हैं।  साइट्स (सी.आई.टी.ई.एस।) के समर्थकों के सम्मलेन की १४वीन बैठक में ३ से १५ जून २००९ में हुयी थी। इस दौरान भारत ने चीन,नेपाल और रूसी संघ के साथ एक संकल्प प्रस्तुत किया। जिसमें वाणज्यिक पैमाने पर आप्रेसंस ब्रीडिंग बाघों के समर्थकों के लिए दिशा निर्देश जारी किये गए थे। इसके अलावा भारत ने हस्ताक्षेत करते हुए चीन से अपील की हैं कि बाघ फार्मिंग को चरणों में समाप्त किया जाए। और एशियाई बड़ी बिल्ल्यों के अंगों और उंसे बनाई गयी वस्तुओं के भण्डार को भी समाप्त किया जाए। बाघों के शरीर के अंगों के व्यापार पर रोक जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण तरीके से  भारत ने जोर दिया हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;   आज देश में तकरीबन १५०० से २००० के आसपास बाघों के संख्या हैं।  जो की बहुत कम हैं। क्योंकि पर्यावरण को संतुलन बनाये रखने के लिए जीव जंतुओं का रहना बहुत जरूरी हैं। शायद इसी लिए भारत सरकार का इस साल बाघों के प्रति प्यार जाग गया हैं। कि वेलेंटाइन डे का पूरा प्यार सरकार बाघों को देना चाहती हैं।  हमारी भारतीय संस्कृति में हर दिन हर समय प्रेम दिवस बना रहता हैं। लिहाजा सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए आप भी मनाइए बाघ दिवस।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6094355454423595220?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6094355454423595220/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6094355454423595220' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6094355454423595220'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6094355454423595220'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/01/blog-post_28.html' title='प्रेम दिवस पर बाघ दिवस'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-4217259852314239244</id><published>2010-01-22T15:16:00.003+05:30</published><updated>2010-01-22T17:54:55.034+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लापरवाही'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भूख'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कुपोषण'/><title type='text'>सरकारी भोजन की थाली में कुपोषण</title><content type='html'>सिखों के पहले गुरू , गुरू नानक कहा करते थे कि राम दा चिड़िया राम दा खेत छक्कों चिड़ियाँ भर-भर पेट। आज सरकारी योजनायें भी पेट भर खाना खिलने की योजनायें निकाल रहीं हैं। लेकिन जब यही योजनायें भूखीं हो तो तो स्वाभाविक हैं। योजना दम तोड़ देगी और वो योजना खुद कुपोषण का शिकार हो जाएगी। जाहिर हैं इस योजना का जिसे फायदा होगा वो भी कुपोषण का शिकार होगा। ऐसे में अगर सरकार ये कहें कि बच्चों में कुपोषण दूर करना है तो सबसे पहले सरकार को अपना कुपोषण दूर करना होगा।यूनिसेफ और वाशिंगटन स्थित इंटरनॅशनल फ़ूड पालिसी रिसर्च संस्थान ने  जो आंकड़े पेश किये हैं उससे साफ़ पता चलता हैं कि सरकार की कितनी योजनायें कुपोषण की शिकार हैं। बच्चोके लिए अनेक सरकरी योजनायें होने के बावजूद भी बच्चों में कुपोषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा हैं। इससे बाल मृत्यु दर का आंकड़ा असमान छू रहा हैं। यूनिसेफ का सर्वेक्षण कहता हैं कि दुनिया भर के कुपोषित बच्चों का एक तिहाई हिस्सा भारत में निवास करता हैं। यानी हिन्दुस्तान में पांच साल से कम उम्र के छः करोड़ से ज्यादा बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। योनिसेफ़ के मुताबिक देश में मध्यप्रदेश की तस्वीर भयावह हैं। वहां कुपोषण के शिकार बच्चों में से सात फ़ीसदी से अधिक बच्चों का वजन औसत भार से काफी कम हैं। इसके अलावा वहां ३३ फ़ीसदी बच्चे गंभीर क्षय रोग की चपेट में हैं। केरल की स्थिति देश में सबसे अच्छी हैं। वहां २९ फ़ीसदी बच्चों का ही  वजन औसत से कम मिला। जबकि क्षय रोग से पीड़ित बच्चे १६ फ़ीसदी पाए गए। भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा जारी प्रतिवेदन का ही अगर अध्ययन किया जाये , तो देश में साल २००८ में नवजात शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार में ५३ फ़ीसदी थी। यूनिसेफ के द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रेन रिपोर्ट में कहा गया हैं कि भारत में शिशु जन्म दर दुनिया के १४३ देशों से ज्यादा हैं। भारत के महापंजीयक के प्रतिवेदन के अनुसार नवजात बच्चों के मौत के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर हैं। जबकि दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश हैं। इस मामले में गोवा की स्थिति बेहतर हैं। जहाँ मृत्यु दर प्रति हजार में दस है। देश की राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा ३५ हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;भूख सूचकांक &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वाशिंगटन की आई.ऍफ़.आर.आर.आई। ने भूख की वैश्विक स्थिति पर एक सूचकांक जारी किया हैं जिसे जी.एच..आई। यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स कहतें हैं। इस सूचाकान में लिए गए आंकड़े २००० से २००५ की अवधि के हैं। इस सूचकांक में भूख को तीन तरीकों से मापा गया हैं। लोगों में कैलोरी की न्यूनता,बच्चों में कुपोषण की कमीं , और बच्चों की मृत्यु दर । जिसका मुख्या कारण कुपोषण है। जी.एच.आई.२००७ के आधार पर ११८ विकासशील देशों में भारत को 95vaan  स्थान प्राप्त हुआ है। इसमें भारत का भूख २५.०३ हैं। जब कि चीन का सूचकांक ८.३७ हैं। और सूची में वह ४७वेन पायदान पर हैं। इंडेक्स के अनुसार भारत कि विकास दर के अनुपात में जी.एच.आई.में सुधार नहीं हो पाना चिंता का विषय हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद सरकार बच्चों को लुभाने के लिए जो मिड डे मील शुरू की हैं। उसमें कितनी अनियमितताएं रहती हैं। इसे सरकरी थाली बता रही हैं। अब क्या कहा जाये कि सरकार को कुपोषण हैं या फिर थाली में कुपोषण हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4217259852314239244?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4217259852314239244/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4217259852314239244' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4217259852314239244'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4217259852314239244'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/01/blog-post_22.html' title='सरकारी भोजन की थाली में कुपोषण'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-980422654990454263</id><published>2010-01-05T13:39:00.003+05:30</published><updated>2010-01-05T14:43:31.386+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जीडीपी का खेल'/><title type='text'>अर्थव्यवस्था की कराहती हकीकत का पाला</title><content type='html'>सकल घरेलू उत्पाद बढ़ने से देश का विकास हो जाएगा। ऐसा सोचना या समझना ग़लत हैं। बचपन भले ही भूखा रहे,नौजवान भले ही निराश हों,किसान आत्महत्या कर लें पर सकल घरेलू उत्पाद बढ़ जता हैं तो हम यह कहतें नहीं थकते किहम विकास के रास्ते पर शानदार तरीके से आगे चल रहे हैं। भारत आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा हैं। सपनों की दुनिया और हकीकत में फर्क हैं। भारत में २० से २५ फीसदी आबादी भूखी या कहना चाहिए कि वह कुपोषण का शिकार हैं। बाज़ार में खाद्यान्न उपलब्ध हैं। पर क्रियशक्ति नहीं हैं।  यदि लोगों के पास पर्याप्त खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए पैसे नहीं है तो भूखे रहने के सिवाय उनके पास कोई चारा नहीं हैं। गरीबी  भूख का सबसे बड़ा कारण हैं। सामान्य कुपोषण की दृष्टि से भारत की स्थिति अफ्रीकी देशों से भी बदतर हैं।  अफ्रीका में बार बार अकाल पड़ने के बावजूद भी वहाँ का पोषण स्तरभारत की तुलना में अच्छा है। देश में ५० फीसदी वयस्क महिलाएं रक्त अल्पता से पीड़ित हैं। माताओं में कुपोशन, शिशुओं का वजन अपेक्षा से कम होना एवं जीवन के बाद के दिनों में रोगों के होने की दृष्टि से भारत सबसे ख़राब रिकार्ड वाले देशों में गिना जाता हैं। कम आय, बढाती कीमतें,ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, और बुनियादी शिक्षा की उपेक्षा आदि ने भारत में भूख और कुपोशन को बढाया हैं।  झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले, शहर के कर्मचारी,अंशकालिक मजदूर ग्रामीण और कृषि श्रमिक , ग्रामीण क्षेत्र के शिल्पी इन सबकी ज़िन्दगी बदतर होती चली गयी हैं। इस देश में मुठ्ठी भर लोग मालामाल होकर अमीरी के शिखर पर भले ही पहुँच गए हों। पर आम आदमी बदहाल ज़िन्दगी जीने को मजबूर हैं। सही बात तो ये हैं कि केवल २० फीसदी लोग ही सबकुछ लुटे जा रहे हैं। और ८० फीसदी के पास कुछ भी नहीं हैं।  जमीनी सच्चाइयां शब्दों के मायाजाल से कहीं अलग हैं। &lt;br /&gt;   जीडीपी  से आगे हमें सोचना होगा। क्योंकि जीडीपी का आकलन करते समय बुनियादी स्वास्थ्य, बुनियादी, शिक्षा ,साफ़ पीने का पानी औसत आयु,मात्र-शिशु जीवन दर जैसे विषयों पर ध्यान नहीं दिया जाता। देश की प्रगति को आर्थिक आंकड़ों से नापा जाता हैं। जीडीपी के आंकलन में इस तथ्य की पूरी उपेक्षा की जाती हैं कि वहाँ के लोग वास्तव में कितने शिक्षित हैं, स्वास्थ्य, सुखी और संतुष्ट हैं। हमें यह समझना होगा कि ज़िन्दगी में आर्थिक विकास में नहीं हो सकता। जीडीपी हमारे देश की बढ़ रही हैं पर साथ ही गरीबी रेखा से नीचे जीवन निरवाह करने वालों की संख्या भी प्रतिवर्ष बढ़ रही हैं। काम पाने के लिए आतुर करोड़ों पढ़े लिखे नौजवान बेकार होकर पड़े हैं। अमीर और गरीब का अन्तर इतना बढ़ता जा रहा हैं कि उसे देखकर मन में कम्पन शुरू हो जाता हैं। सुखी  जीवन   जीने के बजाय गर्त की तरफ बढ़ रहे हैं. सामाजिक जीवन में नैतिकता मानो ख़त्म हो चुकी हैं. जीडीपी के धर्म दर्शन के बजाय हमें यह देखना चाहिए की वहां के लोग वास्तव में कितने शिक्षित , स्वास्थ्य,सुखी और संतुष्ट हैं. समय आया गया हैं की हम जीडीपी के बजे देखें की आम आदमी की हैसियत में बढ़ोत्तरी हुयी या नहीं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-980422654990454263?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/980422654990454263/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=980422654990454263' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/980422654990454263'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/980422654990454263'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='अर्थव्यवस्था की कराहती हकीकत का पाला'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-8012257170316867362</id><published>2009-12-29T15:00:00.003+05:30</published><updated>2009-12-29T16:23:27.488+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='एस.जी.एक्स'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='समय'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सट्टेबाजी'/><title type='text'>एन.एस.ई.बनाम बी.एस.ई.</title><content type='html'>नॅशनल स्टाक एक्सचेंज कारोबारी समय बढ़ाने के नाम पर बाज़ार के कारोबारियों और नियामकों को भ्रम के जाल में फंसा रहा हैं। एन.एस.ई.और बी.एस.ई। में कारोबारी समय बढ़ाने की होड़ नहीं हैं। होड़ अपने वर्चस्व और एकाधिकार को साबित करने की हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    दरअसल एन.एस.ई। ने बी.एस.ई को कई मामले में पीछे छोड़ दिया हैं। और उसके बाज़ार हिस्से को हड़प लिया हैं। इसलिए बी.एस.ई  इससे पहले की कुछ नया कर पाये एन.एस.ई पूरी तरह से हावी होना चाहता हैं।  इस कोशिश में भले ही देश का नुकसान हो। बाज़ार के जानकारों के अनुसार एन.एस.ई ने एक बड़ी रणनीति और अपने एकाधिकार के बल पर दूसरे सभी एक्सचेंजों, निवेशकों, बाज़ार के सहभागियों आदि के अलावा पूँजी बाज़ारके नियामकों को भी ताकपर रख दिया हैं। कारोबारी समय बढ़ाने के पीछे एन.एस.ई एस.जी.एक्स। के साथ तालमेल बिठाने का तर्क दे रहा हैं। ताकि एन.एस.ई एस.जी.एक्स में होने वाले निफ्टी के कारोबार को खींच सके। गौरतलब हैं की सिंगापुर एक्सचेंज (एस.जी.एक्स ) में निफ्टी के वायदा सौदे हो रहे हैं। जबकि इन सौदों के लिए एन.एस.ई ने ही एस.जी.एक्स को लाइसेंस दिया हैं। साफ़ हैं किएन.एस.ई को इससे लाइसेंस फीस और ट्रांजैक्शन फीस के रूप में आमदनी हो रही हैं। सिंगापुर एक्सचेंज सुबह साढ़े सात बजे खुलता हैं&lt;span class=""&gt; । और जब tak  भारत के एक्सचेंज खुलते हैं, एस.जी.एक्स में निफ्टी के अच्छे खासे वायदा सौदे हो&lt;span class=""&gt;   जाते हैं। &lt;/span&gt;अब एन.एस.ई  चाहता हैं कि ये सौदे उसके एक्सचेंज पर हों,इसलिए उसने भारतीय एक्सचेंज सुबह नौ बजे खुलने का राग अलापने लगा हैं। और सेबी और ब्रोकरों के सामने आवाज़ उठाना शुरू कर दिया हैं। कि भारत के सौदे एस जी एक्स में जा रहे हैं। एन.एस.ई चाहता तो एस.जी.एक्स के साथ मिलकर निफ्टी के अनुबंधों को संशोधित करके भारतीय समय के अनुकूल बना सकता था। और यदि एस.जी.एक्स को इसमें कोई एतराज होता तो एन.एस.ई उक्त अनुबंध को रद्द भी कर सकता था। लेकिन वह ऐसा  नहीं कर रहा हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;  एन.एस.ई ने अपने हित में सेबी को सुबह नौ बजे एक्सचेंज खोलने का प्रस्ताव किया हैं। जबकि एस.जी.एक्स भारतीय समय से ढाई घंटे पहले खुलता हैं। सिंगापूर एक्सचेंज में नौ बजे खुलने के समय भारत में सुबह साढ़े सात बजे होते हैं। सपष्ट हैं भारत के एक्सचेंजों के ९ बजे खुलने पर भी सिंगापुर के ढाई घंटे के सौदे को एन.एस.ई कवर नहीं कर पायेगा। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;  यदि कवर हो भी जाए तो इससे देश को क्या हाशिल होगा? सिवाय सट्टेबाजी के वर्चस्व की इस लड़ाई का खामियाजा आम निवेशकों, छोटे कारोबारियों और कर्मचारियों को ही भुगतना हैं। ट्रेडिंग बढ़ने से फ़ायदा केवल विदेशी निवेशकों और एक्सचेंजों को ही होगा। इसलिए शेयर बाजारों में कारोबारी समय बढ़ाना कतई उचित नहीं होगा। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8012257170316867362?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8012257170316867362/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=8012257170316867362' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8012257170316867362'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8012257170316867362'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/12/blog-post_29.html' title='एन.एस.ई.बनाम बी.एस.ई.'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5337850230068585289</id><published>2009-12-15T13:57:00.000+05:30</published><updated>2009-12-15T14:56:03.053+05:30</updated><title type='text'>तेलंगाना जैसी पाइप लाइनों में भड़की आग</title><content type='html'>देश में २९ वें राज्य के रूप में तेलंगाना के उदय होने से तेलंगाना जैसी  पाइप लाइनेगरम होना शुरू हो चुकी हैं।  जिस पाइप लाइन से पहले धुंआ निकलता था। और पृथक राज्य बनाए जाने की मांग शैनः शैनः हो रही थी। अब वहाँ चिंगारी निकालनी शुरू हो गयी हैं। एक ओर जहाँ महाराष्ट्र में विदर्भ को अलग कराने के लिए बीजेपी ने आन्दोलन को राशन पानी देना शुरू कर दिया हैं। तो उत्तर-प्रदेश में मायावती ने भी हरित प्रदेश और बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाये जाने की मांग को हवा पानी देना शुरू कर दिया हैं। मायावती ने तो प्रधानमन्त्री को पत्र लिखकर अलग राज्य बनाये जाने की मांग भी कर डाली हैं।   &lt;br /&gt;            दरअसल तेलंगाना को अलग राज्य बनाए जाने की हरी झंडी मिलना जनाकांक्षाओं की जीत हैं। चंद्र शेखर राव के तेजस्वी और जोशीले नेतृतवमें केवल आठ वर्षों में तेलंगाना नेतृत्व अपनी लक्ष्य प्राप्ति तक जा पहुचा। और विदर्भ, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश को बनाए जाने के आन्दोलन में नयी जान आ गयी।  अगर तेंगाना के बारे में जाने तो तेलंगाना का तात्पर्य हैं -  तेलगू की भूमि। महाभारत में तेलंगाना के लिए तेलिंगा राज्य का जिक्र किया गया हैं। और यहाँ के निवासियों को तेल्वाना से संबोधित किया गया हैं। माहाभारत और रामायण दोनों में तेलंगाना का उल्लेख मिलता हैं।&lt;br /&gt;वैसे पृथकका आन्दोलन १९६९ में शुरू हुआ था। लेकिन इसे दबा दिया गया। १९९८ के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने एक वोट दो राज्य का नारा देकर आन्दोलन को तेल देना शुरू कर दिया। २००१ में  केचंद्रशेखर  राव के नेतृत्व में तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन हुआ। आन्ध्र प्रदेश विधान सभा की २९४ सीटों में से ११९ सीटें तेलंगाना की हैं। इसी तरह आंध्र प्रदेश की ४२ लोकसभा सीटों में से १७ तेलंगाना की हैं। राव के आमरण अनशन ने केन्द्र सरकार की हवा निकल दी। राव के दृढ विश्वाश और फौलादी इरादों की बदौलत मनमोहन सरकार को अलग राज्य बनाये जाने का सिगनल देना पड़ा॥&lt;br /&gt;जाहिर हैं दिल्ली दरबार के सिग्नल देते ही नागपुर में चल रहे शीतकालीन सत्र में रोशनी की आस जाग गयी। और मायावती ने भी केन्द्र सरकार के पाले में यार्कर गेंद फेंक दी। क्योंकि राहुल बाबा बुंदेलखंड का गुणगान करते की मायावती भंजाने के फिराक में जुट गयी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अब एक नजर डालते हैं की पाइप लाइन में कितने हैं तेलंगाना-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बुंदेलखंड -&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;पिछले ५० साल से अलग बुंदेलखंड बनाये जाने को लेकर आन्दोलन चल रहा हैं।  इलाके की आबादी तकरीबन ६ करोड़ से ऊपर हैं इसका कुछ हिस्सा उत्तर परदेश का हैं तो कुछ मध्य प्रदेश का हैं। अपार खनिज संपदा होने के बावजूद यह इलका काफ़ी पिछड़ा हुआ हैं और गरीब हैं। यहाँ किसानों के नाम पर अलग राज्य की मांग उठती रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पूर्वांचल -&lt;/span&gt;  उत्तर मध्य भारत का यह हिस्सा यूंपी के पूर्वी छोर पर बसा हैं। यह उत्तर में नेपाल पूर्व में बिहार दक्षिण में मध्य प्रदेश बुंदेलखंड क्षेत्र और पश्चिम में यूपी के अवध क्षेत्र से लगा हुआ हैं। पूराव्चल के तीन भाग हैं पश्चिम में अवधी क्षेत्र, पूर्व में भोजपुरी और दक्षिण में बुंदेलखंड क्षेत्र।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;विदर्भ -&lt;/span&gt; पूर्वी महाराष्ट्र का यह इलाका अमरावती और नागपुर डिवीजन से मिलकर बना हैं। यहाँ  अलग राज्य की मांग के पीछे राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र की उपेक्षा बड़ा कारन हैं। एन.के.पी  साल्वे और वसंत साथे अलग राज्य की मांग के हक़ में हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों ने इसकी खास रुचि नहीं दिखाई। हालाँकि युति में बीजेपी ने अलग राज्य बनाये जाने की मांग को जोर दिया हैं। लेकिन शिवसेना संयुक्त महाराष्ट चाहती हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;हरित प्रदेश -&lt;/span&gt; पश्चिम यूपी के जिलों को मिलाकर अलग हरित प्रदेश या पश्चिमांचल बनने की मांग उठती रही हैं। हालाँकि १९५५ में बी आर अमेडकर ने तीन हिस्सों में बांटने की वकालत की थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पर अलग-अलग राज्य बनाये जाने की मांग आज भी जिन्दा हैं। और इसे अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल पुरजोर तरीके से तेल पानी दे रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बोडोलैंड - &lt;/span&gt;असममें अलग राज्य बोडोलैंड के गठन की मांग ६० के दशक से चली आ रही हैं। बोडोलैंड की सीमायें ब्रम्हपुत्र नदी के उत्तरी छोर से लेकर भूटान और अरुणाचल प्रदेश से लगे तराई वाले इलाके तक हैं। इलाके की ज्यादातर आबादी बोडो भाषी हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रायलसीमा-&lt;/span&gt; आन्ध्र प्रदेश के इस इलाके में कुरनूल, कडपा,अंतपुर,चित्तूर,नेल्लोर और प्रकाशम् जिले का कुछ क्षेत्र आता हैं। इस इलाके से राज्य के कई सी एम् रहे चुके हैं। इनमें वाई.एस आर रेद्द्दी और चंद्र बाबू का नाम भी शामिल हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सौराष्ट्र-&lt;/span&gt; गुजरात के इस अंदरूनी हिस्से की अलग राज्य के गठन की मांग ज्यद्फातर बुलंद नहीं रही। इसकी वजह लोगों की एक्जुता और लोगों की सम्पन्नता भी रही हैं। साथ ही सौराष्ट्र में आम गुजराती बोली बोली जाती हैं। और संस्कृति और परम्परा भी आम गुजरती की तरह ही हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;मिथिलांचल-&lt;/span&gt; नेपाल से सटे कुछ इलाकों के अलावा बिहार का आधे से ज्यादा इलाका मिथिलांचल क्षेत्र में आता हैं। इसके बड़े शहरों में जनकपुर, दरभंगा,मधुबनी,समस्तीपुर,मधेपुरा,बेगुसराय,सीतामढी,वैशाली,मुंगेर शामिल हैं। मिथिलांचल मूल रूप से मिथिली भाषी इलाका हैं। अलग पारम्परिक लिपि होने के कारण मैथिली बोलने वालों की तादाद ४.५ करोड़ हैं। &lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;गोरखालैंड-&lt;/span&gt; हालांकि दार्जिलिंग गोरखा हिल कौंसिल के तहत गोरखा लैंड को कुछ स्वायत्ता मिली हुयी हैं। पर दार्जलिंग और आसपास के क्षेत्र के लोगों की आक्शान्यें पूरी नहीं हो सकी हैं। यही वजह हैं की एक अलग राज्य मांग यहाँ जोर पकड़ रही हैं। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा इस मान का झंडा बुलद किए हुए हैं।&lt;br /&gt;कुर्ग- कर्नाटक में कुर्ग राज्य बनाने की मान मूलतः इस प्रदेश की संस्कृति विशिष्टता के कारन हैं.बांकी जगह की तरह यहान्न अलग राज्य की मांग के लिए भेदभाव नहीं हैं। हालाँकि ५० के दसक में इसके गठन की मांग उठाती रही हैं। पर इसने कभी मुखर रूप नहीं लिया। शायद इसकी वजह इस क्षेत्र का अधिक संपन्न होना भी रहा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;तुलुनादू-&lt;/span&gt;यह कर्नाटक और केरल का वह इअलाका हैं जो अपनी अलग संस्कृति और भाषाई पहचान रखता हैं। तुलु भाषी लोगों की संस्कृति कर्नाटक से काफी भिन्न हैं। क्षेत्र के वासियों की पहचान को बचाने और उपेक्षा की भावना को ख़त्म करने के लिए कर्णाटक और केरल सरकार ने तुलु साहित्य अकादमी भी बनाई हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5337850230068585289?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5337850230068585289/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5337850230068585289' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5337850230068585289'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5337850230068585289'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='तेलंगाना जैसी पाइप लाइनों में भड़की आग'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3629921335012668609</id><published>2009-10-14T11:00:00.004+05:30</published><updated>2009-10-14T12:56:59.298+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नोबेल'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='एडवांस'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='युध्द'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उम्मीद'/><title type='text'>नोबेल नहीं, दूसरा बुश न पैदा हो</title><content type='html'>जिस पुरस्कार से महात्मा गाँधी या पंडित जवाहर लाल नेहरू को नहीं नवाजा गया । वह अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को सिर्फ़ नौ माह के कार्यकाल में ही मिल गया। जबकि फ़िल्म अभी पूरी बांकी है।&lt;br /&gt;अगर नोबेल के बारे में बात की जाए तो विभिन्न क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार प्रतिवर्ष &lt;span style="color:#cc0000;"&gt;स्वीडिश रसायन शास्त्री अल्फ्रेड बर्नार्ड &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;नोबेल&lt;/span&gt; (&lt;/span&gt;१८३३-९६) की स्मृति में उनकी पुण्यतिथि (१० दिसम्बर)के अवसर पर स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम और नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिए जाते हैं। नोबेल ने एक कोष बनाया था। जिसके धन के ब्याज से पुरस्कार की राशि आती है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने मानवता के हित के लिए भौतिक शास्त्र ,रसायन शास्त्र,शारीरिक क्रिया विज्ञान ,चिकत्सा विज्ञान और विश्व शान्ति में योगदान किया हो.ऐ.बी.नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन की खोज की। और इसका उपयोग विस्फोटक बनाने में किया गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आर्थिक विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार सन १९६७ में ' रिक्स्वांड दी सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ स्वीडन द्वारा इसकी ३०० वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में स्थापित किया गया। सभी पुरस्कार १९०१ ईसवी से प्रारम्भ हुए। परन्तु अर्थशाश्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार सर्वप्रथम १९६९ में दिया गया।&lt;br /&gt;भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंस द्वारा दिया जाता है। जबकि चिकत्सा और शारीरिक क्रिया विज्ञान के लिए पुरस्कार 'स्टाक होम फैकल्टी ऑफ़ मेडीसिन ' द्वारा दिया जाता है।&lt;br /&gt;साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चयन स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ लिटरेचर द्वारा किया जाता है।&lt;br /&gt;शान्ति के क्षेत्र में इस पुरस्कार हेतु निर्णय नार्वे की संसद के पाँच निर्वाचित प्रतिनिधि करते है। कोष का प्रबंध बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा किया जाता है। जिसका अध्यक्ष स्वीडन सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। साल २००१ से १०० वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ग में विजेताओं को पुरस्कार स्वरुप एक -एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग ४.७५ करोड़) रुपये की राशि दी जाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ओबामा को पुरस्कार मिलने पर वे ख़ुद आश्चर्य चकित हैं ओबामा ने कहा है कि - मुझे नहीं लगता कि इस पुरस्कार से सम्मानित अनेक युगांतकारी हस्तियों की कतार में मैं कहीं स्वयं को पाता हूँ। ओबामा के इस कथन से उनकी ईमानदारी झलकती है। क्यों कि बहुत से अमेरिकी मानते होंगे कि उन्हें ये पुरस्कार समय से कुछ पहले ही मिल गया है।ओबामा अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके पहले वुडरो विल्सन और फ्रेंकलिन रूजवेल्ट को नोबेल मिल चुका है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;अब&lt;/span&gt; दिमाग में ये सवाल कौंध रहा है कि ओबामा ने ऐसा कौन सा शांतिकुंज स्थापित कर दिया है जिससे नोबेल देने की घोषणा कर दी गयी है। अलकायदा और तालिबान के ख़िलाफ़ अमेरिका को अब तक सफलता नहीं मिली हैं। अगर ओबामा विश्व शान्ति के प्रति इतने गंभीर और ईमानदार हैं तो पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि तिगुनी नहीं होती। जबकि ओबामा भली भांति जानते हैं कि पाकिस्तान इस राशि का उपयोग भारत के ख़िलाफ़ आतंक की फसल उगाने में करता है। पश्चिम एशिया में शान्ति स्थापना का अर्थ है इजरायल को मजबूत करना। तो क्या नोबेल पुरस्कार समिति पर कोई दबाव था कि इस साल नोबेल पुरस्कार ओबामा कि दिया जाए। ओबामा दुनिया के किस हिस्से में शान्ति स्थापित कर पायें हैं इसका अभी तक कोई ठोस उदाहरण नही हैं। ईराक और अफगानिस्तान के घाव जल्दी भरने वाले नहीं है। अमेरिका ने जिस फावडे का इस्तेमाल ईराक और अफगानिस्तान के ऊपर किया है पाकिस्तान में भी आतंक की फसल लहलहा रही है । अमेरिका पाकिस्तान के ऊपर इराकी फावडा इस्तेमाल करने के बजाय मरहम दे रहा है। क्या इस लिए शान्ति का पुरस्कार देने के लिए ओबामा को चुना गया है ?&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;ऐसे में निशित रूप से नोबेल शान्ति पुरस्कार ने ओबामा की नैतिक जिम्मेदारी और प्रतिबध्दता को बढ़ा दिया है। जिससे ओबामा बुश के समान कोई युध्द नहीं छेड़े। अब तो अमेरिका को दूसरे देशों से एन.पी.टी यानी परमाणु अप्रसार संधि में हस्ताक्षर करने के लिए कहने से पहले ओबामा को ख़ुद हस्ताक्षर कर देना चाहिए। क्योंकि वे तो अब शान्ति के मिसाल बन गए हैं। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3629921335012668609?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3629921335012668609/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3629921335012668609' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3629921335012668609'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3629921335012668609'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html' title='नोबेल नहीं, दूसरा बुश न पैदा हो'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-2315294862321787100</id><published>2009-10-07T12:32:00.010+05:30</published><updated>2009-10-07T13:58:44.119+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भ्रष्टाचार'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ईर्ष्या'/><title type='text'>सादा जीवन उच्च विचार हो गए मालामाल</title><content type='html'>इन दिनों लोकतंत्र के पुजारी (जन-प्रतिनिधि)सादगी पर उतर आए हैं। इनकी सादगी पर कौन मरेगा ,किसका भला होगा, सादगी पर कितना सादापन है । ये एक अलग मुद्दा है। लेकिन राजनीतिक घरानों को कारपोरेट घराने की चमक-दमक शान-शौकत, उच्च वेतन से भौंहें तनी हुयी हैं। कंपनी मामलो के मंत्री सलमान खुर्शीद को सी.ई.ओ। का वेतन कचोट रहा है। साथ ही योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी खुर्शीद से इत्तेफाक रखते हैं.मोंटेंक सिंह का कहना है कि सी.ई.ओ को उलूल जुलूल वेतन(indecent salaries) नहीं मिलना चाहिए।  &lt;br /&gt;                      ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे इन लोगों से ऐसी बयानबाजी की उम्मीद नहीं की जा सकती है।  निजी क्षेत्र की कम्पनियों के उच्च अधिकारयों को काबिलियत ,मेहनत और कंपनी को सफल बनाने में मिलता है। जबकि फाइलों का ढेर ,हाथ में तमंचा, अगल-बगल गुंडे रखने वाले बाहुबली नेता पर लाखों रुपये उड़ते है।&lt;br /&gt;           एक नज़र डालते हैं की देश के मंत्री जी को  क्या मिलता है ?&lt;br /&gt;- टाइप ८ बँगला,राज्य मंत्रियों को टाइप ७ बंगला&lt;br /&gt;- कोई किराया नहीं, बिजली के बिल पर कोई लगाम नहीं।&lt;br /&gt;-बेसिक सैलरी १६ हज़ार ,डेली भत्ता एक हज़ार&lt;br /&gt;-संसदीय क्षेत्र भत्ता २० हज़ार रुपये।&lt;br /&gt;-- टेलीफोन - दो फ़ोन, एक लाख ७५ हज़ार फ्री कॉल,हर साल ढाई हज़ार रुपये मोबाइल भत्ता,मोबाइल हैंडसेट फ्री, इन्टरनेट ,ख़ुद के लिए जितना चाहे उतना एयर टिकट ।&lt;br /&gt;- परिवार के लिए साल में ४८ यात्राएं&lt;br /&gt;&lt;span&gt;- जितना चाहें उतनी एसी कोच में जर्नी परिवार के साथ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;--- स्टाफ- पर्सनल स्टाफ में १५ लोगों को नियुक्त किया जा सकता है। एक प्राइवेट सेक्रेटरी ,एक एडिशनल पर्सनल सेक्रेटरी दो पर्सनल अस्सिटेंट ,एक हिन्दी स्टेनो ,एक ड्राईवर, एक क्लर्क एक जमादार और एक चपरासी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;(यह केवल मंत्री जी का स्टाफ है मंत्रालय से अलग से स्टाफ मिलता है) &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;  ये हैं देश के जनसेवक जिन्हें देश की सेवा कराने में कितने सेवकों की जरूरत पड़ती है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;अब इनके द्वारा कामो की घोंघा चाल को भी देख लेते हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;  दस  साल में- &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;१९९८&lt;/span&gt;-&lt;/span&gt; में पी.सी.जैन कमीशन ने वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को रिपोर्ट सौंपी गयी। इसमें १०९ ऐसे कानूनों को चिन्हित किया गया.जिनमें बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है.इसी तरह एक समिति ने २५सौ कानूनों का अध्ययन किया १४०० kaanoono  को गैर जरूरी बताया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;१९९९&lt;/span&gt; में प्रशासन सुधार विभाग ने ९९ से २००१ के बीच दस मंत्रालयों का अध्ययन किया इसमें आठ हज़ार पद ख़त्म करने १३संगठनो को ख़त्म करने और २४ को नए सिरे से व्यवस्थित करने का सुझाव दिया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;२००३&lt;/span&gt; में सुरेन्द्र नाथ कमिटी ने सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि की प्रक्रिया में सुधार का सुझाव दिया ताकि कर्मचारियों का स्किल मुआयना किया जा सके।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;२००५&lt;/span&gt; में कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार आयोग बना। आयोग ने चार रिपोर्ट फाइल की। जिसमें आर.टी.आई.क्राइसेस,मैनेजमेंट के साथ गवर्नेस के एथिक्स पर भी एक रिपोर्ट थी। रिपोर्ट पर अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;आजादी के बाद से अब तक तकरीबन ३० कमिटी और कमीशन बन चुके हैं लेकिन किसी की भी आधी सिफारिशों पर भी अमल नहीं किया गया है। ये हैं हमारे देश केमंत्रियों के  कारनामे। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;आज कोई भी सांसद या विधायक पद की उम्मेदवारी के समय कितनी संपत्ति है । इसके बाद जब वह जीत जाता है । और फ़िर से जब उम्मेदवार बनता है तो पाँच साल में करोड़ों का मालिक बन बैठता है। हाल ही में नॅशनल इलेक्शन वॉच और एसोसियेशन फॉर डेमोक्रेटिक रेफोर्म्स संगठन ने खुलासा किया कि हरियाणा में उम्मीदवारों की संपत्ति पिछले पाँच साल में पाँच हज़ार फीसदी से अधिक  का इजाफा हुआ है। ओमप्रकाश चौटाला की अगुवाई वाले आई.एन.एल.डी.के ५६ प्रत्याशी करोड़पति है। इसी तरह हरियाणा जनहित kaangresh   के ४४ और बी.जे.पी .के ४१ करोड़पति उम्मीदवार हैं। इधर महारष्ट्र में भी मुंबई और ठाणे की ६० विधान सभा सीटों पर १२२ करोड़पति उम्मीदवार मैदान मारने की फिराक में हैं। महाराष्ट्र राज्य के सबसे धनी उम्मीदवार अबू आसिम आज़मी हैं जिनकी संपत्ति १२६ करोड़ है। ये संपत्ति देश के भावी विधायकों की हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;  इधर मंत्री जी फाइव स्टार होटलों में रुके हुए थे। एक दिन में लाखों रुपये का बिल आता था। और सीना तानकर कहते थे कि बिल हम अपनी जेब से भर रहे है। लेकिन जब छीछालेदर होने लगी तो सादगी के पैमाने पर उतर आए। संसद को चलाने में करोड़ों रुपये स्वाहा हो जाते है। आम आदमी तक रुपये में दस पैसे भी पहुँचने पर दस बार आई.सी.यूं.से होकर गुजरता है। जनता के टैक्स के पैसों से ही नेता जी फ्री में उड़ना, फ्री में ठहरने की आदत पड़ गयी है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;अब आते हैं असली मुद्दे पर तो सलमान खुर्शीद ने लोकसभा चुनाव के हलफनामे पर २.६१ करोड़ की संपत्ति दिखाई है। खुर्शीद साहब ख़ुद एक बेहद कामयाब वकील हैं.इसका मतलब मोटी फीस भी जरूर लेते रहे होंगे। क्या वे जनसेवक के नाते फ्री में केस लडेंगे। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;   आज देश को आज़ाद हुए ६० साल से ज्यादा का समय हो गया है। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि देश को ६० साल का बूढा देश कहूं या फ़िर ६० साल का जवान देश। जवान शब्द इसलिए इस्तेमाल कर रहा हूँ कि हम विकासशील बने हुए हैं यानी की जवानी की दहलीज पर पहुँच रहे हैं। बूढा इस लिए कह रहा हूँ कि सरकार की जो भी योजनायें निकलती हैं वो बूढी हो जाती हैं और फ़िर उस बूढी नब्ज में खून दौडाना मुश्किल हो जाता है। नरेगा नरक बन गया है ये किसी से छिपा नहीं है। नरेगा के जरिये अरबों रूपये वारा-न्यारा हो गए है। सरकारी आंकडे बताते हैं कि देश की पाँच karod  जनता को नरेगा का लाभ मिला है। लेकिन सरकारी आंकडे ये नहीं बताते कि कितने लोग नरेगा को छोड़ गाव से शहर की और कूच कर गए हैं। विधायक ,संसद निधि का कमीशन किसी से छिपा नहीं है। सादगी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। और मालामाल हो रहे हैं। कोई हाड़तोड़ मेहनत करता है । रोजगार के अवसर पैदा करता है। पैसा कमाता है तो तो इन घरानों को बर्दाश्त नही होता। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;              &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;धन्य है ऐसी सादगी। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-2315294862321787100?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/2315294862321787100/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=2315294862321787100' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/2315294862321787100'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/2315294862321787100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/10/blog-post_07.html' title='सादा जीवन उच्च विचार हो गए मालामाल'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-800076192177014363</id><published>2009-10-01T13:11:00.003+05:30</published><updated>2009-10-01T13:56:08.879+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ढोंग'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कम खर्चा'/><title type='text'>कम खर्च का चोला</title><content type='html'>कम खर्च और भ्रष्टाचार एक बार फ़िर से बहस का मुद्दा बन गया है। बोफोर्स काण्ड में सी.बी.आई. की तोप ही फिस्स हो गयी।और कई दशक से चला आ रहा कांड अब अपने अन्तिम संस्कार पर पहुँच रहा है।   सवाल ये है की मंत्री जी फाइव स्टार होटल में हैं और दलील दे रहे हैं कि यहाँ का खर्चा वे अपनी जेब से भर रहे हैं। एक दिन का लाखों में खर्च और करोड़ों का बिल बन चुका था। ऐसे में क्या मंत्री जी की आमदनी इतनी ज्यादा है कि वे इतना व्यय सहन कर सकते हैं। या फ़िर इसका भुगतान कोई अज्ञात व्यक्ति कर रहा हैं।&lt;br /&gt;       खैर कम खर्चे में सोनिया गाँधी से लेकर सभी मंत्री सोनिया जी की राह पर निकल पड़े। राहुल बाबा ने तो उड़नखटोला को ही बाय बोल दिया। और रेल से ही निकल पड़े। लेकिन इससे सरकार ने कितने रुपये बचाए। किसका फायदा हुआ। ये भी एक सवाल है। ये वही पार्टी जिसमें महात्मा गाँधी जी ने एक धोती पहनकर पूरा देश घूमा है। ऐसे में आखिरकार इस पार्टी के नेता कैसे पंचसितारा होटल के आदि हो गए कि गांधीजी के सिद्धांत को तिलांजलि दे दी। ख़बर ये भी है कि दो अक्टूबर को कांग्रेसी स्लम में  जायेंगे । और बांकी दिन कहाँ रहेंगे। क्या आदिवासी के घर जाकर वहाँ का खाना खाकर खर्चा कम होगा। तो फ़िर सबसे पहले अपने सुरक्षा रक्षक हटा दो। जिस जनता ने चुनकर भेजा है उसी जनता से डर है और सुरक्षा भारी होना चाहिए,ये भी नेताओं की मांग है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;          एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि सबसे ज्यादा खर्च सरकार, उसके मंत्री और अफसर करते हैं। लगभग ७५ फीसदी राशि तो यही लोग उड़ा देते है। २००७-०८ में  केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा १८२ करोड़ रुपया खर्च किया गया। यह खर्च २००६ -०७ में १२१ करोड़ और २००५-०६ में ९८ करोड़ का हुआ।  यात्रा व्यय पर २००७-०८ में १३८ करोड़ खर्च हुए। २००६-०७ में ८२ करोड़ और २००६-०५ में ६१ करोड़ खर्च हुए। राज्य मंत्रयों के वेतन पर १.७५ करोड़, १.54 करोड़ और १.२० करोड़  &lt;span&gt;खर्च&lt;/span&gt; हुए। एक अनुमान के मुताबिक यदि प्रधानमन्त्री पर दस फीसदी की कटौती की जाए तो लगभग १८ से २० करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। &lt;br /&gt;           ये सारे  आंकड़े सीधे खर्च के हैं। इन पर परोक्ष रूप से आंकड़े पाना कठिन है। सुरक्षा और यात्राओं के के दौरान विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए खर्च का आंकडा मिलना मुश्किल है। क्योंकि वे विभिन्न मदों में दर्ज होते हैं। एक समय  आदर्श स्थिति रहती थी कि प्रसासनिक खर्च ३० फीसदी से ज्यादा मंजूर नहीं होता था। आज लगभग ७० फीसदी प्रसासनिक खर्च हो रहा है। कम खर्च का चोला ओढ़ने वाले विधायक,सांसद क्या संकल्प लेंगे कि वे अपना वेतन और सुविधाएं नहीं बढायेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-800076192177014363?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/800076192177014363/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=800076192177014363' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/800076192177014363'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/800076192177014363'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='कम खर्च का चोला'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-134378146564999070</id><published>2009-09-23T12:59:00.004+05:30</published><updated>2009-09-23T13:34:53.738+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आशियाने'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शादी'/><title type='text'>घर नहीं तो शादी नहीं.</title><content type='html'>मुंबई की भागदौड़ ज़िन्दगी में आराम फरमाने के लिए किसे एक  बेहतरीन आशियाने की जरूरत नहीं होती। लेकिन आप अगर कुवांरे हैं और आप शादी करना चाहते है। तो आपके पास भले ही अच्छी नौकरी हो। लेकिन अगर घर नहीं है तो सकता है की आपकी शादी टूट जायेगी। क्योंकि मुंबई में घर बनाना एक टेढी खीर है। लिहाजा मुंबई जैसे शहर में शादी करने के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता अब घर हो गया है।ऐसे में अब मुंबई जैसे शहर में वो दिन दूर नहीं रह जायेंगें जब एक शैक्षिक योग्यता और जुड़ जायेगी क्या क्या वो पानी पिला सकता है?&lt;br /&gt;   खैर यहाँ बात करना चाहता हूँ यूनिटेक प्रोजेक्ट पर।  यूनिटेक ने मुंबई के वरली इलाके में बाज़ार के दाम से ४० फीसदी की सस्ती परियोजना की बुकिंग की शुरुआत की है।  कंपनी ने सम्पत्ति के दाम में कटौती नहीं कराने के बजे परियोजना को ही कम कीमत पर पेश किया है। इस कटौती पर बिल्डरों ने कुछ शर्त भी राखी है जिसमें ग्राह्नकों को बुकिंग के समय ही 75 फीसदी रकम अदा करनी होगी।  अगर वरली में सम्पत्ति के दाम की चर्चा की जाए तो औसतन १७,००० से २०,००० रुपये प्रति वर्गफुट के बीच है। हालांकि यूनिटेक ने इसके दाम १२ हज़ार से १४ हज़ार रखने का फैसला किया हैं। लेकिन किसी भी निवेशक को इसका फायदे नहीं दिया जायेगा। कंपनी का कहना है की निवेशकों को इस दायरे से अलग रखा जायेगा।&lt;br /&gt;  अब कीमत भले ही आपको आकर्षक लग रहीं हो लेकिन लेकिन इस परियोजना को पूरा होने में आपको लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता हैं। क्यों की इसकी अनौपचारिक बुकिंग सितम्बर २०१० में शुरू होगी और इसके ४ से ५ साल बाद बनकर तैयार होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       ऐसे में अगर आप अपनी ज़िन्दगी में सपनों की रानी लाना चाहते हैं तो मुंबई जैसे शहर में रहकर आप अपनी शैक्षिक योग्यता पूरी कर सकने के लिए आपके पास बेहतर मौका है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-134378146564999070?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/134378146564999070/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=134378146564999070' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/134378146564999070'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/134378146564999070'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='घर नहीं तो शादी नहीं.'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-8232099219846192974</id><published>2009-08-13T09:33:00.003+05:30</published><updated>2009-08-13T10:30:33.340+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मास्क'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्वाइन फ्लू'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कालाबाजारी'/><title type='text'>२० रुपये में स्वाइन फ्लू भगाओ</title><content type='html'>देश में स्वाइन फ्लू के पाँव पसारते ही देश से साँय-साँय की आवाज़ निकल रही है। इस महामारी से लोग बचने के लिए उपाय ढूढ़ रहे हैं लेकिन महामारी में भी कालाबाजारी का दानव घुस गया है। हालत ये हो गए हैं कि एक तरफ़ स्वाइन फ्लू का कहर जारी है दूसरी तरफ़ कुछ लोग इस फ्लू में ही मजे काट रहे हैं। वैसे तो मुंबई में बरसात के मौसम में आमतौर पर स्टेशन के बाहर मोबाइल के कवर बेंचने  का धंधा निकल पड़ता है।    लेकिन इस बार मोबाइल कवर बेंचने वाला भी ३-४ रुपये के मास्क को २० रुपये में चिल्ला-चिल्ला कर बेंच रहा है और कह रहा है कि २० रुपये में स्वाइन फ्लू भगाओ।   अब इसी को कहतें हैं कि विपत्ति में दुश्मन भी दोस्त बन जाता है लेकिन यहाँ तो मानवाता को तार -तार कराने वाले कालाबाजारियों को क्या कहें जो एक ख़ुद फ्लू के रूप में पैदा हो गए हैं।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;                  दरअसल मास्क की अचानक मांग के चलते बाज़ार में मास्क तीन की जगह तेरह रुपये में बेंचे जा रहे हैं। और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए खरीदना पड़ रहा है। बाज़ार में सबसे अच्छी किस्म  के मास्क एन -९५ हैं जिनकी कीमत २५० रुपये हैं लेकिन लोगों से ४०० से ६०० रुपये वसूला जा रहा है। और ५ से १० रुपये में बिकने वाले डिस्पोजल मास्क भी दोगुने चुगने दाम पर बिक रहे हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;      मास्क&lt;/span&gt; तीन प्रकार  के होते हैं -  --- १- पेपर मास्क २- सर्जिकल मास्क ३- एन - ९५ मास्क १० से बारह घटे के इस्तेमाल के बाद बदल देना चाहिए । कीमत २५० से ३०० रुपये। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;          अब अगर बात की जाए एन - ९५ मास्क की तो एन-95 मास्क बनाने वाली कंपनी किंबर्ली-क्लार्क ने तो मौजूदा मांग पूरी करने में अपनी असमर्थता जता दी है। ये कंपनी हर महीने २००० मास्क  बेंच पाती है । और अचानक लाखों में मांग बढ़ने के चलते फिलहाल कंपनी को मांग के अनुरूप मास्क बनाने में वक्त लगेगा। सामान्य स्थितियों में सर्जिकल मास्क का ही इस्तेमाल होता है। एन-95 प्रोटेक्टिव मास्क है। अमेरिका की किंबर्ली-क्लार्क और 3एम एन-95 मास्क के मुख्य उत्पादक हैं। किंबर्ली-क्लार्क के मास्क 70 रुपये में तो 3एम के 150 रुपये में मिलते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;       लेकिन मुंबई में तो २० रुपये में स्वाइन फ्लू भगाने का डंका अस्पतालों में बजने के &lt;span class=""&gt;बजाय रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों में बज रहा है. &lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8232099219846192974?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8232099219846192974/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=8232099219846192974' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8232099219846192974'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8232099219846192974'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='२० रुपये में स्वाइन फ्लू भगाओ'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5166221658998880554</id><published>2009-07-24T13:30:00.003+05:30</published><updated>2009-07-24T14:26:53.591+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नुक्सान'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='हड़ताल'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जवाबदेही'/><title type='text'>पानी की बूँद में हड़ताल की फुहार</title><content type='html'>मुंबई में इन दिनों इन्द्र देवता मेहरबान हैं। सागर उफान मार रहा है। साथ में हड़ताल राज्य सरकार के ऊपर ज्वार भाटा की तरह आ रही है। पहले तो मानसून ने महाराष्ट्र में बहुत देर से दस्तक दी। इसके बाद दस्तक का जो सिलसिला शुरू हुआ वो अभी तक राज्य सरकार के ऊपर मुसीबत बनाकर आता जा रहा है। पहले रेसिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की। अपनी मांगों पर अड़ गए। और न राज्य सरकार झुकी, न ही डॉक्टर । अंततः सरकार को झुकाना पड़ा और फ़िर तो इसके बाद महाराष्ट्र के सरकारी कर्मचारियों का मिजाज़ ही बदल गया। और अब डाक्टर , शिक्षक हड़ताल पर चले गए है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे अगर देखा जाए तो सर्वोच्च न्यायालय ने बंद और हड़ताल पर पाबंदी लगा रखा है। बावजूद इसके अपनी मांगों को लेकर विभिन्न संगठन गाहे- बगाहे हड़ताल करने से बाज नहीं आ रहे हैं। वे मानकर चलते हैं किअपनी मांगें मनवाने का यही एक रास्ता है। घी कभी सीधी उंगली से नहीं निकलता है। कई श्रम संगठन आज भी हड़ताल को अपना अधिकार मानते हैं। हड़ताल करने वाले कभी ये नहीं सोचते कि हड़ताल करने से आम जनता में क्या असर पड़ेगा। और जनजीवन कितना प्रभावित होगा। जब समझौता और समाधान के सभी रस्ते बंद हो जाए तो हड़ताल करना उनका अन्तिम अस्त्र बनता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर अतीत में जाएँ तो मुंबई में दत्ता सावंत हड़ताल कराने में अग्रणी थे। उन्होंने कपडा मिल मालिकों की लम्बी हड़ताल कराई थी। इससे फायदा नहीं बल्कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ था। मिल मालिक झुके नहीं और मजदूरों पर भुखमरी और बेकारी की नौबत आ गयी। मिल मालिकों ने मिलों की जमीन को बेंचकर अपनी रकम खड़ी कर ली। और मजदूरों के परिवारों पर तबाही टूट पड़ी। हड़ताल जब लम्बी खिचती है तो मालिक या नियोक्ता नहीं बल्कि सीमित साधनों वाला श्रम जीवी वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यानी कि चाकू खरबूजे पर गिरे या फ़िर खरबूजा चाकू पर गिरे। नुकसान खरबूजे का ही होना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी रेसिडेंट डॉक्टरों का इलाज हुआ ही था कि वैद्यकीय अधिकारी और प्राध्यापक बीमार हो गए हैं। वो भी इन दिनों सरकार से मांगे मनवाने में अडे हुए हैं। ज़ाहिर है इस हड़ताल से मरीजों का इलाज और छात्रों की शिक्षा पर विपरीत असर पडेगा।लेकिन जब सरकार की नीतियां ही ग़लत हो तो असंतोष के बादल फटना लाज़मी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जब सरकार हड़तालियों की मांगें मान लेती है तो फ़िर आखिरकार सरकार इतना देर क्यों लगाती है। जिससे अव्यवस्था फैलती है। देश का विकास रुक जाता है। और देश आगे बढ़ने के बजाय पीछे की ओर जाता है। अब क्या ये माना जाए कि आज नेताओं में वो क्षमता नहीं है जो विवेक का इस्तेमाल करके किसी समस्या के उत्पन्न होने से पहले उसका समाधान ढूंढ सकें। जब सब कुछ नुकसान हो जाता है तब सरकार के दिमाग की नसें काम करना शुरू करती है। साल भर का लेखा - जोखा लिया जाए तो डॉक्टरों, शिक्षकों,बैंक कर्मियों, एयर लाइंस कर्मचारियों , उद्योग में कार्यरत श्रमिकों की हड़ताल होती ही रहती है। हड़ताल तो विदेशों में भी होती रहती है। लेकिन वहाँ का तरीका अलग है। जापान में एक जूता फैक्ट्री में हड़ताल हुयी तो कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रकट कराने के लिए इस दौरान एक ही पैर का जूता बनाया। उन्होंने काम करते हुए अपना विरोध जारी रखा। अंततः प्रबन्धन झुका और मांगें पूरी हो गयी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब तो मुंबई में बारिश के मौसम में जहाँ हाई टाइड की धमकी मिलती है तो वही सरकारी कर्मचारी भी पानी की बूँद में हड़ताल की फुहार मार रहे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5166221658998880554?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5166221658998880554/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5166221658998880554' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5166221658998880554'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5166221658998880554'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/07/blog-post_24.html' title='पानी की बूँद में हड़ताल की फुहार'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-8217450440035626108</id><published>2009-07-23T14:09:00.003+05:30</published><updated>2009-07-23T14:50:27.783+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नीति'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='किसान'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आत्महत्या'/><title type='text'>पवार का पावर गुल</title><content type='html'>भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह बात अब केवल किताबों में ही सीमित रह गयी है। कृषि प्रधान देश का झुनझुना बजता रहता है। किसान आत्महत्या करते रहते हैं। खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं। देश वासियों की थाली से आज दाल की कटोरी गायब होती जा रही है। और देश के कृषि मंत्री जी के पास अभी तक कृषि से सम्बंधित कोई नीति नहीं बनी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;           दरअसल किसी नेता की पहचान उसके कार्य कलापों से होती है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार भी इसके अपवाद नहीं हैं। महाराष्ट्र की राजनीति  के चतुर खिलाड़ी , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार का मतलब क्रिकेट, शक्कर कारखाने और जमीन तक सीमित रह गया है।  और इसी में उनकी रुचि है। यही वजह है की कृषि और किसान उनके चछु से ओझल हैं। अगर वाकई पवार अपना पावर (ताकत) कृषि विभाग पर लगाते तो आज किसान आत्म ह्त्या नहीं करते।   जिस तरह रोम जलाता रहा और सम्राट नीग्रो बेफिक्र बासुरी बजाते रहे। वैसे ही शरद पवार भी गेंद-बल्ला और राजनीति में इतने उलझे हुए हैं कि किसानो के प्रति हितैषी नीति बनाने के लिए उनके पास फुरसत ही नहीं मिलती महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में भी किसानो ने आत्म हत्या की है।  बुंदेलखंड में तो सूखा पीड़ित किसानो को २५-३० रुपये के चेक देकर उनकी असहायता का माखौला उड़ाया  गया है। महाराष्ट्र के कपास ,संतरा उत्पादक किसानो की अत्यन्त दुर्दशा हुई है। कर्ज के बोझ और अपमान जनक तकाजों से तंग आकर हजारों किसानो ने मौत को गले लगाना बेहतर समझा । जबकि पवार को यह देखने का मौका ही नहीं मिला कि किसानो के घर में चूल्हा जला या नहीं। जब ज्यादा मुसीबत आयी तो विदेश से घटिया गेहूं मंगा लिया । जिसे जानवर भी खाए तो मर जाए और इंसानों को परोस दिया। इतने सालों से पवार ने अभी तक ऐसी कोई कृषि नीति नहीं बनायी है जिससे दलहन और तिलहन का उत्पादन बढाया जा सके। आज लोगों की थाली से दाल की कटोरी गायब होती जा रही है। शक्कर के दाम अनाप शनाप हैं। यह गोरख धंधा पवार भी जानते हैं। कृषि मंत्री जी को  केवल गन्ना और अंगूर उत्पादक किसान ही नजर आते हैं। कपास उत्पादक किसानो की और वो नहीं देखते।और विदर्भ के किसानो की ओर देखना पसंद ही नहीं करते। अगर अंगूर से बनने वाली शराब को बढ़ावा दिया जा सकता है तो क्या पवार साहब विदर्भ के आदिवासी क्षेत्रों में महुए से मदिरा को बढावा देना क्या ग़लत है? पवार जी को केवल बारामती जिले में ही पूरा देश नज़र आता है।&lt;br /&gt;   अब यक्ष सवाल ये उठाता है की आख़िर किसानो को राहत कब मिलेगी। क्या जनता ने गलती कर दिया जो चुनकर भेज दिया ? या फ़िर पवार साहब जानते ही न हों की कृषि क्या बला है?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8217450440035626108?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8217450440035626108/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=8217450440035626108' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8217450440035626108'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8217450440035626108'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='पवार का पावर गुल'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6058144175834895483</id><published>2009-06-18T16:56:00.003+05:30</published><updated>2009-06-18T18:09:58.135+05:30</updated><title type='text'>स्विस को स्विच करो. ..</title><content type='html'>एक कविता सुना था खाए जाओ घूस दनादन कौन पकड़ने वाला।  लेकिन यहाँ पर घूस खा रहे हैं साथ ही स्विट्जर्लैंड को भारत का देसी घी भी पिला रहे हो। अब यहाँ भले सूखी रोटी खा रहे हों। लेकिन देश के मलाईदार लोग ख़ुद मलाई खाने के आलावा विदेश को भी मलाई खिला रहे हैं जैसे उनका कोई क़र्ज़ खाया हो।&lt;br /&gt;      चुनाव के पहले स्विस बैंक ने खूब सुर्खियाँ बटोरी लेकिन नतीजे आते ही सबके दिमाग से स्विस का स्विच ऑफ़ हो गया। स्विस बैंक में जमा काला धन जग जाहिर हैं ।  अगर बैंक में जमा  राशि के बारे में बात किया जाए तो सबसे पहले दुनिया के सामने २००६ में रिपोर्ट आयी थी। उस रिपोर्टके मुताबिक १४५६ बिलियन डॉलरयानी करीब ७४ लाख ९८ करोड़ रूपया भारत का स्विस बैंक में जमा है। और यह राशि दुनिया के सभी देशों की जमा राशि से ज्यादा है।&lt;br /&gt;      एक मोटे अनुमान के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति डॉ। शर्मा के जमाने में इस राशि का अनुमान एक लाख करोड़ रुपया था। इसके बाद श्री के.आर.नारायण के ज़माने में अनुमान दो लाख करोड़ रूपया का था। और साल २००६ में ये राशि बढ़कर तकरीब ७५ लाख रुपये में पहुँच गयी थी। और २००९ में मार्च माह के अंत में २३ लाख करोड़ रुपये की बढोत्तरी की संभावनाएं मिली हैं। यानी भारत की लगभग ९७ लाख करोड़ रुपये स्विट्जर्लैंड मैं जमा है।&lt;br /&gt;   अब यक्ष सवाल ये उठता है की इतनी भारी भरकम राशि वहाँ पडी हुयी है इधर देश के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने  वर्ल्ड बैंक से बड़ी रकम क़र्ज़ के रूप में उठाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह रकम लगभग ४.२ अरब अमेरिकी डॉलर होगी। आर्थिक मंदी से जूझ रहे बैंक व्यवसाय को राहत पहुचाने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। अब ऐसे में यही लगता है हम कर्ज में मरेंगे क्योंकि मनमोहन सरकार कर्ज की धार से मारेगी। वैसे भी भारत वर्ल्ड बैंक का ही घी पीता रहा है । आज भी हम  मानसिक गुलामी का दंश ६० साल बाद भी झेल रहे है। और देश बहाली के बजाय बदहाली की ओर जा रहा है ऐसे में जरूरत है कि हम अपने पैसों को ही लाने की करवाई क्यों न करें जिससे कर्ज के मर्ज से बचा जा सके साथ ही काला धन भी देश में आ जाएगा इसी लिए भारत सरकार को जरूरत है कि स्विस बैंक की स्विच को ऑन करें।   &lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6058144175834895483?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6058144175834895483/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6058144175834895483' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6058144175834895483'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6058144175834895483'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/06/blog-post_18.html' title='स्विस को स्विच करो. ..'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-4097757681199272710</id><published>2009-06-11T16:03:00.002+05:30</published><updated>2009-06-11T16:47:53.078+05:30</updated><title type='text'>सीनातान कर बोलता नस्लवाद</title><content type='html'>जिस जगह को भारतीयों ने विद्या का घर बनाया। जहाँ क्रिकेट के मैदान पर चौके छक्के लगते थे। वो जगह अब नस्लवाद का ऑपरेशन थियेटर बन गया है। अब कितने आश्चर्य की बात है किजिस रंगभेद के ख़िलाफ़ अथक संघर्ष कर नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में उसका नामोनिशान मिटा डाला। और अमेरिका में अहिंसक आन्दोलन कर मार्टिन लूथर किंग ने जिसे दफ़न कर दिया। वही वर्णभेद आज आस्ट्रेलिया में अपना घिनौना सर उठाकर समूची मानवता को कलंकित कर रहा है। यह केवल भारत की ही नहीं समूचे विश्व के लिए  चिंता का विषय होना चाहिए कि आस्ट्रेलिया में रंगभेद का कोढ़ पनप रहा है।  और वहाँ भारतीय छात्रों पर लगातार हमले हो रहे हैं। इतना होने के बावजूद भी वहां की सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। और उल्टे भारतीय छात्रों से अपनी सुरक्षा का ख़ुद ध्यान रखने की सलाह दे रही है। ये बेहद गैरजिम्मेदारना रवैया है।  आस्ट्रेलिया सरकार को हर हाल में अपने यहाँ मौजूद सभी भारतीयों की सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहिए। पहले तो इस मामले पर आस्ट्रेलिया सरकार ने लीपापोती करने की कोशिश की।  लेकिन जब मामला उजागर हुआ। तो स्वीकार कर लिया कि हमारे यहाँ रंगभेद के मामले होते रहते हैं। भारतीय छात्रों पर हमला होना ये कोई पहली बार नहीं है। इसकेपहले भी भारतीयों पर हमले होते रहे है। लेकिन तब छिटपुट की घटनाएँ थी। तब भारतीय ज्यादा शिकायत भी नहीं करते थे। क्योंकि उनके अन्दर ऐसी भावना घर&lt;span class=""&gt;   कर गयी थी &lt;/span&gt;शिकायत करने से कोई कार्रवाई होती नहीं है।जो कोई भी मामले सामने आते थे उस पर कोई ध्यान  नहीं देता था।  भारत सरकार ने भी कभी ध्यान नहीं दिया। इसी के आज नतीजे हैं कि भारतीय वहां काल के गाल में समा रहे हैं।&lt;br /&gt;        &lt;br /&gt;इधर अभिनेता अमिताभ बच्चन ने आस्ट्रेलिया के एक विश्वविद्यालय से मिलाने वाली मानद उपाधि को ठुकरा दी है।  और कहा है कि जब तक मेरे देश के नागरिकों के साथ अमानवीयता हो रही है तो मेरी आत्मा मुझे उस देश से सम्मान लेने  की अनुमति नहीं दे रही है। अब ऐसे &lt;span class=""&gt;में आस्ट्रेलिया &lt;/span&gt;सरकार को होश आना चाहिए कि उसकी छवि कितनी मटियामेट हो रही है।  दुनिया नस्लवाद को नकार चुकी है। ओबामा जैसे अश्वेत नेता अमेरिका के राष्ट्रपति बन चुके है। इसके बाद अगर आस्ट्रेलिया में रंगभेद पनप रहा है तो समूची दुनिया को धिक्कार करना चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4097757681199272710?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4097757681199272710/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4097757681199272710' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4097757681199272710'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4097757681199272710'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/06/blog-post_11.html' title='सीनातान कर बोलता नस्लवाद'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3799631098899908961</id><published>2009-06-09T12:52:00.004+05:30</published><updated>2009-06-09T13:37:31.910+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ब्रिज'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सियासत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सवागत'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महँगा'/><title type='text'>सागर की छाती पर बन गया पुल</title><content type='html'>कानूनी दावं पेंच सियासी अखाडे की जंग और स्थानीय लोगों की नाराजगी झेलकर मुंबई करों के स्वागत के लिए सागर की छाती पर बांद्रावरली सी लिंक बनाकर तैयार हो गया है।  २००१ में पुल बनाने की नींव शुरू हुई थी। और २००४ में बनाकर तैयार होना था। लेकिन इस योजना को नज़र लग गयी और काम धीरे धीरे खटाई में पड़ता चला गया। चार सौ करोड़ रुपये में बनकरतैयार होने वाला ये पुल १६०० करोड़ रुपये बनकरतैयार हुआ। प्रोजेक्ट पर काम जैसे ही काम शुरू हुआ। तो सागर की अथाह गहराई की तरह अड़चने आने शुरू हों गयी।  कभी मछिमारों की मार तो कभी पर्यावरण विदों ने अड़ंगा डालते रहे। रही सही कसर सियासत भी होती रही । और नतीजे ये निकलते रहे की प्रोजेक्ट ख़ुद सागर में गोताखाने लगा। लेकिन पुल को बनाने वाली कंपनी हिन्दुस्तान कन्स्ट्रशन ने हार नहीं मानी । और सागर की अथाह गहराईको नापने के लिए आतुर रही।&lt;br /&gt;     लगभग ५० मंजिल की ईमारत की ऊंचाई पर बनाये गए इस पुल को केबल से बांधा गया है। और इसके केबल चीन से मंगाए गए हैं। एक केबल तकरीबन ८०० टन का वजन सहन कर सकता है।सात किलोमीटर के लंबे इस पुल ५.१ किलोमीटर का समुद्री मार्ग है।  इस पुल से हर दिन करीबन सवा लाख गाड़िया गुजरेंगी।&lt;br /&gt;मुसाफिरों को जो रास्ता तय करने में 40 मिनट का समय खर्च करना पड़ता था, अब यह दूरी महज 6-7 मिनट में तय की जा सकेगी। करीबन साढ़े सात किलोमीटर लम्बे इस अजूबे में ट्रैफिक का दबाव न पड़े इसके लिए इस पुल को आठ लेन का बनाया गया है। इस पुल की ऊंचाई समुद्रीय सतह से 126 मीटर से भी ज्यादा है। आम लोगों की भाषा में कहे तो मुंबई की 50 माले वाली बिल्डिंग से भी ज्यादा ऊंचा है।&lt;br /&gt;पुल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरा पुल केबल्स की मदद से बांधकर खड़ा किया गया है। पुल में लगे केबल्स चीन से मंगवाए गए हैं। करीबन 432 केबल्स द्वारा बांधे गए इस पुल को जंग से बचाने के लिए खास पेस्ट और पोलिथीन से कवर किया गया है। इसके अलावा पुल में कंक्रीट और स्टील का ही ज्यादातर इस्तेमाल किया गया है।&lt;br /&gt;           इस सुहाने सफर के लिए लोगों को अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ेगी और सरकार की कमाई भी खूब होगी। इस पुल से एक दिन में लगभग 80 लाख रुपये बतौर टोल टैक्स के रूप में मिलेंगे।एक अनुमान के मुताबिक पुल से हर दिन करीबन एक लाख तीस हजार गाड़ियां गुजरेंगी।  लेकिन मोटरसाइकिल  प्रेमियों के लिए निराशा भरी बात यह है कि इस पुल पर मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति नहीं दी गई है।क्योंकि लम्बा समुद्री पुल होने की वजह से मोटरसाइकिल चालकों के लिए यह पुल खतरनाक साबित हो सकता है जो की  तेज हवाएं और गाड़ियों की रफ्तार के चलते मोटरसाइकिल चालक का संतुलन कभी भी बिगाड़ सकती है।इस पुल से करीबन 1।30 लाख गाड़िया गुजरेंगी। एक गाड़ी से औसत टोल टैक्स 60 रुपये भी मान लिया जाए तो 78 लाख रुपये होता है इसको देखते हुए माना जा रहा है कि एक दिन में इस पुल से करीबन 80 लाख रुपये टोल टैक्स के रुप में वसूला जाएगा।&lt;br /&gt;    पुल की खासियत को देखकर आई आई बी ई ने ब्रिज को देश का सर्वश्रेष्ठ ब्रिज का एवार्ड दिया है। अब इस ब्रिज को जल्द ही आम जनता के हाथों में आ जाएगा जिससे सभी लोग ऊंचाई से सागर का नज़ारा ले सकते है। और  भारत की आधुनिक तकनीक और बुलंद इरादों के बल पर देश का पहला समुद्री पुल बनकर तैयार हो गया है। जो सागर की गहराई और आसमान की ऊंचाई नाप रहा है। सागर की छाती पर बनकर पूरे देशवासियों का तहे दिल से स्वागत कर रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3799631098899908961?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3799631098899908961/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3799631098899908961' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3799631098899908961'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3799631098899908961'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/06/blog-post_09.html' title='सागर की छाती पर बन गया पुल'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-4976014615957781102</id><published>2009-06-05T10:00:00.002+05:30</published><updated>2009-06-05T10:50:41.173+05:30</updated><title type='text'>आंकडें बाजी का खेल</title><content type='html'>आम जनता के दुखदर्द और उसकी माली हालत में आला अधिकारी कितने अवगत हैं , जो एयर कंडीशन कमरों में बैठकर कागजों पर आंकडों की फसल उगते हैं। उनमें से कितने अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने देश के धूल भरे देहातों या मलिन बस्तियों की ख़ाक छानी है। और महसूस किया है की गरीब लोग किस हालत में रहते हैं। महंगाई की चक्की में पिसते , दुर्दशा और अभाव में जैसे तैसे रोते झींकते जीवन बिताते गरीब को सिर पर छप्पर और दो वक्त का भोजन भी मुश्किल से नसीब होता है।   गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वालों की आबादी करोड़ों में है। लेकिन हमारे यहाँ के नौकरशाहों की इसकी कोई चिंता नहीं है। अब तो सर्वे भी कहता है भारत के नौकरशाह सबसे आलसी हैं। ऐसे कई सरकारी संगठन हैं जिनका काम है सरकार को आंकडे उपलब्ध कराना जिससे सरकार अग्रिम योजनाओं को क्रियान्वित कर सके।  लेकिन ये आंकडे कितने सही है या वास्तविकता के करीब हैं इसपर भी बहस हो सकती है। और सरकार है की इन आंकडों को भी सही मान लेती है । आंकडों का खेल करने वाले बड़े - बड़े विशेषज्ञों का आंकलन कितना सटीक होता है इसे लेकर संदेह हो सकता है। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन यानी सी एस ओ ने देश के प्रति व्यक्ति की मासिक आय तीन हाजार रुपये  से भी अधिक बताई है। लेकिन सच्चाई ये है की साल १९९९-२००० के स्थिर मूल्य पर २००० रुपये से  कुछ ही अधिक है।  अब यह कितनी अजीब बात है कि सभी वास्तविक  गणनाओं का आंकलन साल १९९९-२००० के स्थिर मूल्य के आधार पर किया जाता है। वरतमान मूल्यों के आधार पर नहीं।  अब आप भी आंकलन कीजिये कि एक दशक पहले के आधार पर किया गया आंकलन  कितना सटीक हो सकता है। वर्त्तमान मूल्यों के आधार पर तो सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृधि १४.२ बैठती फीसदी है। इसी तरह प्रति व्यक्ति आय वर्तमान मूल्यों के आधार पर ३७४९० रुपये वार्षिक हो गयी। स्थिर मूल्यों पर यह अभी भी २५४९४ रुपये वार्षिक यानी २१२४ रुपये मासिक चल रही है। आंकडों का यह मायाजाल उस वर्ग के लिए ठीक है जिन्हें वेतन भत्ता वृद्धि और बदलते वेतनमान का लाभ मिलता है।वेतन आयोग की सिफारिशें आम गरीब के लिए कोई मायने नहीं रखती हैं।  इसके विपरीत इसके फलस्वरूप बाज़ार में अधिक पैसा पहुँचने से महंगाई बढ़ जाती है। जिससे गरीब दुखी और बेबस हो जाता है। और आज आज़ादी के  ६१ साल बीत जाने के बाद भी गरीब जस के तस हैं हाँ चुनाव जब भी आते है तो गरीबों को मोहरा बनाकर मुद्दे तय होते है। नतीजा ये निकालता है कि उन्हें सस्ते दाम पर गेहूं चावल देने का भरोसा दिया जाता है और नौकरशाह और राजनेता मलाई खाते है। आखिर क्या आंकड़े सरकार इसी लिए मंगाती है कि गेहूं चावल ही देते रहें। और मलाई मिलाती रहे धन्य हैं ये आंकडे। और धन्य है आंकडों का खेल।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4976014615957781102?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4976014615957781102/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4976014615957781102' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4976014615957781102'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4976014615957781102'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='आंकडें बाजी का खेल'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-7475809139755130798</id><published>2009-05-28T11:03:00.004+05:30</published><updated>2009-05-28T11:42:24.422+05:30</updated><title type='text'>मुंबई की सुरक्षा में छेद</title><content type='html'>भारत को मनमोहनी सरकार फ़िर से मिल गयी। लेकिन देश को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर एक नयी दिशा व दशा तय करनी होगी। आतंक से जूझ रहे देश को सबसे पहले श्रीलंका से सबक लेकर आतंक की लहलहाती फसल को जड़ से काटना होगा। सबसे ज्यादा आतंक का घिनौनी खेल मुंबई ने देखा है । अगर मुंबई की बात की जाए तो मुंबई न केवल  अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बड़ा शहर है।बल्कि देश की आर्थिक राजधानी भी है।  लेकिन कानून व्यवस्था के ढीलेपन की वजह से हालत बिल्कुल लावारिश मालुम पड़ती है। आतंक, बमबारी, अपराधी गिरोह सभी ने इसका सुख चैन छीन लिया है। सहसा ऐसी वारदात हो जाती है की लोग सिहर उठाते हैं।  और भगवान भरोसे मुंबई रहती है। कानून के रखवाले कुम्भकरण की नींद में सो रहे हैं या फ़िर अपराधियों से मिलीभगत है ? कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है की मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय विमानतल के कार्गो टर्मिनल से दिनदहाडे चार नकाबपोश लुटेरे १०० किलो सोना चांदीभरे बॉक्स लूट ले जायेंगे। ऐसा द्रश्य अगर किसी फ़िल्म में दिखाई देता तो शायद स्क्रिप्ट राईटर की कल्पना की उड़ान मान लेते। लेकिन वास्तव में जब ऐसी दुस्साहसिक लूट होती है तो वाकईअचम्भा होता है। एअरपोर्ट की सुरक्षा को भेदकर लुटेरे लूट कर चंपत हो गए.आतंक के साए  की वजह से एअरपोर्ट में भारी चौकसी रहती है। और वहाँ जांच पड़ताल के चलते पंछीभी पर नहीं मार सकता है। ऐसे में सवाल यह उठता है की ये लुटेरे वहाँ तक कैसे पहुँच गए। उनसे कोई पूछताछ कैसे नहीं हुई। एअरपोर्ट हाई सिक्योरिटी ज़ोन में आता हैं। कोई बस अड्डा नहीं की टहलते टहलते चाहे जो कोई पहुँच जाए। जिस तरह से लूटेरोंने  लूट को अंजाम दिया है उससे यही लगता है की किसी के आंखों से काजल चुराने वाली बात है। क्योंके एक सामान्य यात्री को कई सुरक्षा घेरों से निकला होता है। मुंबई में सुरक्षा के नाम पर पहले भी कई छेद देखे गए है। और इसकी कीमत मुम्बई करों  को जान देकर चुकानी पड़ी। अभी आतंक के छर्रे खाया घायल ताज कराह रहा है। की एक बार फ़िर सुरक्षा व्यवस्था तार तार हो गयी। आख़िर मुंबई की सुरक्षा पर कब बंद होगा छेद,अमनचैन के लुटेरों को कब तक मिलेगी छूट , और कब सागर की अथाह गहराई नापने वाले मुंबई को मिलेगी चैन।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-7475809139755130798?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/7475809139755130798/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=7475809139755130798' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7475809139755130798'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7475809139755130798'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='मुंबई की सुरक्षा में छेद'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-1067229602526529875</id><published>2009-03-07T01:22:00.001+05:30</published><updated>2009-03-07T01:32:39.256+05:30</updated><title type='text'>मुंबई का सियासी गलियारा</title><content type='html'>चुनाव का यानी निर्वाचन आयोग ने जैसे ही चुनाव का घंटा बजाया. सभी राज नेता घंटा सुनते ही गंभीर हो गए. मुंबई में तो धनुष बाण हमेशा कमल पर निशाना साध रहा था. लेकिन चुनावी बिगुल बजाते ही धनुष पर कमल खिल गया.. हालाँकि अभी भी दोनों के बीच घमासान जारी है. महाराष्ट्र राज्य के मुंबई में छः लोकसभा सीटें है. १. उत्तर मुंबई (दहिसर, बोरीवली , कांदिवली, मलाड) २. उत्तर पशिम मुंबई ( जोगेश्वरी, दिन्दोशी ,गोरेगावों,वर्शोवा,अँधेरी) ३. उत्तर पूर्व मुंबई (मुलुंड, विक्रोली,भांडुप, शिवाजी नगर,और घाटकोपर)४. दक्षिण मुंबई (वरली,शिवादी, भायखला,मालाबार हिल,कोलाबा मुम्बा देवी.)५. दक्षिण मध्य मुंबई ( अणुशक्ति नगर ,चेम्बूर, धारावी, कोलीवाडा, महिम, सायन) ६. उत्तर मध्य मुंबई ( कुर्ला, बंदर, कलिना, विलेपार्ले) इन सभी में से पांच सीटों पर हाथ का कब्जा था. लेकिन एस बार हाथ और घडी दोनों बराबरी के हक़ पर ताल ठोंक रहे हैं. कांग्रेस और एनसीपी , सपा ,बसपा के पास उत्तर भारतीय वोट हैं. जिसमे सपा और बसपा तो केवल उत्तर भारतीयों के भरोसे है. जबकि शिवसेना और भाजपा के उत्तर भारतीय वोट के मराठी वोट सबसे ज्यादा है. राज्य में नए परिसीमन के तहत चुनाव हो रहे हैं. लिहाजा सभी दिग्गज नेताओं का चुनावी अखाडा बदल गया है. मुंबई और उससे सटे ठाणे जिले में एक करोड़ ५८ लाख सात हजार ६५२ मतदाता हैं.राज्य में ठाणे लोकसभा सीट सबसे बड़ी है. जिसमे १७ लाख ८८ हजार ५०० मतदाता हैं. मुंबई की हर एक सीट पर दिग्गज ही दिग्गज ताल ठोंक रहे हैं. उत्तर पश्चिम मुंबई से सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी चुनाव लड़ने का एलन कर चुके हैं. जबकि पिचली बार इस सीट से प्रिया दत्त संसद रह चुकी थी. लेकिन एस बार एस सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष कृपा शंकर सिंह भाग्य अजमाना चाहते हैं. इस सीट पर अभी से ही कांटे के सामान टक्कर होने की उम्मीद बढ़ गयी है. उधर चुनावी क्षेत्र के बंटवारे से सभी राजनेता अपने अपने समीकरण बैठने में जुटे हुए हैं. अगर नए गणित का आंकला करे तो भाजपा सबसे ज्यादा फायदे में दिख रही हैं. कई सीटों पर भाजपा की सीट मजबूत दिख रही है जैसे उत्तर मुंबई सीट इस सीट पर गोविंदा संसद थे. लेकिन जनता तो अपने संसद के कभी दर्शन नहीं कर पायी लिहाजा फिर से जनता अपने पुराने नेता राम नाईक को चुन सकते है, उधर उत्तर पूर्व मुंबई से भाजपा के संभावित उम्मेदवार किरीट सोम्या को बेहद फायदा पहुंचेगा. शिवसेना भाजपा का गठबंधन भी गठजोड़ के बजाय गठ्तोड़ नज़र आ रहा है. दक्षिण मुंबई सीट पर शिवसेना ने दावा ठोंका है लेकिन भाजपा दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की बेटी प्पोंं महाजन को मैदान में उतरना चाहती है. केंद्र में यू पीए को समर्थन करने वाली सपा के उम्मेदवार उतरने से कांटे की टक्कर मुंबई में पैदा हो जायेगी. इधर बसपा भी बाहुबली नेताओं के तलाश में जुट गयी है. बसपा प्रदेशध्यक्ष ने बसपा अरुण गवली के शामिल होने की खबर दी है. ऐसे में जिश तरह से बहन जी ने यूपी में बाहुबली को मैदान में उतर रही है वैसे ही महाराष्ट्र में भी हांथी पर बाहुबली सवार हो रहे हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-1067229602526529875?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/1067229602526529875/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=1067229602526529875' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1067229602526529875'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1067229602526529875'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2009/03/blog-post.html' title='मुंबई का सियासी गलियारा'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-876140809661491383</id><published>2008-12-22T11:44:00.004+05:30</published><updated>2008-12-22T12:10:25.326+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='काम धंधा बहक जाना'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सरकार'/><title type='text'>हाय रे मनमोहन ये तूने क्या किया</title><content type='html'>यूं पी ऐ सरकार के गठन के बाद मनमोहन सरकार महंगाई के आंच से झुलस रही थी। इसके बाद मंदी का दीमक लग गया। अभी सरकार को दीमक खा रहा था कि बीच में आतंकी छर्रे भी खाने पड़े। इन ढेर साडी समस्याओं से पीड़ित होकर सरकार ने सोचा कि अब सत्ता का भोग दोबारा मिलाना मुश्किल है। लेकिन जैसे ही विधान सभा चुनाव में नतीजे अच्छे निकले। तो मनमोहन सरकार को आस जगी और आनन् फानन में लम्बी लम्बी घोशनाएँ करना शुरू कर दिया जैसे मंदी से निपटने के लिए बैंकों को रहत पॅकेज होम लोन में ब्याज डरघटाकर बहार लाना। नौकरी के दौरान निकले गए कर्मचारियों को ६ महीने का वेतन दिलाना।&lt;br /&gt;सरकार ने घोषणाओं का अम्बर लगा दिया। लेकिन मेरे हिसाब से घाव कहीं और है और मरहम कहीं और लगाया जा रहा है। जैसे आवासीय पॅकेज में सरकार ने २० लाख लोन तक में ब्याज दर घटी हैं। लेकिन मुंबई ठाणे जैसे शहरों में तो २० लाख से ऊपर का माकन मिलाता नहीं है। बिल्डर बंधू दाम घटने के मूड में नहीं हैं। मकान बीके या नहीं। उल्टे ग्राहकों को लुभाने के लिए स्कीम और चला दी है वो भी दाम बढाकर । तब तो होम लोन का तो फायदा मिलाने से रहा। अब दूसरी बात मंदी से निपटने के लिए कर्मचारिओं की छंटनी पर ६ महीने का वेतन दिया जाए। उसमे भी शर्त रख दी गयी के कंम्पनी में पाँच साल तक काम कर चुका हो। अब मैं यहांं पर ये बताना चाहता हूँ कि पाँच साल का मतलब बाजपेयी की सरकर में नौकरी लगी और मनमोहन की सरकार में मरहम मिला रहा है जबकि असलियत ये है के जितना मनमोहन सरकार में प्राइवेट सेक्टर में उफान आया है उतना बाजपेयी सरकार में नहीं आया था॥ और लोग मनमोहन सरकार में ही ज्यादातर कम्पनियों में जों हुए हैं।&lt;br /&gt;यानी कि आप्कावे ज़माने में जो भरती हुए हैं वो तो बेचारे नीबू नमक ही चटाकर रह जायेंगे। और जो बाजपेयी सरकार में शामिल हुए उनकी तो बहार है।&lt;br /&gt;अब में यही कह रहा हूँ कि हे मनमोहन सरकार ये आपने क्या किया । थोड़ा बहुत तो आप अपने काम काज को परख लें । आप क्या कर रहे है और इधर काया हो रहः है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-876140809661491383?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/876140809661491383/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=876140809661491383' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/876140809661491383'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/876140809661491383'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/12/blog-post_22.html' title='हाय रे मनमोहन ये तूने क्या किया'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-3621866957816097891</id><published>2008-12-11T10:54:00.003+05:30</published><updated>2008-12-11T11:21:21.127+05:30</updated><title type='text'>लोकल ट्रेन में इंसानी फाटक</title><content type='html'>मुंबई की लोकल ट्रेन में अब इंसानी फाटक लगे हुए हैं। ये फाटक न तो सरकार ने लगवाया है और न ही लोकल को सबसे ज्यादा रकम देने वाले वर्ल्ड बैंक ने लगवाया है। बल्कि उसमे रोजाना भेड़ बकरी की तरह यात्रा करने वाले यात्री ही अड़ जाते हैं।&lt;br /&gt;यूँ तो मुंबई में मैं पिछले कई सालों से पटखनी खाए पड़ा हुआ हूँ। और लोकल ट्रेन का मेरे साथ चोली दमन का रिश्ता है। इसलिए जब से मैंने मुसाफिरी करना शुरू किया है। तब से देख रहा हूँ कि लोकल ट्रेन में फाटक नहीं लगे हैं , जो भी यात्री होते हैं वो विण्डो शीत तलाशते हैं या फ़िर गेट में डटकर खड़े हो जाते हैं। ये लोग ४ से ५-६ यात्री होते है। और फ़िर फाटक की तरह काम करते है। फाटक में दो पल्ले होते हैं। जैसे ही स्टेशन आता है तो एक पल्ला खुल जाता है , जबकि दूसरा बंद रहता है। खुलने वाला पल्ला या तो स्टेशन में धंस जाता है, या फ़िर कुछ पल्ले ट्रेन में छिपकली की तरह चिपक जाते है। और तब बांकी लोग चढ़नाशुरू कर देते हैं। फ़िर जैसे ही ट्रेन चलती है तो फ़िर से दोनों पल्ले बंद हो जाते हैं। ट्रेन स्पीड पकड़ती है तो पल्ले नीचे ऊपर हिलने लगते हैं जब कि पल्ले के अन्दर के यात्रियों की हड्डियाँ राग भैरवी गाने लगाती है। कोई चिल्लाता है उफ , कोई कहता हाँथ हटा ,कोई कहता है हाथ ऊपर कर। इतना करते करते स्टेशन आ जाता है। और फ़िर पल्ले खुल जाते हैं और यात्री भरभरा कर स्टेशन पर कूद पड़ते हैं।&lt;br /&gt;इस तरह से मैंने देखा कि भारतीय लोकल रेल में कैसे हड्डी मांस के फाटक लगे हुए हैं , जिस्म के इस फाटक में अन्दर भी जिस्म ही कैद है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3621866957816097891?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3621866957816097891/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3621866957816097891' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3621866957816097891'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3621866957816097891'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/12/blog-post_11.html' title='लोकल ट्रेन में इंसानी फाटक'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6575031313468099017</id><published>2008-12-05T11:18:00.004+05:30</published><updated>2008-12-08T10:39:58.069+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='raksha'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नेता'/><title type='text'>हमें अपनी चिंता है</title><content type='html'>आज देश का आम नागरिक अपनी कमाई से एक चौकीदार भी रखने में हिचकता है। लेकिन हमारे लोकतंत्र के पुजारी एन एस जी को अपनी हिफज्ज़त में लगाने के लिए बिल्कुल भी नहीं हिचकते हैं। २६ नवम्बर को मुंबई में समुद्री रस्ते से आतंकी ज़हर घुल गया।फ़िर कितने बेगुनाहों का खून बह गया। कितने निहत्थे जजन गवां कर चले गए। इसके &lt;span class=""&gt;बाद एन एस जी &lt;/span&gt;ने कमान सभाली और और आतंकियों के चंगुल से मुंबई को मुक्त करा दिया। लेकिन इसके बाद जो नेताओं को एन एस जी का चस्का लगा है की अब अपनी हिफाजत के एन एस जी लेकर चलेगें। पहले भी एक जेड प्लस सुरक्षा पाए नेता को २० से २५ जवान लगते थे। जरूरत पड़ी तो ५० से १०० तक बढ़ा लिया।यानी की हमें अपनी पड़ी है। जिसके टैक्स का पैसा लेकर आराम फरमा रहे है, उन्हें एन एस जी देने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें तो बस हमेश सड़क पर खून बहाना होगा।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;सन १९८५ में एन एस जी का गाथा किया गया था। आतंकवाद से निपटने के लिए,बंधकों को छुडाने के लिए, सरहद पर लड़ने के लिए। लेकिन बुध्जीवी नेताओं ने एन एस जी से क्या कम लेना शुरू किया आप भी देख लीजिये । ८७ के बाद से ही इसमे राजनीतिक जमा चढाने लगा था। और फ़िर चुनाव के समय सभाओं की रखवाली करना,लडाई झगडे में मोर्चा संभालना ऐसे तमाम धंधे पर लगा दिया। और केवल सरकार की हिफाज़त कराने में सुरक्छा के प्रति सालाना १८ करोड़ रूपये खर्च हो जाते है। ये खर्च केवल देश के ३० नेताओं पर होता है। यानी की नेता जी को सलाम कराने में ही करोड़ों बह जाते हैं। और जनता का खून सड़क पर बहता है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;अब बात समझ में आ गयी होगी की एन एस जी कैसे हो गयी है नेता security gaurd । क्या  नेताओं को आज सुरक्षा की ज़रूरत है। एक तरफ़ तो महोदय कहतें हैं की नेताओं का काम नहीं है लड़ना , यानी की देश की हिफाज़त के लिए सेना का जवान ही मरेगा।  नेता नहीं जायेंगे.अब ऐसे में यक्ष सवाल मेरा ये है की क्या इन्हे सत्ता में बने रहने का अधिकार है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6575031313468099017?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6575031313468099017/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6575031313468099017' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6575031313468099017'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6575031313468099017'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/12/blog-post.html' title='हमें अपनी चिंता है'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-1791735413703169187</id><published>2008-09-11T10:58:00.003+05:30</published><updated>2008-09-11T12:10:57.456+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मराठी'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राज'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रेम'/><title type='text'>राज ठाकरे की राजनीति</title><content type='html'>&lt;p&gt;महाराष्ट्र में राजनीतिक ज़मीन तलाश रही महाराष्ट्र नव निर्माण सेना रास्ता भटक चुकी है। अपनी पहचान बनने के लिया जो मन में आया वही मनमानी शुरू कर दी। मराठी अस्मिता की लडाई लड़ने वाले राज ठाकरे से बढाकर शायद ही कोई ढोंगी बिल्ला इस दुनिया में मिले। जिसे हमेश मराठी का भूत स्वर रहता है। उसके ज़बान में मराठी भाषा है, लेकिन दिल में कोई और भाषा है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;कहते हैं की बालक प्रथम पाठशाला मांहोती है। और बाद में उसका स्कूल। मराठी रोटी खाने वालर राज ठाकरे अन्दर से जर्मन की रोटी खाते हैं। ये सुनकर आपको भी ताज्जुब होगा की जो व्यक्ति मराठी भाषा के लिए स्कूल में तोड़फोड़ करता है। और कहता है की केवल मराठी भाषा पढो। वहीं पर राज ठाकरे के बेटे अमित ने जर्मन भाष को चुना है। ग्यारहवीं में पढ़ने वाले अमित को मराठी भाष ज्यादा रास नहीं आयी। सूत्रों से जानकारी मिली है की अमित की मां ने ही अमित को जर्मन भाषा में पढ़ने के लिए सलाह दी है। अब इसका निचोस यह निकालता है की जिस परिवार में केवल मराठी के आलावा कुछ नहें सूझता वहाँ मराठी भाषा ही हाशिये पर है। अब आप भी ख़ुद विचार विमर्श कीजियेगा की मराठी के लिए कौन लड़ रहा है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;अब इस पूरे मामले में मिझे यही समझ आ रहा है की राज ठाकरे को ख़ुद मराठी भाषा में भरोषा नहें है। वो जानते है की मराठी भाषा का कार्ड लम्बी पारी के लिए नहीं खेला जा सकता है। केवल सुर्खियों में आने के लिए यही एक हथियार है , हमेश एक ब्रेकिंग न्यूज़ बने रहो। लेकिन ऐसे सोंच वाले नेता क्या करेंगे । आजाद भारत में नेताओं की कोई जाती नहें होती, कोई मज़हब नहें होता, कोई धरम नही होता। क्या वो अगर कल नेता होगा तो केवल मराठी भाषियों का ही भरण पोषण करेगा। हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों ने केवल जाती की लडाई नहें लड़ीउनकी ऐसे सोंच नहीं रही की केवल मराठी को आजाद कर दो, बांकी को गुलाम रखो,या पंजाब को आजाद करो, बांकी पर राज करो। उन्होंने पूरे भारत के लिए लडाई लड़ी है। तो कम से कम उनसे कुछ तो सीख लो, उनकी लाज बचा लो। आब बात भाषा की है तो क्या सेनानियों मराठी भाषा का इस्लेमाल नहीं क्या, काया उन्होंने अंग्रेजी नहीं बोली, क्या हिन्दी का इस्तेमाल नहें हुआ तो फ़िर लडाई किस बात की। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;अब रही बात जाया बच्चन के बोलने पर तो जहाँ पर सब कोई अंग्रजी में बोल रहे थे अगर वहां पर कोई हिन्दी में बोल देता है तो जुर्म कर दिया। बल्कि राष्ट्र का सम्मान किया। ऐसे में नेताओं को समझन होगा की मराठी को आदे हनथो क्यों ले रहे हो। कल गुजराती भी जहेगा की गुज़राती भाषा का अपमान हुआ है, अंग्रेजी वाला कहेगा अंगरेजी का अपमान हुआ है। बंगाली कहेगा बंगाल का अपमान हुआ है। आख़िर यी तेताओं की कौन सी समझदारी है। यी समझदारी अभी तक मुझे समझ में नहें आ रही है। सवाल ये उठता है की क्या महाराष्ट्र नव निर्माण सेना पहले महाराष्ट्र में तोड़फोड़ करेगी , भाईचारे की भावना में जहर घोलिएगी, फ़िर इसके बाद महाराष्ट्र में नव निर्माण करेगी । राज ठाकरे बेटे को जर्मन सिखा रहे है मतलब वो मकल का भविष्य जर्मन में तलाश रहें है, तो गिर आने वाले समय में मरथिई कौन बोलेगा ॥ आप्काके घर में मराठी का भविष्य क्या होगा, ये मनसे के कार्यकर्ताओं को तलाशना होगा। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-1791735413703169187?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/1791735413703169187/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=1791735413703169187' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1791735413703169187'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1791735413703169187'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/09/blog-post.html' title='राज ठाकरे की राजनीति'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-780662816938764469</id><published>2008-08-06T03:54:00.003+05:30</published><updated>2008-08-06T04:38:40.936+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नोट करे सब chont'/><title type='text'>लोकसभा बिकाऊँ है खरीदोगे ?</title><content type='html'>सरकार गिराने बचाने के खेल का आखिरकार पटाक्षेप हो गया। विरोधी औंधेमुंह गिरे,लेफ्ट में मातम पसर गया। और सत्ताधारियों ने बाजी मार ली। लेकिन इस  पूरे खेल में जैसी - जैसी चलें चली गयीं।जैसे - जैसे हथकंडे अपनाए गए।उसने जनतंत्र में जोड़तोड़ का नंगा सच बेनकाब कर दिया।कुर्शी के इस खेल में कौन कितने फायदे में। और कितने नुकसान में ये अलग मुद्दा है। लेकिन एक बात जो उभरकर जो सामने आयी है , वो ये है कि हमाम में सब नंगे हैं।&lt;br /&gt;यानी कि लोकतंत्र के आस्था के इस मन्दिर में भक्तों के ऊपर करोड़ों रूपये का चढावा चढ़ता है। दुनिया के सबसे बडें लोकतंत्र के लिए ये विडम्बना ही कही जायेगी कि जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि नुमाइंदे खुले बाज़ार में अपनी कीमत ऐसी लगा रहे हैं ।   जैसे वे व्यावसायिक बाज़ार में बिकने का कोई प्रोडक्ट बन गए हों। मंडी सज चुकी थी। सरकार बनाने की  सांसे चल रही थी। कि लोकसभा के इस मन्दिर में वोट की जगह नोट की गड्डियां लहराई जाने लगी।  मन्दिर शर्मसार हो गया। पुजारियों में कहीं बयानबाजी , तो कहीं उल्लास तो कहीं सन्नाटा पसर गया। और जनता को शर्म से पानी- पानी होने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा। ऐबी  वर्धन ने जब से कहा कि २५- २५ करोड़ रुपये में खरीद जारी है। तब से ही उम्मीद जग गयी थी कि रुपयों की बहार है। दरअसल न्यूक्लियर डील के पहले एक डील आपस में हुई।  जब उस डील की गांठे कमजोर पड़ गयीं। तो मन्दिर में नोटों की गड्डियों की  बहार आ गयी। और फ़िर इसके बाद एक के बाद गद्दे थैले से बहार निकलकर पुजारी वाहवाही लूट रहे थे। और अपने आपको श्रेष्ठ नुमाइंदे होने का खिताब मँगाने लगे। अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतनी भरी रकम आती कहाँ से है? और अगर आती भी है तो देने वाले देते क्यों है? इन सभी सवालों के जवाब सत्ता के उन दलालों के पास होता है । जिनका संबंध राजनैतिक दलों के साथ साथ उन धन्ना सेठों से होता है। जो पैसे तो देते हैं , लेकिन किसी शर्त पर। देश के ये धन्ना सेठ होते हैं कारपोरेट घरानों के महारथी। सभी घरानों  की किसी न किसी राजनैतिक दल के साथ के संत-गांठ होती है। हालाँकि सभी राजनैतिक पार्टियां जानती हैं कि कौन सा घराना किसके साथ है। लेकिन कोई भी इस अवैध संबंध को उजागर नहें करना चाहता है। वज़ह ये है कि सभी इस संबंध में भागीदार हैं। अब ऐसे में डर इस बात का सता रहा है कि कहीं ये बिकाऊँ प्रोडक्ट इस बात का नारा न बुलंद कर दे कि लोकसभा बेंचना है खरीदोगे ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-780662816938764469?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/780662816938764469/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=780662816938764469' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/780662816938764469'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/780662816938764469'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='लोकसभा बिकाऊँ है खरीदोगे ?'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-739812534874056229</id><published>2008-06-28T00:19:00.003+05:30</published><updated>2008-06-28T00:37:46.411+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मीठी मिर्ची'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उत्साह'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट'/><title type='text'>८३ के बाद खर-खर बात</title><content type='html'>२५ साल पहले जब लार्ड्स के मैदान पर भारतीय टीम उतारी थी, तो उनके सामने चुनौती थी वेस्टइंडीज की बादशाहत को ख़त्म कराने की। और महज़ एक घंटे में कपिल की सेना ने एक ऐसा इतिहास रच दिया जो आज अतीत के पन्नो में याद किया जाता है। इसके बाद हमने बता दिया किक्रिकेट अब अंग्रेजों की उजाली नफासत का खेल नहीं हैं। वो ठेठ भारतीय रंगों में डूबा ऐसा तमाशा है, जिसमे रनों के ढोल के बजाते हैं। जैसे - जैसे विश्व कपकी उम्र बढ़ने लगी। बी.सी.सी.आई.मालामाल होने लगी। वो रुपयों की गठरी बनता गया जिसे दो कदम चलाना भी मुश्किल हो गया। कोंच भी लातेथे। ढोल नगाडे के साथ स्वागत करते थे, लेकिन वो कोच टीम को जितने के बजायतोड़कर चला गया। इसके बाद हमने विश्व कप जीतने का भरसक प्रयाश किया लेकिन ये कप भारत के लिए गूगली की तरह आया। और वाइड बाल की तरह निकल गया। इस दौरान कई उतार चढाव भी हमने देखे, टीम बदल गयी, सेनापति बदल गया।  ज़माना बदल गया। जो नहीं बदली वो थी हमारी सोंच। यानी अगर एस २५ साल के सफर में कोई प्रतीक के रूप में खोजना चाहे तो हम पाएंगे कि हमें अपनी भारतीयता पर भी भरोसा नहें रहा। शायद यही वज़ह रही हम विदेशी कोच खोज़ने से लेकर विदेशी अंदाज़ अपनाने तक एक सी दरिद्रता दिखाते रहे। लेकिन अब हमें समझाना होगा कि आखिर हम क्यों चुके। वो कौन सी चीज़ है जो हमें बार- बार ताज पहनने से रोंकती हैं। जिस दिन हम ये पहेली सुलझा लेंगे उस दिन दुनिया में हमारा ज़वाब नही होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-739812534874056229?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/739812534874056229/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=739812534874056229' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/739812534874056229'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/739812534874056229'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/06/blog-post_28.html' title='८३ के बाद खर-खर बात'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5616531051023525513</id><published>2008-06-09T21:35:00.002+05:30</published><updated>2008-06-09T21:48:41.574+05:30</updated><title type='text'>फाटक का खुल गया फाटक</title><content type='html'>बारिश शुरू होने के पहले मुम्बई महानगरपालिका ने दावों की पोटली बांधकर मुम्बई करों थमा दिया। लेकिन जैसे ही बारिश शुरू हुई। पोटली नाले में बह गयी.दरशल मुम्बई महानगर पालिका के आयुक्त जयराज फाटक ने दावा किया था। कि मुम्बई में जल जमाव नही होगा। और शायद महानगर पालिका ने ये समझकर दावा किया था कि बारिश के रिमोट महानगर पालिका के पास है। लेकिन जैसे ही इन्द्र देवता गरजे कि मुम्बई करों में खतरों के बदल मंडराने लगे । लिचले इलाकों कि सडकों और नाले एक साथ मिल गए। सड़क यातायात अस्त व्यस्त हो गया। और महानगर पालिका की सारी व्य्व्स्थाये चरमरा गयी। घरों में ४ से ५-६ फीट पानी भर गया। और मुम्बैकर जान बचने के लिए ठिकाना ढूँढते हैं। रेल की रफ्तार धीमी पड़ गयी। और सडकों में पैदल चलाना तक मुश्किल हो गया। हालत यहं तक पहुँच गए कि दुर्घतानाये भी हो गयी। हिंद्मता सायन परेल माटुंगा जैसे इलाके पाने से भर गए।&lt;br /&gt;   फिलहाल अभी तक जीतनी मुम्बई में बारिश हुई है उसका दस फीसदी बारिश आ चुकी है। और पहली बारिश में मनापा के सरे डेव बह गए। मीठी नदी उफान मरने लगी। ऐसे में अब मनापा को जरूरत है कि फ़िर से दावों को अमली जामा पहनाने कि। ताकि बारिश से मनापा अपने आपको धुलने से बचा सके।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5616531051023525513?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5616531051023525513/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5616531051023525513' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5616531051023525513'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5616531051023525513'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/06/blog-post_09.html' title='फाटक का खुल गया फाटक'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-7358979935778534761</id><published>2008-06-01T00:45:00.005+05:30</published><updated>2008-06-01T06:50:37.513+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आई पी एल तड़का और नैतिकता'/><title type='text'>हाय रे चला गया सबका बाप ...</title><content type='html'>.... तेरा बाप कौन है- तेरा बाप कौन है यही सवाल बार बार उठता रहा और बेटा जवाब देता रहा कि एक दिन मेरा बाप जरूर आयेगा। और वो एक दिन आ गया । वो दिन था १८ अप्रैल। और संदेश दिया गया कि मनोरंजन का बाप डी एल एफ आई पी एल  आगया । और अब वो एक जून को विदा होगया।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;इस बाप ने भारत में तकरीबन डेढ़ महीने तक मुशाफिरी की। और इसका भूत इस कदर छाया कि कोई नहीं बच पाया। सबको लील गया। मैं ख़ुद लाख कोशिश करता रहा कि आई पी एल के भूत से दूर रहूँगा , लेकिन रोजी रोटी के चक्कर में आई पी एल के आगोश में मैं भी समां गया। मीडिया को तोपूरे महीने आई पी एल का भूत सवार रहा। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;दरअसल इस बाप का बाप है ललित मोदी । जिसने कारोबार की द्रष्टि से आई पी एल को पैदा किया। और फ़िर चीयर लीडर्स ने उसमे और तड़का लगा दिया। और तड़का ऐसा लगा कि बांकी के सीरियल जैसे सास बहू और तमाम सरिअल की बैंड बजा गयी  . टैम मीडिया रिसर्च की माने तो शाहरूख की टीम कोलकाता  और माल्या की टीम बेन्गुलुरू के बीच खेले गए पहले आई पी एल मैच में व्यूअर्शिप आठ से ऊपर पहुँच गयी थी। जबकि सुपर हिट सीरियल की &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;व्यूर्शिप पाँच के आस पास रहती है। जाहिर है आई पी एल सास बहू जैसे सेरियलों को पछाड़ दिया है। जनता क्रिकेट का तड़का देख रही है। आई पी एल की भूख थी और बाज़ार की मांग रही होगी कि इस टूर्नामेंट में तड़का लगना चाहिए। सो अमेरिका से चीयर लीडर्स को न्यौता दे दिया गया। लेकिन आई पी एल मैच के दौरान मुम्बई के कुछ नेताओं को चीयर लीडर्स की भंगिमाओं में एतराज हुआ। उन्हें नाचने वाली लड़कियों की छोटी - छोटी चाद्दियाँ और चोलियों में नाच की भाव भंगिमाएँ रास नहीं आयी। आखिर इन्ही नेताओं ने तो ही मुम्बई की बार बालाओं पर पाबन्दी लगवाई थी। बार बलाये तो फ़िर भी बार के हाल में नाचती थी। लेकिन ये चीयर लीडर्स खुले स्टेडियम में नाच रहीं हैं। नातों को नतिक बोध की चोंट लगी। और फ़िर उन्होंने पुलिस से कहा कि ये नंगा नाच नहीं चलेगा। कुछ ने विधान सभा में आवाज़ उठाई। पुलिस ने आदेश दे दिया कि चीयर लीडर्स को आचार संहिता के मुताबिक ही कपडे पहने होंगे। यहाँ ऊंचे पैंट और उरेजों का विभाजन दिखाने वाली चोलियाँ नहीं चलेगी। यानी मुम्बई पुलिस और नेता जिसे अश्लील समझते थे उस पर पाबंदी लग गयी। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;वहीं टूर्नामेंट के दौरान एक ख़बर आयी कि आई पी एल कमिश्नर ललित मोदी सार्वजनिक स्थान में सिगरेट पी रहे थे। पुलिश में शिकायत भी दर्ज कर दी गयी। लेकिन भाई समझाना होगा कि बी सी सी आई के सामने आई सी सी भी पानी भारती है। तो फ़िर तुम किस खेत की मूली हो। अभी और किस्सा सामने आ गया कि रात दस बजे के बाद चीयर लीडर्स नाचेंगी नहीं। तो फ़िर भाई अभी तक क्यों बैंड बजवा रहे थे। क्या वो चीयर लीडर्स को देखकर भूल गए थे। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;खैर कुछ भी हो । अब तो चैनल भी बार-बार चेयर लीडर्स पर ही ब्रेक लेते थे। अख़बार में क्रिकेटरों की जगह चीयर लीडर्स की फोटो छपती थी। अब सवाल ये उठता है कि क्या बाज़ार को देख कर रंग बदल गया है। क्या भारतीय समाज अब सिर्फ़ यूरोप के बजारू मूल्यों के सामने गिरवी रखने के लिए ही बचा है। या हमारा मीडिया ही बाज़ार का चीयर लीडर हो गया है। लेकिन अब तो मनोरंजन का बाप चला गया , और कई सवाल छोंड गया। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-7358979935778534761?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/7358979935778534761/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=7358979935778534761' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7358979935778534761'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7358979935778534761'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='हाय रे चला गया सबका बाप ...'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6193557377616887814</id><published>2008-05-17T21:54:00.004+05:30</published><updated>2008-05-18T07:35:19.191+05:30</updated><title type='text'>अमेरिकी खाते कम फेंकते ज्यादा हैं</title><content type='html'>अभी कुछ दिनों पहले भारतीय थाली में बुश साहब को ,मिर्ची लग गयी थी। वो तोगनीमत रही कि बुश साहब को पता नहीं था कि हिंदुस्तान का इतिहास ५६ भोग और ३६ प्रकार के व्योंजनों से पटा पड़ा हैं। अगर कहीं इस बात का पता होता तो बुश साहब का चेहरा जाने कब का लाल हो गया होता। खैर जो भी हो,मैं उस देश की बात कर रहा हूँ जिस देश को महंगाई मर रही है। और विदेशियों को सब कुछ सस्ता लगता है। हम क्या खाते हैं?क्या पीते हैं ? बुश साहब अपने चछु से बगैर देखे ही दे डाले हैं। कहीं वो आम हिन्दुस्तानी की थाली देखते तो शायद ये बयान नहीं आता। क्योंकि ऐसा बयान देने के पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांक कर देखना पड़ता। बुश ने उस देश को खाता पीता करार दिया है जिसकी आधे से ज्यादा आबादी भूख से दम तोड़ती है। आज भी ऐसी आबादी है जो खाने की थाली का भोजन फेंक देते हैं, और कुछ लोग जूठन खाने के लिए मजबूर रहते हैं.वो आबादी भी कम नहीं है जो लंगर के भरोसे जी रही है। लेकिन शायद बुश साहब ऐसी हकीकत से कोसों दूर हैं। और बिना नापा तुला बयान भारतीय थाली में परोस दिया।&lt;br /&gt;लेकिन बुश साहब आप और आपकी सेना ज्यादा खाना खा नहीं पातीऔर फेंकने में भरोसा करती है। ऐसे में अगर हम अच्छा खाते हैं तो फ़िर मिर्ची आपको क्यों लग रही है। जबकि हम तो मिर्ची और गुलाब जामुन एक साथ एक ही थाली में खाते हैं।&lt;br /&gt;अभी हल ही में अंतरराष्ट्रीय जल संस्थान, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य तथा कृषि संगठन और अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि अमेरिका में ४८.३ अरब डोलर यानी तकरीबन १९ ख़राब रुपये मूल्य का खाना हर साल कूड़े में फेंक दिया जाता है। यह कुल भोजन का तीस फीसदी है। अब ये रिपोर्ट उस समय आयी है जब बुश को भारतीय थाली रास नहीं आयी है। और जब पूरी दुनिया खाद्य संकट और महंगाई की मर से जूझ रही है। टैब ये रिपोर्ट और तड़का लगा रही है। रिपोर्ट में विस्तार से समझते हुए लिखा गया है कि अमेरिका ब्रिटेन जैसे  देश इस मामले में सबसे आगे है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की बर्बादी का मतलब है कि पानी की बर्बादी। और ये मश्ले को और गंभीर बना देती है।क्योंकि दुनिया में पानी की घोर किल्लत होने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका का तीस फीसदी भोजन बर्बाद करता है, तो वह ४० खरब लीटर पानी बेकार बहने के बराबर है। इतना पानी पचास करोड़ लोगों के घरेलु जरूरतों को पूरा कराने के लिए पर्याप्त है।&lt;br /&gt;अब तो उम्मीद करना होगा कि ये रिपोर्ट बुश के ज्ञान चछू खोलेगी , और बुश साहब के देखने और समझने में फेरबदल होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6193557377616887814?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6193557377616887814/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6193557377616887814' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6193557377616887814'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6193557377616887814'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/05/blog-post_17.html' title='अमेरिकी खाते कम फेंकते ज्यादा हैं'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5544573496246564388</id><published>2008-05-06T21:41:00.004+05:30</published><updated>2008-05-07T23:26:07.017+05:30</updated><title type='text'>स्वच्छ मुम्बई गंधाती मुम्बई</title><content type='html'>मुम्बई मनपा शहर को साफ सुथरा बनने के लिए सालाना एक हज़ार करोड़ रुपये फूंकती है। लेकिन सफ़ाई के नाम पर स्वच्छ मुम्बई हरित मुम्बई का नारा केवल कचाडा धोने वाली गाड़ियों में मिलेगा। या फ़िर ज़बान में मिलेगा। रही सही कसार मुम्बई में कचाडा ढोने वाली गाडियाँ गंधने में काफी सहयोग कर रही हैं।&lt;br /&gt;मुम्बई मनपा का घन कचाडा विभाग रोजाना ७५०० मीट्रिक तन कचाडा उठाने का कम करता है। छः हज़ार कलेक्शन सेंटरों में ४६६ गाडियाँ मनपाऔर ६७३ गाड़ियों के जरिये से कचाडा उठाना निजी ठेकेदारों की है। जिसे देवनार, मुलुंड गोरे के डंपिंग ग्रौंद में दोंप किया जाता है। मनपा के रेकॉर्ड में १८०० से १९०० किलोमीटर सडकों की सुरक्षा की जाती हैं। साल २००६ - ०७ के बज़टमें ८९८ करोड़ रुपये मनपा ने कचाडा उठाने के लिए प्रावधान किए हैं। मुम्बई मनपा के वार्ड कार्यालय के अंतर्गत सहायक अभियंता और मुख्य अवेक्षक वार्ड स्तिरीय स्वच्छ पर नियंत्रण रखते हैं। अब सवाल ये उठता हैं की इतनी बड़ी यंत्रणा इतनी मोटी रकम और इतना स्टॉक होते हुए आखिर मुम्बई क्यों बदबूदार हो रही हैं।&lt;br /&gt;शहर और उपनगरों में कचाडा ढोकर दौड़ने वाली गाडियाँ अपनी बदबू से स्वच्छ मुम्बई गंधाती मुम्बई का नारा दे रहीं हैं। कचाडा गाड़ी के इर्द - गिर्द बस , कार , टैक्सी या रिक्शा खड़ा होते ही यात्रियों को अपना रुमाल निकालकर नाक पर रखना पड़ता है। सिग्नल पर ट्राफिक में कचाडा गाड़ी का पड़ोसी होना सबसे बैडलकमाना जाता हैं। यह हुयी मुम्बई वाहन चालकों की कहानी। सडकों पर चलने वाले भी इन कचाडा गाड़ियों से काफी परेशां हैं। ठंड हवाओं के बीच गाड़ी से निकलने वाली बदबू मौसम का किरकिरा कर देती है। मनपा कालेक्टिन सेंटर के आस - पास रहने वाले लोग दुकानदार अपनी किस्मत को कोसते हैं। सफ़ाई कर्मचारियों की हड़ताल इन लोगों के लिए एक अमूल्य उपहार होती है।&lt;br /&gt;मुम्बई मनपा के इसके अलावा दत्तक बस्ती योजना के जरिये स्वच्छता को बरकरार रखने का अलाप रागति है॥ पूरे शहर और उपनगर में २५० बस्ती संस्थाएं मनपा का ६० करोड़ रुपये सालाना दकारती हैं।और संस्थाये रोजी -रोटी कमती हैं। अधिकांश दत्तक बस्ती संस्थाये नगर सेवकों की प्राइवेट प्रापर्टी है, या फ़िर उनका कोई चमचा उसका संचालक है। " नया भिडू नया राज "के कारन नगर सेवक बदलते ही पुरानी संस्थाएं विश्र्जित होकर नयी संस्थायों का पुनर्जन्म होता है। मनापा अधिकारी, नगर सेवक और संस्था का त्रिगुट दिन दहाड़े लूटपाट कर रहा है। लेकिन उसकी ४० फीसदी से भी कम रकम उन मजदूरों को दी जाती है। जो १२ घंटे काम करते हैं। एकाध महीने पेमेंट मिलने पर देरी होने पर महापौर से लेकर नगर सेवक तक गुहार लगाती हैं। दत्तक बस्ती योजना के जरिये गली कूचे का कचाडा मनपा के कालेक्टों सेंटर तक लाया जाता है। और फ़िर मनपा उसे ढोकर डंपिंग ग्रौंद तक ले जाती है। यहाँ पर कचाडा ढोने का इतना विचित्र समय है की पूरी मुम्बई की जनता को पता चल जाता है की मुम्बई स्वच्छ हो रही है। क्योंकि कचाडा गाड़ी घंटों ट्राफिक जाम का कारन बनती है।&lt;br /&gt;स्वच्छ मुम्बई सुंदर मुम्बई का नारा कागजों पर सिमटने से सडकों को स्वच्छ युक्त देखना किसी सपने से कम नहीं है। रोजाना कचाडा गाड़ियों से आने वाली बदबू से मुम्बई गंधने से रोकने के लिए कचाडा ढोने का समय निश्चित किया जाना चाहिए। नहीं टू स्वच्छ मुम्बई गंधाती मुम्बई का नारा लोगों की ज़बान रहेगा साथ ही ही दिलो दिमाग पर भी छाया रहेगा.....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5544573496246564388?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5544573496246564388/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5544573496246564388' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5544573496246564388'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5544573496246564388'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/05/blog-post_998.html' title='स्वच्छ मुम्बई गंधाती मुम्बई'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6870715679156840145</id><published>2008-05-06T21:41:00.003+05:30</published><updated>2008-05-06T22:22:29.806+05:30</updated><title type='text'>मुम्बई में बहुरेंगे ट्राम के दिन</title><content type='html'>मुम्बई की भागती, दौड़ती, हांफती ज़िंदगी अब फ़िर से अतीत को याद कर सकती है। जिस शहर के लोगों ने ९० साल तक ट्राम में सफर किया हो, अब उसी शहर को फ़िर से ट्राम का लुत्फ़ मिल सकता है। ऐसे में बीते ज़माने की बन चुकी ट्राम एक बार फ़िर सर मुम्बई की सडकों में दौड़ सकती है। हालांकि अभी ये योजना अपने शुरुवाती दौर में है। मुम्बई में तेज़ी से बढ़ती आबादी की वजह से यहाँ यातायात की समस्या भयानक होती जा रही है। इसके समाधान के लिए शुरू की गई मास रैपित त्रंजिस्त सिस्टम के तहत वर्सोवा- अँधेरी - घाटकोपर क्षेत्र में ट्राम चलने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए कोल्कता में चल रहे ट्राम का अध्धयन कराने के लिए मुम्बई से टीम भी गयी थी। जिसमे ये पता चला की कोलकाता की तरह मुम्बई में ट्राम नहीं चलाई जा सकती है। ये काफ़ी पुरानी है। और घटे में चल रही है।&lt;br /&gt;ऐसे में अब ये कहा जा रहा है की यूरोपीय देशों में चलने वाली आधुनिक ट्रामों की तर्ज़ में चलाया जा सकता है। दुनिया के कई देशों में आज भे ट्राम लोगों को उनके मंजिल तक पहुंचा रही है। मेट्रो के अलावा मुम्बैकारों को अब ट्राम का भी इंतजार रहेगा। मुम्बई में ट्राम शुरू कराने का प्रारूप ऍम ऍम आर डी ऐ ने किया है , जिसको अमली जामा पहनाने का काम ऍम आर टी एस को करना है। यदि ये योजना लागू हो पाई तो ४० साल बाद मुम्बई में फ़िर से ट्राम की वापसी होगी। ट्राम के चलने में जहाँ खर्च कम आता है तो वहीं प्रदूषण से भी निजात मिल सकती है।&lt;br /&gt;अब वैसे तो ट्राम मुम्बई के अलावा कानपूर, नाशिक और चेन्नई जैसे शहरों में यात्रा का मुख्य साधन हुआ करती थी। मुम्बई में १८७४ में बिटिश शाशन के दौरान ट्राम की शुरुआत हुई थी। शुरुआत में ट्राम घोडों के जरिये चलाई जाती थी। इसके बाद १९०५ में घोडों से चलने वाली ट्राम की विदाई हो गयी। और १९०७ में एलेत्रनिक ट्राम की शुरुवात हुई। धीरे - धीरे ट्राम में यात्रियों की तादाद बढ़ गई। टैब १९२० में डबल देकर टर्म चलने लगी। लेकिन बाद में ट्राम का चलना मुश्किल हो गया ॥ और १९६४ में मुम्बई से ट्राम की विदाई हो गई ॥ इस तरह से मुम्बई के लोगों ने 90 सालों तक ट्राम की सवारी की। .........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6870715679156840145?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6870715679156840145/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6870715679156840145' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6870715679156840145'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6870715679156840145'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/05/blog-post_06.html' title='मुम्बई में बहुरेंगे ट्राम के दिन'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5814576116428882167</id><published>2008-05-02T06:41:00.002+05:30</published><updated>2008-05-02T07:09:43.338+05:30</updated><title type='text'>बनारस के अस्सी घाट में विशाल भंडारा</title><content type='html'>ब्रम्हार्शी श्री  देवरहा भारत जी महाराज योग निकेतन मुम्बई द्वारा हनुमान जयन्ती के उपलक्ष्य में विशाला भंडारा का आयोजन किया गया था था।    इसके बाद अब भारत महाराज बनारस की ओर  रूख कर रहे हैं।     श्री भारत महाराज ४ मई से बनारस के द्वारिका धीश मन्दिर के अस्सी घाट में विशाल भंडारा  कर रहे हैं। श्री भारत महाराज ने बताया कि३ मई को अखंड रामायण सुबह १० बजे से शुरू हो जायेगी । इसके बाद दूसरे दिन पूर्णाहुति है, और इसके बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया जायेगा। साथ ही संतो का समागम किया जायेगा। योग निकेतन की ओर से सभी देश वशियों से विनम्र निवेदन है कि अधिक से अधिक लोग पहुँच कर भंडारे को सफल बनायें। ये आयोजन ४ मई से ९ मई तक चलेगा।   जिसमे सुबह ८ बजे से ११ बजे तक भारत महाराज के दर्शन पा सकते हैं। इसके बाद सायं ४ बजे से ६ बजे तक दर्शन कर सकते हैं। इस दर्शन में सभी भक्त गण अपनी समस्याओं  का समाधान भारत महाराज से ले सकते हैं।&lt;br /&gt;                ये भंडारा योग निकेतन के द्वारा पिछले १० सालों से किया जा रहा है। जिसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं। श्री भारत महाराज के विषय में जितना भी लिखा जाए वो कम है। महाराज के पास कई इसेमरीज़ आये जिन्हें डाक्टरों ने जवाब दे दिया। और वो महाराज के आशीर्वाद से घोडे कि तरह दौड़ कर घर जाते है। आज महाराज कैंसर , लकवा , मिर्गी आदि घातक  बीमारियों को बिना किसी दवा के  आशीर्वाद देकर ठीक कर देते हैं। आज महाराज के आश्रम में डाक्टरों के द्वारा जवाब दिए गए मरीज रात दिन काम कर रहे है।   श्री भारत महाराज का आश्रम मुम्बई के जोगेश्वरी इलाके में रेल वे कालोनी में है, जहाँ  हर दिन हजारों कि तादाद में भक्त दरसन करते हैं।  अब अगर आप भी किसी समस्या से परेशान हैं तो फ़िर देर किस बात कि। बिना किसी पैसे के निः शुल्क आशीर्वाद मिलता है। और समस्त प्रकार की बीमारियाँ जड़ से दूर हो जाती हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5814576116428882167?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5814576116428882167/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5814576116428882167' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5814576116428882167'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5814576116428882167'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/05/blog-post.html' title='बनारस के अस्सी घाट में विशाल भंडारा'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-7188606081176345231</id><published>2008-04-29T21:08:00.002+05:30</published><updated>2008-04-29T21:51:18.442+05:30</updated><title type='text'>मुम्बई तुझे सीने से लगाये हैं</title><content type='html'>जाने क्या बात है बम्बई तेरी शबिस्तान में&lt;br /&gt;          कि हम शाम -ऐ अवध और सुबह ऐ बनाराश छोंड आए हैं........&lt;br /&gt;          तेरी सड़कों पे सोये, तेरी बारिश में नहाये हैं&lt;br /&gt;          तुझे ऐ बम्बई हम फ़िर भी सीने से लगाये हैं........&lt;br /&gt;                                                                                              अली सरदार जाफरी &lt;br /&gt;         कुछ इसी जज्बात के साथ मुम्बई के बारे में याद दिलाता हूँ। मुम्बई महिम, कुलाबा, छोटा कुलाबा मझागोवं, वरली, परेल और माटुंगा सात छूते टापुओं का समूह है। ऐसे सात टापू में से कुलाबा, मझगांव और महिम ये तीनो सभी सभी द्रष्टि से महत्वपूर्ण थे। इन सभी टापुओं पर ज्यादातर लोगों कि संख्या कोली समाज कीथी। आज एस कोली समाज की बस्ती ऐसे स्थानों पर मौजूद है। एस कोली समाज के कुल देवता का नाम मुम्बई आई है। और अंग्रजों ने इसका अपभ्रंश मुम्बई किया।&lt;br /&gt;               मुम्बई की खोज  प्रशिध्ध भूगोल शास्त्री पिन्तोल मीने ने इ.स। १५० में की थी । खिस्ती शत पूर्व २७३-२३२ इधर मौर्या काल का शासन रहा।  ८१० से १२६० तक शिलाहरा का राज्य चला। २३-१२ १९३४ को सुलतान बहादुर शाह ने पुर्तगाल को ८५ पौंड लगन भरने की शर्त पर हमेशा के लिए दे डाला। उसके बाद उस दौर में डच और अंग्रेज भी आ गए। केरल किनारे के मलबारी यहाँ आकर बस गए ।  और जिस  टेकडी पर उनका अड्डा है , वो प्रसिद्ध मालाबार हिल है।&lt;br /&gt;             १६६१ में अंग्रजों  को राजकुमारी कैथरीन का चार्ल्स दूसरे से विवाह  में दहेज़ के रूप में दिया गया। इसके &lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;बाद अंग्रजों &lt;/span&gt;n&lt;/span&gt;ऐ इसे ईस्ट इंडिया कंम्पनी को १० पौंड वार्षिक राशी पर पत्ते पर दे दिया। सन१६१२ में अंग्रजों ने अपना मुख्य कार्य क्षेत्र सूरत से हटाकर मुम्बई करेदिया। आज इस शहर को गिलियान तिन्दल ने " सिटी आफ गोल्ड " की उपाधि दी।    एक ओर जहाँ  ये महानगर लंदन  और पेरिश से टक्कर लेता है वहीं दूसरी ओर निर्धनता की पराकाष्ठा भी दर्शाता  है। यहाँ एक ओर वैभव शाली अत्तालिकाए, चमचमाती शानदार कारें और पाँच सितारा होटल वहीं दूसरी ओर झुग्गी , झोपदियाँहैं।   यहाँ है वैभव एश्वर्या और चमक - दमक का साम्राज्य है। देश के सबसे सम्र्ध्ध औधोगिक घरानों जैसे बिड़ला, टाटा अम्बानी के मुख्यालय यहाँ स्थित है। यहीं पर मुम्बई फ़िल्म उद्योग को चकाचौंध कराने वाले स्टूडियो हैं। जो बहरत वर्ष के कोने - कोने से युवक- युवतियों  को आकर्षित करते हैं। कुछ सपने पूरे होकर वो प्रशिधी की ऊंचाई  में पहुँच  जाते है। लेकिन जादातर लोगों का जीवन थोंकारे खाकर गरीबी में ही गुजर जाते हैं।  सारे  देश से लोग अपना भाग्य बनने यहाँ आते हैं। कहतें  हैं मुम्बई म,एन सोना बिखरा पड़ा है।   .उसे  टू खोजने वाले और उठाने वाले चाहिए। इतिहास ऐसे कई लोगों को उदाहरण पेश करता है। की कैसे लोग यहाँ लोटा डोर लेकर यहाँ आए, और अपने पुरुषार्थ और व्यापर कौशल पर बुलंदी पर पहुँच गए।  &lt;br /&gt;          मुम्बई शहर के मूल निवाशियों की अधिष्ठात्री मुम्बा देवी के नाम से मुम्बई का नाम पड़ा। देश में रेल का मुंह देखने का श्रेय इसेसहर को मिलहुआ है। टैब से लेकर अब तक मुम्बई में कई परिवर्तन हो गए हैं। एस शहर ने बाढ़, विस्फोट, dange  झेले हैं लेकिन न थामने वाली मुम्बई मुस्कराते हुए अपने  रफ्तार पर बनी रही और आज मुम्बई सिर्फ़ एक ही धर्म जानती है - काम कारन और चलते रहना।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-7188606081176345231?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/7188606081176345231/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=7188606081176345231' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7188606081176345231'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/7188606081176345231'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_29.html' title='मुम्बई तुझे सीने से लगाये हैं'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-6922538550433359250</id><published>2008-04-28T22:21:00.002+05:30</published><updated>2008-04-28T22:52:54.656+05:30</updated><title type='text'>महाराष्ट्र स्थापना दिवस</title><content type='html'>एक मई १९६० को महाराष्ट्र प्रथक राज्य बना&lt;br /&gt;           महाराष्ट्र का इतिहास काफी पुराना है। इसके लिखित इतिहास के अनुसार सबसे पहेले इस राज्य में सातावाहन राजवंश और उसके बाद वाकाटक वंश का राज्य रहा है। इसके पश्चात इस क्षेत्र पर कलचुरी, चालुक्य, यादव, दिल्ली के खिलजी और बहमिनी वशों ने शाशन किया।  इसके बाद केंद्रीय सत्ता बिखरकर छोटी-छोटी सल्त्नातों में बदल गई।&lt;br /&gt;सत्रहवीं शताब्दी में शिवा जी के प्रभावशाली बनने के बाद आधुनिक मराठा राज्य का उदय हुआ। शिवाजी ने बिखरी ताकतों को एकजुट कर शक्तिशाली सैन्य बल का संगठन किया।     इस सेना की मदद से मुग़लों को दक्षिण के पत्थर से आगे बढ़ने से रोंका। लेकिन, शिवाजी की म्रत्यु के बाद मराठा शक्ति बिखरने लगी। शिवाजी के उत्तराधिकारियों की विफलता के कारणपेशावओं ने सत्ता पर अधिकार कर लिया। सन १७६१ में पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद मराठा शक्ति पूरी तरह से बिखर गई।  अंततः १८१८ तक अंग्रजों ने सम्पूरण मराठा क्षेत्र पर अपना आधिपत्य अथापित कर लिया। फी से १८७५ में नाना साहेब के सनिकों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गाँधी और तिलक ने महाराष्ट्र के लोगों को सक्षम नेत्रत्व प्रादन किया। स्वंत्रता प्राप्ति के बाद बम्बई प्रान्त में महाराष्ट्र और गुजरात शामिल थे। बाद में बम्बई पुनर्गठन अधिनियम १९६० के अंतर्गत एक मई १९६० को इस सम्मलित प्रान्त को महाराष्ट्र और गुजरात नामक दो प्रथक राज्यों में बाँट दिया गया। पुराने बम्बई राज्य  की राजधानी नए महाराष्ट्र राज्य की राजधानी बन गई। सन १९९५ में बम्बई का नाम बदलकर मुम्बई कर दिया गया।&lt;br /&gt;            अगर महाराष्ट्र के भौगोलिक क्षेत्र में नजर डालें &lt;span class=""&gt;तो महाराष्ट्र &lt;/span&gt;देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य के पशिम में अरब सागर, दक्षिण में कर्नाटकदक्षिण पूर्व में आंध्र प्रदेश और गोवा , उत्तर पशिम में गुजरात और उत्तर में मध्य प्रदेश स्थित है।महाराष्ट्र का तटीय मैदानी भाग कोंकण कहलाता है। कोंकण के पूर्व में सह्याद्री की पड़ी श्रंखला सागर के समांतर स्थित है। आज महाराष्ट्र में विधान सभा की सीटें २८८, विधान परिषद् की सीटें ७८ ,लोकसभा की सीटें ४८  ,और राज्य सभा की १९ सीटें हैं। और महाराष्ट्र में ३५ जिले है।&lt;br /&gt;             अब अगर वर्तमान  राजनीतिक बात करें तो महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाने पर हमेश बवाल उठता है। इसी वज़ह से उत्तर भारतीयों ने महाराष्ट्र सथापना दिवस मनाने का फैसला भी किया है। उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड के सांस्कृतिक मंच &lt;span class=""&gt;ने महाराष्ट्र &lt;/span&gt;सथापना दिवस मनाने का फैसला किया है। जाहिर है इया कार्यक्रम से मराठी और गैर मराठियों में बढ़ रही खाई कम होने की उम्मीद जताई जा सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-6922538550433359250?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/6922538550433359250/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=6922538550433359250' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6922538550433359250'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/6922538550433359250'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_28.html' title='महाराष्ट्र स्थापना दिवस'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-1768826764147001354</id><published>2008-04-27T00:21:00.002+05:30</published><updated>2008-04-27T00:58:19.162+05:30</updated><title type='text'>इस बार आग उगलेगा सूरज</title><content type='html'>इस  साल मुम्बई में ठंढ ने सभी तरह के रेकॉर्ड को ध्वस्त करके ठंढ चरम पर पहुँच गई।    पिछले ४४ सालों के रेकॉर्ड को ठंढ ने तोड़ दिया।   और पूरी मायानगरी कांप गई। लेकिन इस साल मुम्बई के अलावा पूरे देश वाशियों को उमस भरी गर्मी ज्यादा झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि इप्च्क की रिपोर्ट ने जिस तरह के संकेत दिए हैं , उससे यही मालूम पड़ता हैं की इस बार लू के थपेडे ज्यादा सहने पडेगें। मौसम विग्यनिओं की बात माने तो उनका  कहना है की पिछले दस सालों से शीत लहर और लू के थपेडों में बढोत्तरी हुई है।  इस साल गर्मियों में नए - नए रेकॉर्ड बनने की संभावना है। वहीं पिछले महीने नागपुर और विदर्भ में ओले गिरे। एक तो पहले बेमौसम बारिश फ़िर ओले गिराने से पहले से ही जख्म खाए  किसानों के जख्म और हरे हो गए ।  ये सब हो रहा है ग्लोबल वार्मिंग की वजह से । &lt;br /&gt;इप्च्क यानि इंटर गवर्नमेंट पैनल ऑन क्लीअमेत चेंज  की रिपोर्ट भी यही कहती है की ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ये सब हो रहा है।  रिपोर्ट ने ये संकेत दे दिए हैं की इसबार पारा ४५ के पार रहेगा। मुम्बई जैसे शहर में जहाँ सम शीतोष्ण  रहता है, वहां भी पारा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।     अभी अप्रैल का महीना ख़त्म होने के कगार में चल रहा है। और यहाँ गर्मी ने सबका कचूमर निकालना शुरू कर दिया है। लोकल ट्रेन में भेड़ बकरी की तरह ठुंसे रहने वाले यात्रियों की जबान बदल गई है.पहले कहते थे गर्दी (भीड़) बहुत ज्यादा है।   अब कहतें हें- गर्मी ज्यादा है.अब अगर उत्तर भारत की बात करें तो तो वहाँ गर्मी और ठंढी का गढ़ माना जाता है। गर्मी में जहाँ जाने जाती है तो वहां ठंढी में भेड़ जाने जाती है। लेकिन अभी तक वहाँ तपन मई में शुरू होती थी। और बारिश के पहले तक असर रखती थी। लेकिन इस बार मई के बिना इन्तजार किए ही गर्मी ने दस्तक दे दी। और पारा अभी से ही ४५ के पार  हो गया।  अगर में में तो लोग पारा के ऊपर चढाने से बहाल हो गए हैं।       &lt;br /&gt;अब सवाल ये उठता है की प्रकृति का परिवर्तन   है, होता रहता है.लेकिन ये परिवर्तन घातक क्यों साबित हो रहा है।   &lt;br /&gt;धरती को गर्म से बचानेकी पहल पर पर ग्लोबल वार्मिंग के चलते दुनिया कई लोग जागरूक भी हो गए हैं। ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों के चलते जागरूकता निर्माण कराने के लिए एक घंटे के लिए बिजली का उपयोग नहीं क्या गाया। "अर्थ अवर " नाम से किए गए इस प्रयोग में विश्व के ३७१ देशों में रात्रि ८ से ९ बजे तक बिजली का उपयोग नहीं किया गया । इस तरह से ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए तमाम तरह के प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन जरूरत है की प्रकृति से छेड़- छाड़ नहीं करे।     अगर अपनी आदतों में सुधर नहीं हुआ तो  कितना भी जागरूकता फैला लो , सूर्य देवता तो आग उगलेंगे ही ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-1768826764147001354?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/1768826764147001354/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=1768826764147001354' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1768826764147001354'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/1768826764147001354'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_27.html' title='इस बार आग उगलेगा सूरज'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-8165562766745646468</id><published>2008-04-26T06:12:00.002+05:30</published><updated>2008-04-26T06:53:41.745+05:30</updated><title type='text'>भज्जी का थप्पड़ जग जाहिर</title><content type='html'>मोहाली में मैच चल रहा था , एक तरफ़ मुम्बई की टीम तो दूसरी  तरफ़ पंजाब की टीम। दोनों टीम को जीत का खाता खोलना था । किसी ना किसी का खाता खुलना था। खाता खोल दिया पंजाब की टीम ने , बस फ़िर क्या था। अम्बानी टीम के कैप्टन  यानी मुम्बई टीम हरभजन  हार नहीं झेल  सके , और श्री शांत को एक थप्पड़ रसीद कर दिया। बस फ़िर क्या था , जिसकी मैदान में कभी तूती बोलती थी । वो फूट -फूट  कर रोने लगा ।  आँखों से आंसू छलकने लगे , आंसू थामने का नाम नहीं ले रहे थे। साथी खिलाड़ी आंसू पोंछने लगे, लेकिन जख्म इतने गहरे थे , की थामने वाले ही नहीं थे।  पहले तो शांत के आंसू देखर यही लगा कि खुशी के आंसू हैं, लेकिन खुशी के आंसू और गम के आंसुओं में फर्क जल्द ही पता चल गया ।  रही सही  कसर युवराज ने पूरी कर दी और जो बताया उसे सुनकर सबकी ऑंखें फटी कि फटी रह गयी। और युवराज ने ही खुलासा किया कि हरभजन ने थप्पड़  mara  है । मामले को देखते हुए हरभजन ने kshama  भी  मांगी  । लेकिन क्या IPL में anushaashan khatm हो गया है।  जब हार नहीं hazam नहीं हुई तो थप्पड़ मारकर आत्म शान्ति pahunchaa रहे हो। khel को khel कि  भावना से khelanaa चाहिए । ये श्री शांत पर थप्पड़ नहीं बल्कि IPL पे थप्पड़ है। अगर kahin bahar होता तो क्या होता । बाद में फ़िर उसी तरह के केस का samna करते । BCCI ने  तो gambheer mamala बताया है, और कुछ ना कुछ hal  nikalane का ashwashan दिया है।  लेकिन क्या भज्जी को थप्पड़ maarane पर जीत मिल गई है ? हम aapas में ही ulajhana chahate हैं।   लेकिन भज्जी ने जो कुछ bhee किया वो khel भावना को darkinaar करके उसने किया । filhaal kings elevan ने मैच refari से shikayat भज्जी के khilaf darz kara दी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8165562766745646468?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8165562766745646468/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=8165562766745646468' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8165562766745646468'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/8165562766745646468'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_26.html' title='भज्जी का थप्पड़ जग जाहिर'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5067357338618716838</id><published>2008-04-25T00:24:00.007+05:30</published><updated>2008-04-25T01:18:45.317+05:30</updated><title type='text'>महाराष्ट्र में यौन शिक्षा</title><content type='html'>बजट सत्र के दौरान विधान मंडल में  यौन शिक्षा देने की बात शिक्षा मंत्री बसंत पुरके ने की।  लेकिन जब विपक्ष नहीं माने  तो सरकार को पीछे हटाना पड़ा। और अब सरकार ने एक समिति गठन करने का फैसला लिया है , और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही विचार किया जायेगा। लेकिन यक्ष सवाल ये है की जिस देश में १८ साल  की उम्र में सरकार चुनने का अधिकार है , तो क्या इस उम्र में  यौन शिक्षा देने कि जरूरत नहीं है। इस उम्र में एक आम लड़की कि शादी शादी हो जाती है। तो क्या एसे में ये जरूरी नहीं है कि पहले ही उसे दांपत्य जीवन के बारे में जरूरतों और सावधानियों कि जानकारी दे दी जाए ।&lt;br /&gt; एक बात गौर करने कि है यौन भावना और यौन जानकारी का आपस में कोई संबंध है कि नहीं।   बहुतों का कहना है कि यौन जानकारी बच्चों  में ग़लत भावनाओं  को उभारेगी। ये  भारतीय संस्कृति को दूषित करेगी ।  लेकिन यौन जानकारी के बिना भी यौनेछा तो उपजेगी  ही।   तब इसे समझना और संयमित करना और मुश्किल हो जाएगा ।   क्योंकि चोरीछिपेहशील कि गयी जानकारी कैसे होगी ये कल्पना से बाहर है।&lt;br /&gt;कई बार ये भी कहा जाता है कि बच्चो को इन सबकें के बारें में बड़े लोगों से जानकारी मिल जाती है।  लेकिन हमारा तथाकथित पढ़ा लिखा वर्ग भी किस तरह कि जानकारी रखता है ये किदी से छिपा नहीं है । &lt;br /&gt;माहवारी आने पर कपडा बाँध लेने कि बात ही यौन शिक्षा तक सीमित नहीं है।    हमारा महिला समाज अपनी देह को सुंदर दिखाने में जीतनी रुचि लेता है उसकी चौथाई भी अगर शरीर कि समस्याओं को समझनेमें लेता तो कई ऐसेबीमारियों से बचा सकता है। जो बाद में जानलेवा साबित होती है। इसलिए पुरषों कि तुलना में महिलाओं को तो यौन जानकारी देना और भी जरूरत है।  &lt;br /&gt;एक बात ये भी है कि यौन शिक्षा का जो विरोध हो रहा है , उसके पीछे भी पुरुषवादी मानसिकता ही ज्यादा कम करती है । लेकिन यक्ष एक बात मानना होगा कि यौन जानकारी देने वाली शिक्षा न केवल ख़ुद में आत्म विश्वाश लाती है, बल्कि इससे सामाजिक स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5067357338618716838?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5067357338618716838/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5067357338618716838' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5067357338618716838'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5067357338618716838'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_25.html' title='महाराष्ट्र में यौन शिक्षा'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5895843043603629593</id><published>2008-04-22T08:09:00.002+05:30</published><updated>2008-04-22T08:48:24.559+05:30</updated><title type='text'>मुझे सरकारी गुंडों से बचाओ</title><content type='html'>मुम्बई के किल्ला कोर्ट में अरुण गवली की पेशी थी, सभी कैमरा मन कैमरा तान कर खड़े हो गए , शूटिंग चल रही थी , तभी कर्तव्यनिष्ठा से शूटिंग कर रहे सीटीवी के कैमरा मन पर पुलिस ने हाथ उठा दिया, और बेबाक शब्दों में जवाब दिया ये हमारा काम हैं। यानी अब पुलिस के काम बदल गए है।   उनकी  कर्तव्यनिष्ठा बदल गयी है..उल्टे धमकी देकर चेतावनी भी देतें हैं। सवाल यही उठता है की इन पुलिस वालों को किसने अधिकार दिया है इस  तरह से क़ानून को हाथ में लेने के लिएसाथ ही ये भी धमकी दे देते हैं की जो करना है कर लेना। यानी कानून इन्हीं से बनता है,  और  इन्हीं पर khatm &lt;span class=""&gt;hotaa&lt;/span&gt; है ।   मीडिया और पुलिस में karib एक घंटों तक nonk jhonk chalati रही , और पुलिस bavaal katati रही ।   shikaayat लिखने में भी aanaakaani करते रहे , लेकिन बाद में shikat darz की , और मुम्बई आला afasar kaa  bayan  आता है की sakhat karrvaai kee jayegi॥  लेकिन kahin ये bayaan jhunjhanaa ना sabit हो jae जिसे केवल bajaate रहा jaen ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5895843043603629593?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5895843043603629593/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5895843043603629593' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5895843043603629593'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5895843043603629593'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html' title='मुझे सरकारी गुंडों से बचाओ'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-4861924909321598896</id><published>2008-04-16T23:27:00.002+05:30</published><updated>2008-04-17T00:21:30.574+05:30</updated><title type='text'>जाति- प्रथा समता मूलक समाज की स्थापना में सबसे बड़ी बाधा है</title><content type='html'>भारतीय समाज की जाति व्यवस्था को देखकर संसार के समाज शास्त्री चकित रह जाते हैं। जातियाँ और वर्गभेद संसार के सभी समाज में है। लेकिन जो रूप भारतीय समाज में प्राप्त होता है, वह अद्वतीय है।  इस व्यवस्था ने समाज में आज जिस तरह अपना जाल फैला लिया है। उससे मुक्ति असोभाव प्रतीत होती है। हिंदू समाज तो इससे बुरी तरह ग्रस्त है ही, मुसलमान, ईसाई औए सिख भी इसके सर्वग्राही प्रभाव से मुक्ति नहीं है। सामाजिक द्रष्टि से जाति प्रथा का सबसे घृणित रूप ऊंच-नींच की भावना है। यह एसी सीढ़ी&lt;span class=""&gt;दार व्यवस्था &lt;/span&gt;है, जिसमें सबसे ऊंची सीढ़ी पर खड़ा व्यक्ति भी अपनी सर्वोच्चता के लिए अनेक प्रकार के दावेपेश करता है। सबसे निचली सीढ़ी पर कौन खड़ा है, यह भी निर्विवाद नहीं  है। जाति व्यवस्था को तीन कसौटियों पर कसा जा सकता है।एक क्या सभी जातियों के लोग एक साथ धर्म स्थलों पर बैठकर पूजा- पाठ कर सकते हैं । दूसरा क्या सभी जाति के लोग बिना भेद -भाव किए भोजन कर सकते हैं? तीसरा क्या जाति भेद की चिंता किए बिना लोग आपस में विवाह- संबंध स्थापित कर सकते है&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;हिंदू समाज में ये तीनो प्रायः वर्जित हैं। हम रोटी दे सकते हैं, बेटी नहीं । अस्प्रश्य जातियों के लिए सदियों से मन्दिर में प्रवेश निषिद्ध रहा है। खान-पान का भेद पहले से बहुत कम हुआ है। आधुनिक जीवन की अनेक ऐसी बा&lt;/span&gt;ध्याताये हैं की कुछ  कट्टर मान्यताओं वाले अपवादों को छोंड़कर इसका पालन करना सहज नहीं है।   किंतु आज भी सभी जातियों के लोग एक ही पंगत में बैठकर भोजन करें , ऐसे बहुत कम देखने को मिलाता है। जहां तक वैवाहिक संबंधों की बात है , इसमे जाति बन्धन का टूटना लगभग असंभव है। अपने ही वर्ण और वर्ग में ही लोग ऊंच-नीच का बहुत विचार करते हैं। ऐसे में अन्य जाति के विषय में सोंचना बहुत दूर की बात है। इस्लाम, ईसाई और सिखों में धार्मिक स्तर पर जाति प्रथा का पूरी तरह खंडन है।  और ऊंच- नींच की भावना का पूरी तरह निषेध है। किंतु ये समुदाय भी दो पड़ाव पार करने के बाद तीसरे पड़ाव पर पहुंचकर ठिठक जाते हैं। अगर हम मुसलमानो की बात करते हैं तो कुरान, मस्जिद में यह स्पष्ट है की "इस्लाम में जाति के आधार पर  सामाजिक बंटवारे का कोई स्थान नहीं है।     &lt;br /&gt;भारत के अधिसंख्यक मुसलमान यहीं के धर्मान्तरित लोग थे , विशेष रूप से सूद्र जाति से।  भारत में लोगों की संख्या बहुत कम है, जो अपना संबंध उन पूर्वजो से जोड़ते हैं। जो अरब तुर्की , इरानी या अफगानिस्तान से यहाँ आए थे । ये लोग अशरफ कहलाते थे । और मुसलमानों को अपने से बड़ा मानते हैं। जो स्थानीय है ऐसे मुसलमानों को अज्लाफ़ कहा जाता है। सैयद , पठन, शेख, मुग़ल आदि अशरफ कहे जाते हैं। अंसारी, धुनिया लोहार बढ़ाई जैसे मुस्लमान जो अपने को राजपूतों और जातों की संतान मानते हैं, अन्य धर्म परिवर्तित मुसलमानों से श्रेष्ठ मानते हैं.कहीं न कहीं जाति प्रथा अपनी सभी बुराइयों के साथ इनमें भी विद्यमान है ।  पूजा- पाठ के समान अधिकार और लंगर की व्यवस्था के बावजूद वैवाहिक संबंधों में सिख समाज में भी वही जड़ता व्याप्त है, जो इस देश में सदियों से चली आ रही हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-4861924909321598896?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/4861924909321598896/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=4861924909321598896' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4861924909321598896'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/4861924909321598896'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_3004.html' title='जाति- प्रथा समता मूलक समाज की स्थापना में सबसे बड़ी बाधा है'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-2901066620115459520</id><published>2008-04-16T22:21:00.002+05:30</published><updated>2008-04-16T23:15:06.782+05:30</updated><title type='text'>बोली का बोलबाला</title><content type='html'>&lt;span class=""&gt;                                                                             आई&lt;/span&gt; पी एल मंडी का क्रिकेट १८ से ...&lt;br /&gt; आई पी एल  का संग्राम १८ अप्रैल से शुरू हो रहा &lt;span class=""&gt;है। आई पी एल  &lt;/span&gt;का मंडी में सभी खिलाड़ी मैदान मरने की तैयारी में जुट गए हैं। आई पी एल  की पैदाइश है। बीसीसीआई ने जिस तरह के हथ्कोंदे अपनाए, उसने मिटटी को भी सोना बनाया है। और उसे सोना के  भाव में बेंचा भी है। पहले &lt;span class=""&gt;तो आई पी एल  &lt;/span&gt;का बाज़ार सजाया । जाने माने कारोबारियों ने पानी की तरह पैसा बहाया । जिन्होंने कभी कारोबार नहीं किया उन्होंने भी हाँथ साफ कराने की कोशिश की है। खिलाड़ियों की बोली लगी ।  और कंपनी चहेते खिलाड़ियों के लिए पानी की तरह पैसा बहाया।    इसके बाद सभी कंपनियों ने ताम झाम के साथ टीम लॉन्च की। कोई कसार न  रह  जाए इसके लिए ब्रांड एम्बेसडर भी बनाये गए।    खिलाड़ियों और दर्शकों के मनोरंजन के लिया सरे बंदोबस्त किए गए हैं।    खिलाड़ियों की बोली के समय से &lt;span class=""&gt;ही कंपनियों  &lt;/span&gt;का बोलबाला शुरू हो गया था। इस बोली में सबसे महंगे थे  धोनी। जिन्हें चेन्नई की टीम ने छह करोड़ रुपये में ख़रीदा।   इस बोली में भारत के ३३ खिलाड़ी शामिल हैं। आस्ट्रेलिया के १३ दक्षिण अफ्रीका के ११, पाक के ८, श्रीलंका के ९, न्यूजीलैंड के ६, वेस्ट इंडीज़ के ३ और बंगलादेश के २ खिलाड़ी शामिल हैं।    जबकि जहाँ क्रिकेट पैदा हुआ है यानी इंग्लैंड के अक भी खिलाड़ी शामिल नहीं हुए हैं। इसमें आई कान खिलाड़ियों को भी दर्जा भी दिया गया है।    और ये दर्जा मिला है सचिन, सौरव, राहुल, युवराज और वीरेंद्र को। और अब ललित मोदी की जादू १८ अप्रैल से शुरू हो रहा है। जो की १ जून २००८ की ख़त्म हो रहा है।&lt;br /&gt;अब अगर विचार करें तो आई सी एल के खुन्नस के कारन ही आईपीएल को बीसीसीआई ने पैदा किया है।   &lt;span class=""&gt;और बीसीसीआई &lt;/span&gt;के रंग के आगे  आई सी एल फींका पड़ गया है।   और दे दनादन , दनादन चल रहा है। &lt;span class=""&gt;इस आईपीएल &lt;/span&gt;से जहाँ देश में छिपी प्रतिभा को इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ हुनर दिखाने मौका मिलेगा। तो वहीं सबसे बड़ी बात उभरकर सामने ये आरही है की जिनके ऊपर नस्लवाद का आरोप लगता था , और जो मढ़ते थे वो सब एक ही थाली में खाएँगेयानी एक साथ जब मैदान में उतरेंगे .तो जिस तरह की गलतफहमियां पैदा हो चुकी थी ।  हो सकता है उन्हें पटने का मौका मिल जाएँ। और सबको एक ही धागे में बांधकर तू दिखा हुनर ......&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-2901066620115459520?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/2901066620115459520/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=2901066620115459520' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/2901066620115459520'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/2901066620115459520'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_16.html' title='बोली का बोलबाला'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5543146008113653529.post-5310021427586971959</id><published>2008-04-15T23:25:00.000+05:30</published><updated>2008-04-16T00:30:22.928+05:30</updated><title type='text'>वेश्यावृत्ति को खत्म करना चाहतें हैं या वेश्याओं को</title><content type='html'>बीएचयू के  सैकड़ों छात्रों ने वाराणसी के रेड लाइट इलाके शिव्दाश्पुर के कोठों पर सुनियोजित ढंग धावा बोलकर कई नाबलिंग लड़कियों को इस अमानवीय पेशे से मुक्ति दिलाने का दावा कर तहलका मचा दिया।    वहीं मुम्बई के रेस्कुई फाउंडेशन ने रेड लाइट इलाके भिवंडी से सेक्स का प्रीपेड टोकन से लड़कियों को मुक्त कराया। इस तरह से मुक्त करे गयी बालिकाओं मै से ज्यादातर वैधानिक रस्म अदायगी व पुलिसिया दोहन के बाद देर- सबेरे या हालत से लचर होकर फ़िर इस दोजख में नहीं लौट आएँगी । लड़कियों  द्व्रारा अपने मुक्त सेनानियों से पूँछे गए यक्ष प्रश्न का जवाब किसी के पास नहीं था की पुलिस तो हमसे पैसा खाती है , पर क्या तू मुझसे शादी करेगा ?&lt;br /&gt;हम कुलमिलाकर एक हिपोक्रेट समाज के अभिन्न अंग हैं।       ढिंढोरा तो हम पीटतें हैं , गरीबी हटाने का , मगर अब तक अनुभव यही बयान करता है की हमारी व्यवस्था गरीबों को ही हटा देती है।    कहा जाता है वेश्यावृत्ति दुनिया का सबसे पुराना धंधा है, यह एक ऐसी कड़वी  सच्चाई है, जिसके सामने मनो दुनिया भर की संभावनाएँ नजरें नीची किए , सिर झुकाएं खड़ी हैं।  एक ऐसा कर्म की वेश्या के रूप में पुरूष भी करता कारक हैं। मानवीयता पर कलंक इस व्यवसाय को ख़त्म करने के मकसद से पुरूष प्रधान हमारे समाज की कुल कवायद वेश्याओं के इर्द गिर्द ही मंडराती रहती है।      &lt;br /&gt;जबकि इसे पसरने व पनपने के लिए ईंधन मुहैया करवाने वाले एक विशाल वर्ग (ग्राहंक) सदैव नजर अंदाज़ कर दिया जाता है ।   नतीजन जख्म ऊपर से ठीक हो जाता है।     और  अन्दर से हरा ही रहा जाता है।        मौका पते ही नासूर बनकर उभरने लगता है।    जब तक बाज़ार में खरीददार मौजूद है, वेश्यावृत्ति का खत्म भला कैसे संभव है।&lt;br /&gt;किसी ज़माने में मनीला के मेयर ने वहां के तकरीबन तीन सौ बार बंद करावा कर कई तरह की पाबंदियाँ लगाव दी थीं ।    मुम्बई समेत महारास्त्रमें बार बालाओं पर शिकंजा कसने की सरकारी कवायद सालों से देश में सुर्खियों में रही । करांची में मानवाधिकार से जुड़े वकीलों ने कभी ऐसे गिरोह के खिलाफ जनमत टायर किया था।  जिन्होंने हजारों बंगलादेशी लड़कियों का अपहरण कर वेश्या बना दिया था । मगर क्या इन सबसे से उन देशों में इस कारोबार की खात्मा हुआ? उल्टे इलाज कराने की कसरत में मर्ज़ ही लाईलाज़ होता जा रहः है।     &lt;br /&gt;एक बार इस दोजख में कदम रख देने वाली औरत को क्या हमारा समाज इस कदर परिपक्व है की उन्हें चैन से कोई और कारोबार कर रोजी रोटी कमाने देगाइन सरे सवालों के जवाब नहीं है। फ़िर क्या यह संभव नहीं है की लचर होकर वे लड़कियों के तौर तरीके बदलकर फ़िर इस पेशे को ही विस्तार दे।इस देश में अपराध को रोंकने के लिए कानून बनने वाले के मुकाबले उसे तोड़ने वाली प्रतिभाएं कहीं ज्यादा कुशाग्र बुद्धि संपन्न है। अगर ऐसा ना भी हुआ तो पुलिस उन्हें तलाश-तराश कर देती है।     &lt;br /&gt;अब सवाल यह उठता है की अगर हम पेशा छोंड दे तो क्या सरकार हमें रोजी रोटी की गारंटी देगी इस तरह के तमाम सवाल के जवाब नहीं मिल रहे है।  यक्ष सवाल यह है की हम वेश्यावृत्ति को ख़त्म करना चाहतें है या वेश्याओं को । &lt;br /&gt;इसके लिए सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, व राजनीतिक मोर्चों पर हमने कितना होमवर्क किया ।     अगर हमने कोई तैयारी नहीं किया तो ऑपरेशन शिव्दाश व रेस्कुई फाउंडेशन सरिखें अभियान मीडिया मै क्षणिक कौताहल पैदा कराने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-5310021427586971959?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/5310021427586971959/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=5310021427586971959' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5310021427586971959'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/5310021427586971959'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post_15.html' title='वेश्यावृत्ति को खत्म करना चाहतें हैं या वेश्याओं को'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' 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गृहस्थों का कोपभाजन बन जाती है। कभी लहसुन टू कभी प्याज़ , कभी आलू तो कभी चीनी उसकी भेंट ले लेते हैं।    &lt;/p&gt;&lt;p&gt;महंगाई सरकारों के आने और जाने की बहाना  बन जाती है। महंगाई मनोरंजन का भी सस्ता एवं सर्व सुलभ साधन है।     भारतवासी कुस्ती देखने के बड़े शौकीन होते है। जब भी जनता के पेट में दर्द होता है सरकार उसे अस्वाशन का सीरप पिला देती है ।  हम  महंगाई के खिलाफ लडेंगे । सुनकर जनता को दो पल के लिए राहत महसूस होती है । वह नंगी आंखों से सरकार और महंगाई का मल्ल्युध्धा देखती रहती है। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-8112670985172410600?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/8112670985172410600/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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पत्तों को पानी दे रही है। पाती सींचने से देश की उद्धार होने वाला नहीं है। जड़ मे पानी दो जिससे आम आदमी को इसका फायदा मिले।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5543146008113653529-3882871406639157708?l=natakhat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://natakhat.blogspot.com/feeds/3882871406639157708/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5543146008113653529&amp;postID=3882871406639157708' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3882871406639157708'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5543146008113653529/posts/default/3882871406639157708'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://natakhat.blogspot.com/2008/04/blog-post.html' title='आरक्षण की मारामारी'/><author><name>Natkhat</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07720125733673053883</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='25' src='http://1.bp.blogspot.com/_oKZjSOL-984/SWHfjXQ8WPI/AAAAAAAAABs/xWig81ccRrc/S220/Still0425_00001.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
